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इज़राइल की संसद नेसेट (Israel parliament the Knesset) | UPSC Preparation

Israel parliament the Knesset

Israel parliament the Knesset

संदर्भ:

25 फरवरी 2026 को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल की संसद, ‘नेसेट’ (Knesset) के विशेष पूर्ण सत्र (Plenary Session) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधान मंत्री बनने वाले हैं। 2017 की पहली यात्रा के बाद यह मोदी की दूसरी इज़राइल यात्रा है।

इज़राइल की संसद ‘नेसेट’:

  • एकसदनीय व्यवस्था (Unicameralism): भारत की द्विसदनीय (लोकसभा-राज्यसभा) प्रणाली के विपरीत, इज़राइल में केवल एक सदन है।
  • सदस्य संख्या: इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं।
  • चुनाव प्रणाली: यहाँ ‘पूर्ण आनुपातिक प्रतिनिधित्व’ (Proportional Representation) प्रणाली अपनाई जाती है। मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि राजनीतिक दल की सूची को वोट देते हैं।
  • चुनावी सीमा (Electoral Threshold): किसी भी दल को नेसेट में प्रवेश के लिए कुल मतों का कम से कम 3.25% प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • शक्तियाँ:
  • संप्रभुता: नेसेट इज़राइल की सर्वोच्च संस्था है। यहाँ ‘शक्ति के पृथक्करण’ के बजाय विधायिका की सर्वोच्चता पर जोर दिया जाता है।
  • सरकार का गठन: प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के लिए नेसेट का ‘विश्वास मत’ (Confidence Vote) जीतना अनिवार्य है।
  • संविधान की अनुपस्थिति: इज़राइल के पास कोई लिखित औपचारिक संविधान नहीं है। नेसेट ‘बुनियादी कानून’ (Basic Laws) पारित करती है, जो संवैधानिक दर्जा रखते हैं।
  • राष्ट्रपति का चुनाव: इज़राइल के राष्ट्रपति (जो एक औपचारिक प्रमुख होते हैं) का चुनाव नेसेट के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • गठबंधन: इज़राइल की आनुपातिक प्रणाली के कारण किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलना अत्यंत कठिन होता है। इसके परिणामस्वरूप:
  • स्थायी गठबंधन (Coalition Politics): इज़राइल हमेशा छोटे दलों के गठबंधन पर निर्भर रहता है, जिससे अक्सर राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है।
  • अविश्वास प्रस्ताव: नेसेट किसी भी समय ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के माध्यम से सरकार को गिरा सकती है, जिसके बाद नए चुनाव अनिवार्य हो जाते हैं।

भारत और इज़राइल की संसदीय प्रणालियों के बीच मुख्य अंतर:

आधार

भारत (संसद)

इज़राइल (नेसेट)

सदन की प्रकृति

द्विसदनीय (Bicameral): लोकसभा (निचला) और राज्यसभा (ऊपरी)।

एकसदनीय (Unicameral): केवल एक सदन ‘नेसेट’ होता है।

सदस्य संख्या

कुल 788 (लोकसभा: 543 + राज्यसभा: 245)।

कुल 120 सदस्य

निर्वाचन प्रणाली

FPTP (First Past the Post): व्यक्ति को वोट, जिसे अधिक वोट मिले वह विजेता।

आनुपातिक प्रतिनिधित्व: पार्टी सूची को वोट; पूरे देश को एक निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।

संविधान

लिखित और विस्तृत संविधान है जो सर्वोच्च है।

कोई औपचारिक लिखित संविधान नहीं; ‘बुनियादी कानूनों’ पर आधारित।

सरकार का कार्यकाल

सामान्यतः 5 वर्ष (स्थिरता अधिक)।

कार्यकाल 4 वर्ष, लेकिन गठबंधन के कारण अक्सर अस्थिरता रहती है।

राष्ट्रपति की भूमिका

निर्वाचक मंडल (संसद + विधानसभा) द्वारा निर्वाचित।

केवल नेसेट के सदस्यों द्वारा निर्वाचित।

दलबदल कानून

10वीं अनुसूची के तहत कठोर दलबदल विरोधी कानून प्रभावी है।

दलबदल की स्थिति में भारत जैसी कठोर अयोग्यता प्रणाली का अभाव।

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