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असम में चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों के लिए 3% विशेष कोटा को मंजूरी (3% special quota approved for tea tribes and tribal communities in Assam) | Apni Pathshala

3% special quota approved for tea tribes and tribal communities in Assam

3% special quota approved for tea tribes and tribal communities in Assam

संदर्भ:

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में चाय जनजाति (Tea Tribes) और आदिवासी समुदायों के लिए 3% विशेष कोटा को मंजूरी दी है।

3% विशेष कोटे से संबंधित बिंदु:

  • आरक्षण का स्वरूप: यह 3% आरक्षण पिछड़ा वर्ग (OBC/MOBC) कोटे के भीतर एक उप-श्रेणी (Sub-category) के रूप में होगा।
  • पात्र समुदाय: इसमें मुख्य रूप से चाय बागान श्रमिक, उनके वंशज और ‘आदिवासी’ पहचान के तहत आने वाले वे समुदाय शामिल हैं जो अंग्रेजों के समय झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से असम लाए गए थे।
  • विस्तार: यह कोटा ग्रेड-III और ग्रेड-IV की सरकारी नौकरियों के साथ-साथ राज्य संचालित मेडिकल, इंजीनियरिंग और सामान्य कॉलेजों में प्रवेश के लिए लागू होगा।
  • लागू होने की तिथि: तत्काल विज्ञापित पदों के लिए यह नियम अभी से प्रभावी होगा, जबकि उच्च स्तरीय भर्ती प्रक्रियाओं (जैसे APSC) के लिए यह अगले वर्ष से लागू होगा।
  • कार्यान्वयन तंत्र: इसे सुनिश्चित करने के लिए 100-पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर का पालन किया जाएगा। यदि किसी वर्ष योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते, तो पद अन्य ओबीसी उम्मीदवारों से भरे जा सकते हैं।

ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ:

  • ये समुदाय 19वीं सदी में औपनिवेशिक काल के दौरान ‘गिरमिटिया मजदूर’ के रूप में असम आए थे। समय के साथ उन्होंने असमिया संस्कृति को अपनाया, लेकिन अपनी मूल जनजातीय परंपराओं को भी जीवित रखा। 
  • इन्हें ‘आदिवासी’ (Adivasi) कहा जाता है, जिसमें मुंडा, उरांव, संथाल, हो, और खड़िया जैसे समुदाय शामिल हैं।
  • असम में इन समुदायों को वर्तमान में ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा प्राप्त नहीं है, जबकि उनके मूल राज्यों (जैसे झारखंड) में वे ST की श्रेणी में आते हैं। 
  • असम में वे OBC श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। नया 3% कोटा इसी विसंगति के बीच उन्हें “आरक्षण के भीतर आरक्षण” प्रदान कर सुरक्षा प्रदान करता है।

असम सरकार के अन्य कदम:

  • भूमि अधिकार: चाय बागानों में रहने वाले लगभग 5 लाख परिवारों को ‘भूमि पट्टा’ (Land Patta) देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे उन्हें अपनी जमीन पर मालिकाना हक मिलेगा।
  • शिक्षा: राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चाय जनजातियों के लिए MBBS सीटों को 30 से बढ़ाकर और अधिक करने का प्रावधान किया गया है।
  • MMUA योजना: ‘मिशन फॉर माइनॉरिटी एंड अंडरप्रिविलेज्ड एरियाज’ (MMUA) के तहत 1 लाख से अधिक अतिरिक्त महिला लाभार्थियों को उद्यमिता के लिए ₹10,000 की बीज पूंजी दी जाएगी। 

इसका महत्व:

  • सामाजिक न्याय का सुदृढ़ीकरण: चाय बागान श्रमिक असम की कुल जनसंख्या का लगभग 17% से 20% हिस्सा हैं। यह कोटा उनके लिए ‘इक्वल प्लेइंग फील्ड’ तैयार करेगा।
  • ST दर्जे का वैकल्पिक समाधान: लंबे समय से ये समुदाय ST दर्जे की मांग कर रहे हैं। पूर्ण ST दर्जा देने में कानूनी और प्रशासनिक दिक्कतें हैं, अतः यह 3% कोटा एक ‘मध्यम मार्ग’ के रूप में देखा जा रहा है।
  • कौशल विकास: नौकरियों के साथ-साथ उच्च शिक्षा में आरक्षण से इन समुदायों के युवाओं में व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ेगा।

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