Unveiling of Seva Tirtha Bhawan Complex
संदर्भ:
आज 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth) भवन परिसर का उद्घाटन करेंगे, जो ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना’ (Central Vista Redevelopment Project) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सेवा तीर्थ भवन परिसर के बारे में:
- परिचय: ‘सेवा तीर्थ’ PMO और उससे संबंधित परिसर का नया नाम है, जिसे पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाता था।
- नाम का अर्थ: ‘सेवा’ का अर्थ है निष्काम भाव से कार्य करना और ‘तीर्थ’ का अर्थ है एक पवित्र स्थान। यह नाम ‘सत्ता’ (Power) के केंद्र को ‘सेवा’ (Service) के केंद्र में बदलने के सरकारी दर्शन को दर्शाता है।
- अवस्थिति: यह परिसर नई दिल्ली के ‘कार्यपालिका परिसर-1’ (Executive Enclave) में वायु भवन के निकट स्थित है।
- लागत और निर्माण: लगभग ₹1,189 करोड़ की लागत से निर्मित इस परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया गया है।
- संरचना: इसमें तीन मुख्य हाई-टेक इमारतें (सेवा तीर्थ-1, 2 और 3) शामिल हैं।
सेवा तीर्थ भवन परिसर की संरचना:
- सेवा तीर्थ-1 (प्रधानमंत्री कार्यालय): यह पीएमओ का नया और मुख्य कार्यालय होगा, जो दशकों से चले आ रहे साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय का स्थान लेगा।
- सेवा तीर्थ-2 (कैबिनेट सचिवालय): यहां मंत्रिमंडल सचिवालय का कामकाज होगा। यह सितंबर 2025 में ही यहां स्थानांतरित हो चुका है।
- सेवा तीर्थ-3 (राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय – NSCS): इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और उनकी टीम का कार्यालय होगा।
- इंडिया हाउस (India House): परिसर के भीतर एक अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस सेंटर बनाया गया है, जिसका उपयोग विदेशी शासनाध्यक्षों और गणमान्य व्यक्तियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों और उच्च स्तरीय वार्ताओं के लिए किया जाएगा।
सेवा तीर्थ भवन परिसर की विशेषताएं:
- एकीकृत संचार प्रणाली: सभी विंग्स एक भूमिगत टनल (Underground Tunnel) के माध्यम से एक-दूसरे से और भविष्य के अन्य सचिवालयों से जुड़े हैं, जिससे सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहे।
- डिजिटल गवर्नेंस: यह परिसर पूर्णतः ‘पेपरलेस’ कामकाज के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें सुरक्षित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है।
- पर्यावरण अनुकूल (Sustainability): इस भवन को GRIHA 5-स्टार रेटिंग के मानकों पर बनाया गया है। इसमें सौर ऊर्जा, जल संचयन और उन्नत कचरा प्रबंधन प्रणाली है।
- भूकंपीय सुरक्षा: इसे दिल्ली के भूकंपीय क्षेत्र-IV (Seismic Zone-IV) के खतरों को झेलने के लिए अत्यधिक मजबूत बनाया गया है।
इसका महत्व:
- औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति: दशकों से PMO ब्रिटिश काल के ‘साउथ ब्लॉक’ से संचालित हो रहा था। ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरण भारत की प्रशासनिक वास्तुकला के ‘विसुपनिवेशीकरण’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- प्रशासनिक दक्षता: वर्तमान में ये कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर फैले हुए थे। एक ही परिसर में एकीकरण से अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
- सांस्कृतिक गौरव: भवन की वास्तुकला में भारतीय कला, शिल्प और शिलालेखों का उपयोग किया गया है, जो भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक आकांक्षाओं के मेल को दर्शाता है।
कर्तव्य भवन (Kartavya Bhavan):
‘सेवा तीर्थ’ के साथ ही प्रधानमंत्री ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का भी उद्घाटन करेंगे। ये इमारतें सामान्य केंद्रीय सचिवालय (Common Central Secretariat – CCS) का हिस्सा हैं।
- मंत्रालयों का एकीकरण: इन भवनों में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और विदेश मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय होंगे।
- क्षमता: प्रत्येक भवन को आधुनिक कार्यस्थल (Modern Workspace) के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं हैं।
- 4-स्टार GRIHA रेटिंग: ये भवन पर्यावरण के अनुकूल हैं, जिनमें सौर ऊर्जा प्रणाली, जल संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के उन्नत उपाय किए गए हैं।
- सुरक्षा ढांचा: स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, डिजिटल निगरानी और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र से लैस हैं।
- नागरिक केंद्रित: इसमें ‘पब्लिक इंटरफेस जोन’ बनाए गए हैं ताकि आम नागरिकों का सरकार के साथ संवाद अधिक सुगम और सम्मानजनक हो।

