Kerala Nativity Card Bill approved
संदर्भ:
हाल ही में केरल कैबिनेट ने ‘केरल नेटिविटी कार्ड बिल’ (Kerala Nativity Card Bill) को मंजूरी दी है। केरल भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपने प्रवासियों को एक स्थायी ‘डिजिटल पहचान’ देने के लिए विधायी ढांचा तैयार किया है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान:
- मूल निवासी (Native) की परिभाषा: बिल के अनुसार, ‘नेटिव’ वह व्यक्ति है जो केरल में पैदा हुआ हो और जिसने किसी विदेशी देश की नागरिकता न ली हो। वे लोग भी पात्र हैं जिनके माता-पिता या पूर्वज केरल में पैदा हुए थे, बशर्ते उन्होंने भी विदेशी नागरिकता न ली हो।
- रोजगार के कारण बाहर जन्मे लोग: यदि किसी व्यक्ति के पूर्वज रोजगार या आजीविका के लिए केरल से बाहर गए थे और वहां उनका जन्म हुआ, तो भी वे इस कार्ड के लिए पात्र होंगे।
- अयोग्यता: विदेशी नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को यह कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। यदि कार्ड प्राप्त करने के बाद कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता लेता है, तो कार्ड स्वतः अमान्य हो जाएगा।
- जारीकर्ता प्राधिकरण: कार्ड जारी करने के लिए तहसीलदार (Tahsildar) सक्षम प्राधिकारी होंगे। संबंधित ग्राम कार्यालय में जारी किए गए कार्डों का एक रजिस्टर बनाए रखा जाएगा।
- अपील तंत्र: यदि किसी का आवेदन खारिज होता है, तो बिल में अपील की व्यवस्था है। जिला कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी के आदेशों की समीक्षा या रद्द करने का अधिकार रखते हैं।
- नोडल एजेंसी: इसके तकनीकी कार्यान्वयन में NORKA Roots की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो पहले से ही प्रवासियों के लिए पहचान पत्र जारी करती है।
महत्व:
- सांस्कृतिक जुड़ाव: दूसरी और तीसरी पीढ़ी के मलयाली जो विदेशों में पले-बढ़े हैं, उनके लिए यह कार्ड अपनी जड़ों से जुड़ने का एक औपचारिक माध्यम बनेगा।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: ‘नेटिविटी कार्ड’ धारकों को राज्य सरकार द्वारा प्रवासियों के लिए चलाई जा रही विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं और निवेश अवसरों में प्राथमिकता मिल सकेगी।
- डेटा प्रबंधन: यह पहल सरकार को राज्य के प्रवासियों का एक सटीक डेटाबेस तैयार करने में मदद करेगी, जिससे नीति निर्माण में आसानी होगी।
- सॉफ्ट पावर: केरल की अर्थव्यवस्था में प्रवासियों का योगदान लगभग 30% (State GDP) है। ऐसे में यह कार्ड प्रवासियों को राज्य में निवेश करने, पैतृक संपत्ति को सुरक्षित करने का एक ‘कानूनी सेतु’ प्रदान करता है।

