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भारत का पहला रॉक चेक डैम

भारत का पहला रॉक चेक डैम

India first rock check dam

 

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह जिले में सिंधु जल समृद्धि अभियान के तहत भारत के पहले रॉक चेक डैम (Rock Check Dam) का उद्घाटन किया गया।

भारत के पहले रॉक चेक डैम के बारे में: 

  • परिचय: यह एक अर्ध-स्थायी अवरोध (Semi-permanent barrier) है, जिसे पारंपरिक कंक्रीट या सीमेंट के बिना, केवल नदी के तल (riverbed) से एकत्रित विशाल पत्थरों को आपस में इंटरलॉक करके बनाया गया है। यह नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह अवरुद्ध किए बिना उसकी गति को धीमा करता है। 
    • उद्देश्य: शीत मरुस्थल लद्दाख में बुआई के मुख्य सीजन (peak sowing season) के दौरान किसानों को कृषि के लिए पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना। 
      • सर्दियों और शुरुआती वसंत में जब सिंधु नदी बहुत उथली (shallow) हो जाती है, तब जल स्तर को ऊपर उठाना ताकि पारंपरिक लिफ्ट मोटर और पंप खेतों तक पानी पहुंचा सकें।

मुख्य विशेषताएं:

  • आयाम: इसकी कुल लंबाई 200 फीट है। नदी तल पर इसकी आधार चौड़ाई 30 फीट है जो स्थिरता देती है, तथा शीर्ष डेक (top deck) की चौड़ाई 15 फीट है। यह नदी चैनल से 5 फीट ऊपर उठा हुआ है।
  • शून्य कंक्रीट तकनीक: इसमें सीमेंट या कंक्रीट का उपयोग 0% है, जो शून्य से नीचे (sub-zero) के तापमान में भी बांध को दरारों से सुरक्षित रखता है।
  • स्थान: लेह जिले का उपशी (Upshi) नामक क्षेत्र, जो लेह शहर से लगभग 44 किलोमीटर दूर है।
  • ऊंचाई: समुद्र तल से 11,400 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर अवस्थित है। 
  • जलाशय क्षेत्र (Pondage Area): यह बांध नदी के प्रवाह को धीमा करके अपस्ट्रीम (upstream) में लगभग 1,500 फीट (500 मीटर) लंबा कृत्रिम जल क्षेत्र बनाता है। 
  • जल भराव क्षमता: इसमें लगभग 4 करोड़ (40 मिलियन) लीटर पानी जमा करने की क्षमता है। 
  • जल की गहराई: नदी के किनारों पर पानी की गहराई 4 से 5 फीट और बीच में लगभग 10 फीट तक पहुंच जाती है।
  • निर्माण संस्था: लद्दाख का सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (Irrigation & Flood Control Department)। 
  • सामग्री: नदी तल से प्राप्त 180 मीट्रिक टन भारी चट्टानें (प्रत्येक पत्थर का वजन 500 किग्रा से 10 मीट्रिक टन तक)।
  • लागत और समय: मात्र ₹10 लाख की लागत के साथ रिकॉर्ड 7 दिनों के भीतर (12 मई से 18 मई, 2026) तैयार किया गया। 
  • उच्च दबाव सहनशीलता: यह गर्मियों (जुलाई-अगस्त) में पानी के प्रवाह के 25 क्यूसेक से बढ़कर 200 क्यूसेक (8 गुना) होने पर भी बिना बहे स्थिर रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

महत्व:

  • पारिस्थितिक अनुकूलता: कंक्रीट रहित होने के कारण जलीय जैव विविधता और नदी के नाजुक हिमालयी तंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
  • अनुकरणीय इंजीनियरिंग मॉडल: यह कम लागत और तीव्र निर्माण का एक ऐसा अनूठा उदाहरण है जिसे देश के अन्य उच्च-ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है।
  • कृषि और भूमि सुधार: यह पहल लद्दाख में पूर्ववर्ती ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ और स्पितुक गाँव में इगू-फे नहर के माध्यम से 800 एकड़ बंजर भूमि के पुनरुद्धार जैसी पर्यावरण सुधार योजनाओं को मजबूती प्रदान करती है। 

सिंधु जल समृद्धि अभियान:

  • परिचय: यह लद्दाख में शुरू की गई एक एकीकृत, पर्यावरण-अनुकूल जल प्रबंधन पहल है। यह स्थानीय सामग्रियों से कंक्रीट-मुक्त संरचनाएं बनाकर उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण और सतत कृषि का एक अभिनव मॉडल है। 
  • शुरुआत: इस अभियान की आधिकारिक शुरुआत मई 2026 में लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना द्वारा की गई।
  • उद्देश्य: लद्दाख जैसे ‘शीत मरुस्थल’ में मौसमी जल संकट को दूर करना तथा बुआई के मुख्य सीजन में किसानों को सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है। 
    • सिंधु नदी के पानी के प्राकृतिक स्तर को बढ़ाकर लिफ्ट पंपिंग को सुलभ बनाना और पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी पर रणनीतिक जल नियंत्रण मजबूत करना है। 

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