Female cheetah Gamini gives birth to three cubs
संदर्भ:
हाल ही में मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह भारत के ‘प्रॉजेक्ट चीता’ की एक बड़ी उपलब्धि है।
- गामिनी ने अब तक कुल दो बार शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मार्च 2024 में उसने 5 शावकों को जन्म दिया था।
- यह भारत की धरती पर नौवीं बार किसी चीता द्वारा शावकों को जन्म देने की घटना है।
भारत में चीतों की वर्तमान जनसंख्या:
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- कुल चीतों की संख्या: 38
- भारत में जन्मे (जीवित) शावक: 27
- वयस्क/संस्थापक चीते (अफ्रीका से लाए गए): 11
प्रोजेक्ट चीता क्या है?
- परिचय: भारत में प्रोजेक्ट चीता विश्व का सबसे बड़ा अंतरमहाद्वीपीय वन्यजीव स्थानांतरण कार्यक्रम है, जिसे भारत सरकार द्वारा विलुप्त हो चुकी प्रजाति को पुन: स्थापित करने के लिए 17 सितंबर 2022 को लॉन्च किया गया था।
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- विशेषता: यह ‘री-इंट्रोडक्शन’ पर आधारित है, जहाँ विलुप्त हो चुकी प्रजाति को विदेशी भूमि से वापस लाया गया है।
- संरक्षण: इनका संरक्षण मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में किया जाता है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- प्रथम चरण (2022-23): नामीबिया (8) और दक्षिण अफ्रीका (12) से कुल 20 चीते लाए गए।
- द्वितीय चरण (2026): बोत्सवाना से 8 नए चीते (2 मादा और 6 शावक) फरवरी 2026 के अंत तक भारत आने की संभावना है।
- पारिस्थितिक महत्व: चीता एक ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ है। इसे बचाने का अर्थ है भारत के घास के मैदानों (Grasslands) और सवाना पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना।
- मेटा-जनसंख्या: वर्ष 2032 तक लगभग 17,000 वर्ग किमी के क्षेत्र (कूनो-गांधी सागर-नौरादेही परिदृश्य) में 60-70 चीतों की एक आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना इसका लक्ष्य है।
- पर्यावास विस्तार: गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को दूसरे सफल पर्यावास के रूप में विकसित करना, जहाँ स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- प्रजनन केंद्र: गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में एक अत्याधुनिक प्रजनन केंद्र बनाया जा रहा है।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park):
- अवस्थिति: यह मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में स्थित है। यह विंध्य पर्वतमाला का हिस्सा है।
- विस्तार: इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 748 वर्ग किमी है, जबकि इसके आसपास का बफर क्षेत्र मिलाकर यह 1200 वर्ग किमी से अधिक का सुरक्षित गलियारा प्रदान करता है।
- पारिस्थितिकी तंत्र: कुनो में शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) और घास के मैदानों का मिश्रण है, जो चीतों की शिकार करने की पद्धति (तेज दौड़ना) के लिए उपयुक्त है।
- जीव-जंतु: यहाँ मुख्य रूप से चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर और चौसिंगा पाए जाते हैं, जो चीतों के लिए पर्याप्त शिकार (Prey Base) सुनिश्चित करते हैं।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मूल रूप से इसे एशियाई शेरों के पुनर्वास के लिए तैयार किया गया था, लेकिन 2022 से यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ का केंद्र बन गया है।

