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पुडुचेरी में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा आधारित डिजिटल खाद्य सब्सिडी पायलट प्रोजेक्ट (Central bank digital currency-based digital food subsidy pilot project in Puducherry) | UPSC Preparation

Central bank digital currency-based digital food subsidy pilot project in Puducherry

Central bank digital currency-based digital food subsidy pilot project in Puducherry

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) पर आधारित ‘डिजिटल खाद्य सब्सिडी पायलट’ (Digital Food Subsidy Pilot) का शुभारंभ किया है। यह पहल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत शुरू की गई है।

पुडुचेरी डिजिटल खाद्य सब्सिडी पायलट प्रोजेक्ट:

  • परिचय: पुडुचेरी ‘डिजिटल खाद्य सब्सिडी पायलट’ भारत सरकार की एक अभिनव पहल है, जिसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान सीधे उनके CBDC (ई-रुपया) वॉलेट में किया जाएगा।
  • उद्देश्य: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार करना और खाद्य सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  • कार्यप्रणाली: लाभार्थियों को सब्सिडी की राशि उनके CBDC वॉलेट में डिजिटल टोकन (e-Rupee) के रूप में दी जाएगी।
  • प्रोग्रामेबल मनी: ये टोकन ‘प्रोग्रामेबल’ हैं, जिसका अर्थ है कि इनका उपयोग केवल अधिकृत व्यापारियों और उचित मूल्य दुकानों (FPS) से निर्धारित खाद्यान्न खरीदने के लिए ही किया जा सकता है।
  • साझेदार: इस परियोजना को पुडुचेरी सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बैंकिंग भागीदार के रूप में केनरा बैंक के सहयोग से लागू किया जा रहा है। 

केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा – CBDC (ई-रुपया) क्या है?

  • परिचय: केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) देश की फिएट मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे सीधे केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा जारी और समर्थित किया जाता है।
  • कानूनी स्वरूप: यह भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 26 के तहत एक वैधानिक निविदा (Legal Tender) है।
  • प्रकार:
    • थोक (e₹-W): वित्तीय संस्थानों के बीच अंतर-बैंक लेनदेन के लिए (1 नवंबर 2022 से शुरू)।
    • रिटेल (e₹-R): आम जनता द्वारा रोजमर्रा के लेनदेन के लिए (1 दिसंबर 2022 से शुरू)।
  • तकनीक: यह डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) या ब्लॉकचेन पर आधारित होता है, जो लेनदेन को सुरक्षित और अपरिवर्तनीय बनाता है। 

CBDC के लाभ:

  • वित्तीय समावेशन: बिना बैंक खाते के भी डिजिटल वॉलेट के माध्यम से लेन-देन की सुविधा, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ेगी।
  • भ्रष्टाचार और लीकेज में कमी: सब्सिडी का सीधा और ‘उद्देश्य-बद्ध’ हस्तांतरण यह सुनिश्चित करता है कि पैसा केवल नियत कार्य (जैसे भोजन) के लिए ही खर्च हो।
  • लागत में कमी: भौतिक मुद्रा की छपाई, भंडारण और परिवहन की परिचालन लागत को काफी कम करता है।
  • ऑफ़लाइन क्षमता: बिना इंटरनेट के भी लेनदेन करने की सुविधा (NFC/ब्लूटूथ के माध्यम से) जो कनेक्टिविटी समस्याओं वाले क्षेत्रों के लिए वरदान है।
  • मौद्रिक संप्रभुता: निजी क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन्स के जोखिमों को कम करता है। 

चुनौतियां:

  • साइबर सुरक्षा: डिजिटल मुद्रा होने के कारण हैकिंग और फिशिंग जैसे खतरों के प्रति संवेदनशील है।
  • निजता की चिंता: भौतिक नकदी के विपरीत, प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड बैंक/सरकार के पास होता है, जिससे उपयोगकर्ता की गोपनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
  • डिजिटल डिवाइड: स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता की कमी वाले ग्रामीण समुदायों के लिए इसे अपनाना कठिन हो सकता है।
  • बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव: यदि लोग बैंक जमा के बजाय CBDC में पैसा रखना पसंद करते हैं, तो बैंकों की ऋण देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY):

  • परिचय: यह भारत सरकार की एक एकीकृत खाद्य सुरक्षा योजना है, जिसके माध्यम से गरीब नागरिकों को मुफ्त खाद्यान्न (गेहूँ, चावल और मोटे अनाज) उपलब्ध कराया जाता है। 
  • उद्देश्य: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान कर खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • प्रारंभ: इसे अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान राहत उपाय के रूप में लॉन्च किया गया था।
  • विस्तार: केंद्र सरकार ने इसे 1 जनवरी 2024 से 5 वर्षों (दिसंबर 2028 तक) के लिए बढ़ा दिया है।
  • लाभ:
    • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवारों को प्रति परिवार 35 किग्रा खाद्यान्न प्रतिमाह मुफ्त।
    • प्राथमिकता वाले परिवारों (PHH) को प्रति व्यक्ति 5 किग्रा खाद्यान्न प्रतिमाह मुफ्त।
  • महत्व: यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिस पर 5 वर्षों में लगभग ₹11.80 लाख करोड़ का खर्च अनुमानित है।

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