Odisha Dolphin Census 2026
संदर्भ:
हाल ही में ओडिशा के वन और पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक डॉल्फिन जनगणना के परिणाम जारी किए गए हैं। इस जनगणना में राज्य के तटीय क्षेत्रों और जल निकायों में कुल 765 डॉल्फिन दर्ज की गई हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है।
डॉल्फिन जनगणना 2026 के मुख्य आंकड़े:
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- वृद्धि: वर्ष 2025-26 के लिए की गई इस गणना में पिछले वर्ष (710 डॉल्फिन) की तुलना में 7.75% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- प्रजाति-वार वितरण: ओडिशा के तट पर डॉल्फिन की कुल 6 प्रजातियां पाई गई हैं:
- हम्पबैक डॉल्फिन (Humpback Dolphins): 497 (सबसे अधिक आबादी)
- इरावदी डॉल्फिन (Irrawaddy Dolphins): 208
- बॉटलनोज़ डॉल्फिन (Bottlenose Dolphins): 55
- स्पिनर डॉल्फिन (Spinner Dolphins): 03
- फिनलेस पोरपोइज़ (Finless Porpoise): 02
- चिल्का झील: चिल्का में इरावदी डॉल्फिन की संख्या 159 दर्ज की गई है। यह संख्या पिछले वर्ष के समान ही है। यह एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून और एक रामसर साइट है। इरावदी डॉल्फिन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा एकल पर्यावास है।
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- विस्तार: जनगणना में यह भी पाया गया है कि इरावदी डॉल्फिन अब चिल्का और राजनगर के बाहर अन्य क्षेत्रों जैसे बालासोर (15), बरहमपुर (13), और पुरी (12) में भी देखी जा रही हैं, जो उनके नए क्षेत्रों में बसने (Colonisation) का संकेत है।
- गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य: केंद्रपाड़ा जिले में स्थित यह क्षेत्र हम्पबैक डॉल्फिन का सबसे बड़ा आवास बनकर उभरा है, जहाँ 474 डॉल्फिन देखी गईं।
- क्षेत्रीय वितरण: डॉल्फिन की मौजूदगी भितरकनिका, धामरा और चांदीपुर तटों पर भी दर्ज की गई है।
- वृद्धि के पीछे के कारक:
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- अवैध झींगा घेरों (Illegal Gheris) को हटाना: चिल्का में अवैध अतिक्रमण हटाने से डॉल्फिन के लिए निर्बाध आवाजाही और भोजन की उपलब्धता बढ़ी है।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय मछुआरों को ‘डॉल्फिन मित्रों’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे अवैध शिकार और जाल में फंसने (Bycatch) की घटनाएं कम हुई हैं।
- पर्यटन नियमन: पारिस्थितिक-पर्यटन (Eco-tourism) के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं।
जनगणना में पाई गई डॉल्फिन की प्रमुख प्रजातियां :
इरावदी डॉल्फिन (Irrawaddy Dolphin)
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- वैज्ञानिक नाम: Orcaella brevirostris
- पहचान: इनका सिर गोल होता है और चोंच (snout) नहीं होती। ये मीठे और खारे पानी (brackish water) दोनों में रह सकती हैं।
- प्रमुख आवास: भारत में मुख्य रूप से चिल्का झील (ओडिशा) में पाई जाती हैं।
- संरक्षण स्थिति (Conservation Status):
- IUCN: लुप्तप्राय (Endangered)
- WPA 1972: अनुसूची-I (Schedule-I)
- CITES: परिशिष्ट-I (Appendix-I)
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हम्पबैक डॉल्फिन (Humpback Dolphin)
- वैज्ञानिक नाम: Sousa chinensis (Indo-Pacific Humpback)
- पहचान: इनकी पीठ पर एक विशिष्ट कूबड़ (hump) और एक लंबी चोंच होती है। ये आमतौर पर उथले तटीय पानी में पाई जाती हैं।
- प्रमुख आवास: ओडिशा का गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य इनका सबसे बड़ा गढ़ है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN: असुरक्षित (Vulnerable) / संकटग्रस्त (Endangered – क्षेत्र के अनुसार)
- विशेष तथ्य: ये तटीय विकास और समुद्री प्रदूषण के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं।
बॉटलनोज़ डॉल्फिन (Bottlenose Dolphin)
- वैज्ञानिक नाम: Tursiops aduncus (Indo-Pacific)
- पहचान: इनकी चोंच एक बोतल के आकार की होती है, जिसके कारण इन्हें यह नाम मिला है। ये बहुत बुद्धिमान और मिलनसार होती हैं।
- संरक्षण स्थिति: IUCN: डेटा की कमी (Data Deficient) या कम चिंताजनक (Least Concern – वैश्विक स्तर पर)।
फिनलेस पोरपोइज़ (Finless Porpoise)
- वैज्ञानिक नाम: Neophocaena phocaenoides
- पहचान: जैसा कि नाम से पता चलता है, इनके पास पृष्ठीय पंख (Dorsal Fin) नहीं होता है। इनका शरीर छोटा और चिकना होता है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN: असुरक्षित (Vulnerable)
- विशेष: ये बहुत ही शर्मीले जीव हैं और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इनकी संख्या तेजी से घट रही है।
स्पिनर डॉल्फिन (Spinner Dolphin)
- वैज्ञानिक नाम: Stenella longirostris
- पहचान: ये पानी से बाहर निकलकर हवा में चक्कर (Spin) लगाने की अपनी कलाबाजी के लिए प्रसिद्ध हैं
- आवास: ये गहरे समुद्र में रहना पसंद करती हैं, इसलिए तटीय जनगणना में इनकी संख्या अक्सर कम (ओडिशा में मात्र 3) होती है।

