Gripen E fighter aircraft
संदर्भ:
स्वीडन की प्रमुख रक्षा कंपनी साब (SAAB) ने हाल ही में भारतीय वायु सेना (IAF) को अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ग्रिपेन-ई (Gripen E) की आपूर्ति के लिए एक नया और व्यापक प्रस्ताव पेश किया।
ग्रिपेन-ई (Gripen E) के बारे मे:
- पीढी: ग्रिपेन-ई एक 4.5 पीढ़ी (4.5 Generation) का मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जिसे विशेष रूप से अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और ‘कंटेस्टेड’ (Contested) हवाई क्षेत्रों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है।
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- निर्माता: ग्रिपेन-ई का निर्माण स्वीडन की प्रसिद्ध रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी साब (SAAB AB) द्वारा किया जाता है।
- इतिहास: ग्रिपेन श्रृंखला (JAS 39) का विकास 1980 के दशक में शुरू हुआ था, लेकिन ग्रिपेन-ई इसका सबसे आधुनिक और पूरी तरह से नया संस्करण है।
- इंजन: यह शक्तिशाली General Electric F414G इंजन द्वारा संचालित है (यही इंजन भारत के तेजस मार्क-2 और प्रस्तावित AMCA में भी उपयोग होगा)।
- लागत: एक ग्रिपेन-ई विमान की अनुमानित लागत लगभग $85 मिलियन से $100 मिलियन (₹700 करोड़ – ₹830 करोड़) के बीच है।
- गति: इसकी अधिकतम गति मैक 2.0 (Mach 2.0) से अधिक है।
- सुपरक्रूज (Supercruise): यह बिना आफ्टरबर्नर का उपयोग किए ध्वनि की गति से तेज उड़ने में सक्षम है, जिससे ईंधन की बचत और ‘स्टील्थ’ (Stealth) क्षमता बढ़ती है।
- AESA रडार: इसमें Raven ES-05 रडार लगा है, जो ‘स्वाशप्लेट’ (Swashplate) पर माउंटेड है। यह पायलट को 360-डिग्री के बजाय एक विशाल ‘फील्ड ऑफ रिगार्ड’ (Field of Regard) प्रदान करता है।
- IRST (Infrared Search and Track): ‘Skyward-G’ सेंसर के माध्यम से यह दुश्मन के विमानों को बिना अपना रडार चालू किए (Passive मोड में) ट्रैक कर सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW): इसमें Arexis सुइट लगा है, जो दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए ‘डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी’ (DRFM) का उपयोग करता है।
- उपयोगकर्ता: ग्रिपेन-ई/एफ (E-सिंगल सीट, F-डबल सीट) को वर्तमान में निम्नलिखित देशों द्वारा अपनाया गया है: ब्राजील, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका।
- नाटो में भूमिका: फरवरी 2026 में, स्वीडन के नाटो सदस्य बनने के बाद, ग्रिपेन-ई ने आर्कटिक क्षेत्र में रूसी घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी पहली सक्रिय ‘कॉम्बैट एयर पेट्रोल’ (CAP) सफलतापूर्वक पूरी की।

