Advanced Medium Combat Aircraft
संदर्भ:
हाल ही में DRDO ने भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन प्रोजेक्ट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोटोटाइप विकास के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL), लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, BEML और डेटा पैटर्न्स समूह को शॉर्टलिस्ट किया है।
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के बारे में:
- परिचय: एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का पहला स्वदेशी 5वीं पीढ़ी (5th Generation) का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
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- नोडल एजेंसी: इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया गया है।
- विनिर्माण (Manufacturing): इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी क्षेत्र के सहयोग से एक ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ (SPV) मॉडल के तहत किया जाएगा।
- श्रेणी: यह एक बहुउद्देशीय (Multi-role), ट्विन-इंजन (दो इंजन वाला) ऑल-वेदर फाइटर एयरक्राफ्ट है।
- प्रोजेक्ट की मंजूरी: मार्च 2024 में ‘सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति’ (CCS) ने लगभग ₹15,000 करोड़ के बजट के साथ इसके प्रोटोटाइप विकास को मंजूरी दी।
- विशेषताएं:
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- लो ऑब्जर्वेबल (LO) डिजाइन: विमान की बनावट ऐसी है कि यह रडार तरंगों को बिखेर देता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते।
- इंटरनल वेपन्स बे (Internal Weapons Bay): रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को कम करने के लिए मिसाइलों और बमों को विमान के अंदर छिपाकर रखा जाता है।
- रेडार एब्जॉर्बेंट मटेरियल (RAM): विमान की सतह पर विशेष रसायनों की कोटिंग की जाती है जो रडार तरंगों को सोख लेते हैं।
- AESA रडार: इसमें स्वदेशी उत्तम (Uttam) एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार का उन्नत संस्करण होगा, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है।
- सेंसर फ्यूजन: यह विभिन्न सेंसरों (रडार, इन्फ्रारेड, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली) से मिलने वाले डेटा को एकीकृत कर पायलट को युद्धक्षेत्र की एक स्पष्ट तस्वीर प्रदान करता है।
- स्मार्ट कॉकपिट: इसमें टचस्क्रीन इंटरफेस और पायलट के लिए हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले (HMD) होगा।
- सुपरक्रूज (Supercruise): बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति से उड़ने की क्षमता, जो इसे रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक जाने में मदद करती है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): इसमें एक AI-आधारित ‘इलेक्ट्रॉनिक पायलट’ होगा जो पायलट के कार्यभार को कम करने और निर्णय लेने में सहायता करेगा।
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- द्विचरणीय:
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- AMCA Mk-1: यह शुरुआती संस्करण अमेरिकी GE-F414 इंजन (98 kN थ्रस्ट) द्वारा संचालित होगा। इसमें 80% तकनीक हस्तांतरण का समझौता शामिल है।
- AMCA Mk-2: इसमें अधिक शक्तिशाली 6th जेनरेशन 110-120 kN का स्वदेशी/सह-विकसित इंजन होगा। इसके लिए भारत और फ्रांस की कंपनी Safran के बीच संयुक्त विकास का समझौता अंतिम चरण में है।
इसका महत्व:
- चीन का मुकाबला: चीन के J-20 और पाकिस्तान के संभावित चीनी सहयोग से प्राप्त स्टेल्थ विमानों के खिलाफ यह भारत का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होगा।
- सुपरक्रूज क्षमता: यह बिना आफ्टरबर्नर जलाए सुपरसोनिक गति पर उड़ने में सक्षम होगा, जिससे ईंधन की बचत और लंबी दूरी तय होगी।
- आत्मनिर्भरता: रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर निकलने के बाद, AMCA भारत की एकमात्र 5वीं पीढ़ी की उम्मीद है। यह सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे विदेशी विमानों पर भारत की निर्भरता को कम करेगा।
- वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता: वर्तमान में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या स्वीकृत 42 से घटकर लगभग 30 रह गई है। AMCA के 7 नियोजित स्क्वाड्रन (लगभग 126 विमान) इस कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण होंगे।
- रणनीतिक महत्व: यह भारत को अमेरिका (F-35, F-22), रूस (Su-57) और चीन (J-20) जैसे देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल करेगा जिनके पास स्वदेशी स्टेल्थ तकनीक है।

