International Shivratri Festival
संदर्भ:
हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष का यह महोत्सव मंडी शहर की स्थापना के 500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के बारे में:
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- स्थान: अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर (छोटी काशी) में मनाया जाने वाला एक सप्ताह लंबा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक उत्सव है।
- शुरुआत: इसकी औपचारिक शुरुआत 1527 ईस्वी में मंडी के संस्थापक राजा अजबर सेन ने की थी।
- विशेषता: शैव, वैष्णव और लोक परंपराओं का अद्भुत मिश्रण।
- पर्व का समय: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) के अगले दिन से सात दिन तक।
- स्थापना का कारण: राजा ने बाबा भूतनाथ मंदिर का निर्माण करवाया और शिवरात्रि के दिन एक बड़े उत्सव की नींव रखी।
- माधोराय की भूमिका (17वीं शताब्दी): राजा सूरज सेन ने अपना राज्य भगवान विष्णु के स्वरूप ‘माधोराय’ को समर्पित कर दिया। तब से यह मेला शैव (शिव) और वैष्णव (विष्णु) मतों के मिलन का प्रतीक बन गया।
- अमूर्त विरासत: इसे ‘अंतरराष्ट्रीय’ दर्जा प्राप्त है। यहाँ लोक संगीत, नाटी (हिमाचली नृत्य) और पारंपरिक वाद्ययंत्रों (जैसे करनाल, रणसिंघा और ढोल) की गूंज सुनाई देती है।
- प्रमुख परंपराए:
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- जलेब: महोत्सव की शुरुआत ‘जलेब’ (शाही जुलूस) से होती है। भगवान माधोराय की चांदी की मूर्ति को एक भव्य पालकी में बिठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता
- बड़ा देव कमरूनाग: मान्यता है कि सबसे पहले वर्षा के देवता ‘कमरूनाग’ मंडी पहुँचते हैं। उनके दर्शन के बिना शिवरात्रि अधूरी मानी जाती है।
- पड्डल मैदान: सभी देवता ऐतिहासिक पड्डल मैदान में सात दिनों तक विराजमान रहते हैं, जहाँ भक्त उनके दर्शन करते हैं।
- जागण: उत्सव की अंतिम रात को ‘जागण’ कहा जाता है, जिसमें पूरी रात भजन और देवताओं की स्तुति होती है।
- भविष्यवाणी: देवताओं के ‘गुर’ (Oracle/Medium) भविष्यवाणियाँ करते हैं कि आने वाला साल खेती और आपदाओं की दृष्टि से कैसा रहेगा।
- चदरू: अंतिम दिन देवता अपने-अपने क्षेत्रों की ओर विदा होते हैं, जिसे एक भावुक विदाई समारोह के रूप में मनाया जाता है।

