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62वां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (62nd Munich Security Conference) | UPSC Preparation

62nd Munich Security Conference

62nd Munich Security Conference

संदर्भ:

हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में 13 से 15 फरवरी 2026 तक 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC 2026) का आयोजन किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का शीर्षक “अंडर डिस्ट्रक्शन” रखा गया, जो वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के टूटने और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के गहरे संकट को दर्शाता है।

62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मुख्य बिंदु:

  • रेकिंग-बॉल पॉलिटिक्स: सम्मेलन में जारी म्यूनिख सुरक्षा रिपोर्ट 2026 में चेतावनी दी गई कि दुनिया “रेकिंग-बॉल पॉलिटिक्स” के युग में प्रवेश कर गई है। रिपोर्ट में विशेष रूप से अमेरिकी नेतृत्व में बदलाव और चीन की “आर्थिक हथियारों” की नीति पर चर्चा की गई।
  • यूरोप की सुरक्षा स्वायत्तता: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि यूरोप अब सुरक्षा के लिए पूरी तरह से वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रह सकता। सम्मेलन में यूरोपीय देशों के बीच एक ‘परमाणु रक्षा तंत्र’ और सुरक्षा गारंटी पर फोकस किया गया।
  • तकनीकी और परमाणु जोखिम: सम्मेलन में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इसके द्वारा संचालित हाइब्रिड वारफेयर पर गहन चर्चा हुई। रूस और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच परमाणु निवारण को फिर से वैश्विक एजेंडे में लाया गया।
  • भारत की सक्रिय भूमिका: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान “डेल्ही डिसाइड्स” नामक राउंडटेबल में भारत की विदेश नीति को “निंबल और डायनेमिक” बताया।
    • UN सुधार: भारत ने UN80 एजेंडे के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधारों की मांग दोहराई।
    • समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर में समुद्री डकैती रोकने और ‘सबमरीन केबल’ की सुरक्षा में भारत की भूमिका पर जोर दिया गया।
    • कनेक्टिविटी: IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे) को वैश्विक व्यापार के लिए एक अनिवार्य विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference – MSC) क्या हैं?

  • परिचय: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन  को विश्व का सबसे महत्वपूर्ण स्वतंत्र मंच माना जाता है, जहाँ वैश्विक सुरक्षा नीतियों पर चर्चा की जाती है। इसे “सुरक्षा नीति का दावोस” कहा जाता है।
  • स्थापना: इसकी शुरुआत 1963 में ‘एवाल्ड-हाइनरिच वॉन क्लेइस्ट’ द्वारा की गई थी।
  • उद्देश्य: प्रारंभ में इसका उद्देश्य शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी सहयोगियों (NATO देशों) के बीच समन्वय बढ़ाना था।
  • मुख्यालय: इसका आयोजन हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर के ‘होटल बायरिशर हॉफ’ में किया जाता है।
  • स्वतंत्र मंच: यह किसी सरकार या अंतरराष्ट्रीय संगठन के अधीन नहीं है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था द्वारा संचालित होता है।
  • अनौपचारिक संवाद: इसकी सबसे बड़ी विशेषता ‘म्यूनिख नियम’ (Munich Rule) है: “एक-दूसरे के साथ जुड़ें, एक-दूसरे को उपदेश न दें।” 
  • ट्रैक-2 कूटनीति: यहाँ न केवल राष्ट्राध्यक्ष, बल्कि सैन्य अधिकारी, खुफिया प्रमुख, उद्योगपति और वैज्ञानिक भी भाग लेते हैं।
  • प्रमुख प्रकाशन: ​हर साल सम्मेलन से पहले म्यूनिख सुरक्षा रिपोर्ट जारी की जाती है। ​यह रिपोर्ट वैश्विक जोखिमों, रक्षा बजट और उभरते सुरक्षा खतरों का डेटा-आधारित विश्लेषण प्रदान करती है।

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