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नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 (National Monetization Pipeline 2.0) | Apni pathshala

National Monetization Pipeline 2.0

National Monetization Pipeline 2.0

संदर्भ:

24 फरवरी 2026 को, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 (NMP 2.0) का शुभारंभ किया, जो 2025-26 से 2029-30 तक के लिए एसेट मोनेटाइजेशन (संपत्ति मुद्रीकरण) का रोडमैप है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 क्या हैं?

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 (National Monetisation Pipeline 2.0 – NMP 2.0) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी आर्थिक रणनीति है, जिसे हाल ही में केंद्रीय बजट 2025-26 के अनुरूप NITI Aayog द्वारा विकसित किया गया है। यह कार्यक्रम NMP 1.0 की सफलता पर आधारित है और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु अवसंरचना विकास के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने का एक प्रमुख माध्यम है। 

  • नोडल एजेंसी: नीति आयोग (NITI Aayog)।
  • निगरानी: कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सशक्त कोर समूह (CGAM)

NMP 2.0 के मुख्य लक्ष्य:

  • सार्वजनिक क्षेत्र: NMP 2.0 का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की परिचालन संपत्तियों (Operational Assets) के मूल्य को अनलॉक करना है। 
  • कुल मुद्रीकरण क्षमता: आगामी पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2026-2030) के लिए कुल ₹16.72 लाख करोड़ की मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है।
  • निजी निवेश: इसमें निजी क्षेत्र से लगभग ₹5.8 लाख करोड़ के निवेश की उम्मीद है।
  • एसेट रिसाइक्लिंग (Asset Recycling): यह मॉडल “पुरानी संपत्तियों से पूंजी मुक्त करने और उसे नए बुनियादी ढांचे में लगाने” पर केंद्रित है।
  • स्वामित्व: सरकार इन संपत्तियों का स्वामित्व (Ownership) बरकरार रखेगी; केवल संचालन और प्रबंधन के अधिकार एक निश्चित अवधि के लिए निजी क्षेत्र को दिए जाएंगे। 

प्रमुख क्षेत्र (Sectoral Coverage):

  • सड़क एवं राजमार्ग: सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग एक-चौथाई) राजमार्गों और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (MMLP) से आने का अनुमान है।
  • रेलवे: स्टेशनों का पुनर्विकास, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और रेल कॉलोनियों का मुद्रीकरण।
  • ऊर्जा: पावर ट्रांसमिशन लाइनें और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की संपत्तियां।
  • कोयला और खनिज: खदानों की नीलामी और रॉयल्टी के माध्यम से राजस्व।
  • अन्य क्षेत्र: दूरसंचार (BSNL भूमि और टावर), नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, शहरी बुनियादी ढांचा और पर्यटन। 

मुद्रीकरण के उपकरण (Instruments):

  • PPP मॉडल: सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत रियायत समझौते।
  • InvITs (Infrastructure Investment Trusts): पूंजी बाजार के माध्यम से छोटे और बड़े निवेशकों से धन जुटाना।
  • Toll-Operate-Transfer (TOT): सड़कों के लिए प्रमुख मॉडल।
  • लीज़ और रॉयल्टी: खदानों और भूमि पार्सल के लिए। 

महत्व:

  • राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: बिना किसी अतिरिक्त ऋण या कर वृद्धि के बुनियादी ढांचे के लिए बड़े पैमाने पर धन की उपलब्धता।
  • दक्षता में वृद्धि: निजी क्षेत्र के आने से परिचालन लागत में कमी और सेवा गुणवत्ता में सुधार।
  • GDP विकास: NITI Aayog के अनुसार, इस निवेश से अगले 5-10 वर्षों में भारत की जीडीपी में लगभग ₹40 लाख करोड़ की वृद्धि होने की संभावना है।
  • पूंजी का चक्रीकरण: एकत्रित धनराशि को National Infrastructure Pipeline (NIP) की नई ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा। 
  • प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
  • राज्यों की भागीदारी: मुद्रीकरण प्रक्रिया से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) और एक हिस्सा संबंधित राज्यों को जाएगा।

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