Krishna first indigenously built cadet training ship of Indian Navy
संदर्भ:
हाल ही में चेन्नई के कट्टुपल्ली स्थित लार्सन एंड टुब्रो (L&T) शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी कैडेट प्रशिक्षण जहाज (CTS) ‘कृष्णा’ (यार्ड 18003) का जलावतरण किया गया।
स्वदेशी कैडेट प्रशिक्षण जहाज ‘कृष्णा’ के बारे में:
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- परिचय: ‘कृष्णा’ एक आधुनिक प्रशिक्षण मंच है, जिसे समुद्र में लंबे समय तक रहने और जटिल अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है
- नामकरण: इस जहाज का नाम भारत की तीसरी सबसे लंबी पवित्र नदी ‘कृष्णा’ के नाम पर रखा गया है।
- प्रतीक चिन्ह: इसमें कृष्णा नदी के तट से खिलता हुआ एक कमल दिखाया गया है, जो ‘ज्ञान के उत्थान’ का प्रतीक है।
- श्रेणी: यह ‘Buy (Indian-IDDM)’ श्रेणी के तहत आता है, जिसका अर्थ है यह पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित है।
- लागत: इस परियोजना का अनुबंध मार्च 2023 में 3,108.09 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था।
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- स्वदेशी योगदान: जहाज के निर्माण में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की आपूर्ति के लिए लगभग 847 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है।
- विशेषताएं:
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- आयाम: इसकी कुल लंबाई लगभग 122 मीटर और चौड़ाई 18 मीटर है।
- विस्थापन: जहाज का कुल विस्थापन लगभग 4,700 टन है।
- गति और क्षमता: यह जहाज 20 नॉट से अधिक की गति प्राप्त करने में सक्षम है और इसकी सहनशक्ति समुद्र में 60 दिनों तक की है।
- आवास क्षमता: इसमें 20 अधिकारियों, 150 नाविकों और 200 कैडेटों के लिए एक साथ रहने की व्यवस्था है।
- सुविधाएं: जहाज में 70 कैडेटों की क्षमता वाली 3 अत्याधुनिक कक्षाएं, एक समर्पित प्रशिक्षण ब्रिज और चार्ट हाउस शामिल हैं।
- समावेशी प्रशिक्षण: यह पुरुष और महिला कैडेटों दोनों को समान रूप से प्रशिक्षण देने के लिए बनाया गया है।
- सहायक भूमिकाएं: प्रशिक्षण के अतिरिक्त, इसे मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), खोज और बचाव (SAR), तथा एक अस्पताल जहाज के रूप में भी तैनात किया जा सकता है।
- विमानन और हथियार: इसमें एक स्वचालित ‘हेली लैंडिंग और ट्रैवर्सिंग सिस्टम’ है। रक्षा के लिए यह 76mm नेवल गन और AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) से लैस है।
इसका महत्व:
- आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन: इसमें अधिकांश उपकरण स्वदेशी एमएसएमई (MSMEs) से प्राप्त किए गए हैं, जो घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देते हैं।
- प्रशिक्षण में सुधार: यह जहाज महिला कैडेटों सहित भारतीय नौसेना के भविष्य के अधिकारियों को समुद्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा।
- सुरक्षा और कूटनीति: यह ‘मैत्रीपूर्ण विदेशी देशों’ के कैडेटों को भी प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और समुद्री कूटनीति मजबूत होगी।

