Merchandise trade index base year 2022-23
संदर्भ:
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) ने भारत के वस्तु व्यापार सूचकांक (Merchandise Trade Indices) के आधार वर्ष (Base Year) को FY 2012-13 से बदलकर FY 2022-23 कर दिया।
संशोधन के प्रमुख पहलू:
- संशोधन का आधार (Nachiketa Chattopadhyay Committee): यह निर्णय भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (ISI), कोलकाता के प्रो. नचिकेता चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है। समिति ने डेटा कवरेज, वेटिंग स्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार का सुझाव दिया था।
- प्रमुख विशेषताएं:
- नया आधार: अब गणना के लिए 2022-23 = 100 माना जाएगा।
- वस्तु बास्केट का आधुनिकीकरण: व्यापार बास्केट की समीक्षा की गई है ताकि उभरती हुई वस्तुओं (जैसे नई तकनीक आधारित उत्पाद) को शामिल किया जा सके और कम मांग वाली वस्तुओं को हटाया जा सके।
- भार संरचना (Weighting Structure): वस्तुओं के भार को FY 2022-23 के वास्तविक व्यापार मूल्यों के आधार पर अपडेट किया गया है।
- संशोधन की आवश्यकता (Rationale):
- संरचनात्मक बदलाव: पिछले एक दशक में भारत के निर्यात-आयात की संरचना में बड़ा बदलाव आया है। पुराना आधार वर्ष (2012-13) वर्तमान व्यापार वास्तविकताओं को सटीक रूप से नहीं दिखा पा रहा था।
- मैक्रोइकोनॉमिक सिंक्रोनाइजेशन: इस संशोधन को राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts Statistics) के आधार वर्ष (2022-23) के साथ संरेखित (Synchronized) किया गया है ताकि आर्थिक आंकड़ों में निरंतरता बनी रहे।
- कोविड-19 प्रभाव: 2019-20 और 2021-22 के वर्षों को महामारी के कारण आधार वर्ष के लिए अनुपयुक्त माना गया, इसलिए 2022-23 को एक ‘सामान्य वर्ष’ के रूप में चुना गया।
व्यापार सूचकांकों का महत्व:
- इकाई मूल्य सूचकांक (Unit Value Index – UVI): यह आधार वर्ष की तुलना में निर्यात और आयात की जाने वाली वस्तुओं की औसत कीमतों में होने वाले परिवर्तन को मापता है।
- मात्रा सूचकांक (Quantity Index – QI): यह व्यापार के भौतिक परिमाण (Physical Volume) में होने वाले बदलाव को दर्शाता है।
- व्यापार की शर्तें (Terms of Trade):
- शुद्ध व्यापार की शर्तें (Net Terms of Trade): निर्यात कीमतों और आयात कीमतों का अनुपात।
- सकल व्यापार की शर्तें (Gross Terms of Trade): आयात की मात्रा और निर्यात की मात्रा का अनुपात।

