Strait of Hormuz
संदर्भ:
हाल ही में ईरान द्वारा सैन्य अभ्यास ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द होर्मुज’ के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में:
- अवस्थिति: यह एक संकरा जलमार्ग है जो पश्चिम में फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को पूर्व में ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
- सीमावर्ती देश: इसके उत्तर में ईरान स्थित है और दक्षिण में ओमान (मुसंडम प्रायद्वीप) तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हैं।
- विस्तार: इसकी लंबाई लगभग 167 किमी है। अपने सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई केवल 33 किमी (21 मील) है।
- शिपिंग लेन: अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, जहाजों के आने-जाने के लिए केवल 2 मील चौड़ी लेन उपलब्ध है, जिसके बीच में 2 मील का बफर जोन होता है। यह लेन ओमान और ईरान दोनों के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरती है।
महत्व:
- तेल का प्रवाह: वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% से 25% (प्रतिदिन लगभग 20-21 मिलियन बैरल) इसी मार्ग से गुजरता है।
- LNG व्यापार: दुनिया के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का एक-तिहाई (33%) हिस्सा, विशेषकर कतर से, इसी रास्ते से जाता है।
- विकल्प का अभाव: फारस की खाड़ी के देशों (सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई) के लिए यह खुले समुद्र तक पहुँचने का एकमात्र समुद्री मार्ग है।
भारत के संदर्भ में:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 45-50% और अपनी LNG जरूरतों का 54% (प्रमुख रूप से कतर और इराक से) इसी मार्ग के माध्यम से प्राप्त करता है।
- आर्थिक मुद्रास्फीति: यदि यह जलमार्ग लंबे समय के लिए बंद होता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में $20-$50 प्रति बैरल तक का उछाल आ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई अनियंत्रित हो सकती है।
- सामरिक उत्तर (Operation Sankalp): भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अक्सर ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत अपने युद्धपोत तैनात करती है ताकि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

