ऑपरेशन मिलाप (Operation Milap)
संदर्भ:
गुजरात पुलिस द्वारा हाल ही में चलाए गए ‘ऑपरेशन मिलाप’ (Operation Milap) के तहत महज एक महीने में 1,470 लापता व्यक्तियों को उनके परिवारों से सुरक्षित मिलाया गया।
ऑपरेशन मिलाप (Operation Milap) क्या हैं?
- परिचय: ऑपरेशन मिलाप राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस द्वारा मानव तस्करी रोधी इकाइयों (Anti-Human Trafficking Units) के समन्वय से चलाया जाने वाला एक सशक्त नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग अभियान (People-Centric Policing Campaign) है।
- इसके तहत वर्षों से लंबित गुमशुदगी के मामलों को पुनः खोलकर आधुनिक एवं मानवीय खुफिया तकनीकों के जरिए लापता लोगों की तलाश की जाती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर इसे सर्वप्रथम दिल्ली पुलिस द्वारा शुरू किया गया था, और हाल ही में गुजरात पुलिस ने इसे एक बड़े अभियान के रूप में चलाकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है।
- मुख्य उद्देश्य: गुमशुदा बच्चों, किशोरों और वयस्कों को सुरक्षित खोजकर उनके परिजनों को सौंपना।
- बच्चों के अवैध व्यापार, बाल श्रम और जबरन भीख मंगवाने वाले संगठित आपराधिक सिंडिकेट (Trafficking Syndicates) का पर्दाफाश करना।
- लापता लोगों के पुराने रिकॉर्ड्स को आधुनिक नेशनल डेटाबेस (जैसे TrackChild पोर्टल) से जोड़कर वैज्ञानिक मिलान करना।
- नोडल विभाग: संबंधित राज्य की पुलिस (जैसे दिल्ली पुलिस या गुजरात पुलिस की CID क्राइम और रेलवे सेल)।
- मानव तस्करी रोधी इकाई (Anti-Human Trafficking Unit – AHTU) और विशेष किशोर पुलिस इकाई (Special Juvenile Police Unit)।
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बाल कल्याण समितियां (CWC), स्वास्थ्य विभाग (पोस्टमार्टम डेटा हेतु) और गैर-सरकारी संगठन (NGOs)।
प्रमुख उपलब्धियां:
- गुजरात पुलिस: एक महीने लंबे अभियान (7 मई से 7 जून 2026) के दौरान 1,470 लापता व्यक्तियों को खोजा गया।
- इसमें 852 महिलाएं, 342 पुरुष, 234 नाबालिग लड़कियां और 42 नाबालिग लड़के सुरक्षित बरामद किए गए।
- सूरत शहर पुलिस ने अकेले 341 लोगों का पता लगाया।
- गुजरात पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट और मोबाइल ट्रैकिंग की मदद से राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी लोगों को ट्रेस किया।
- दिल्ली पुलिस: दिल्ली पुलिस ने इस अभियान को दिसंबर 2014 में लॉन्च किया था। जिसके तहत दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पश्चिम जिला टीम और AHTU ने अलग-अलग चरणों में हजारों बच्चों को बाल सुधार गृहों से पहचान कर उनके घर भेजा है।
- अकेले वर्ष 2025 के शुरुआती छह महीनों में 800 से अधिक (जिसमें 258 बच्चे शामिल थे) लापता लोगों को मिलाया गया।
अन्य राज्यों द्वारा चलाए गए इसी प्रकार के ऑपरेशंस:
- ऑपरेशन मुस्कान / ऑपरेशन स्माइल (Operation Muskaan / Smile): यह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसे सबसे पहले गाजियाबाद पुलिस (उत्तर प्रदेश) ने 2014 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था।
- इसके तहत देश भर की राज्य पुलिस (जैसे तेलंगाना, झारखंड, राजस्थान आदि) हर साल जनवरी और जुलाई के महीनों में विशेष अभियान चलाती है।
- इसके तहत रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से हजारों बाल श्रमिकों व बंधुआ बच्चों को मुक्त कराया गया है।
- ऑपरेशन कवच (Operation Kavach): कई राज्यों में बाल विवाह और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों तथा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बच्चों को बचाने हेतु चलाया जाता है।
- ऑपरेशन वात्सल्य (Operation Vatsalya): केरल पुलिस द्वारा राज्य के भीतर भटके हुए, बेघर और भीख मांगने वाले बच्चों को रेस्क्यू कर पुनर्वासित करने के लिए चलाया गया अभियान।
- ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते (Operation Nanhe Farishte): यह रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा देश भर के रेलवे स्टेशनों पर चलाया जाने वाला एक निरंतर अभियान है, जो घर से भागे या तस्करों के चंगुल में फंसे बच्चों को ट्रेन या स्टेशनों से रेस्क्यू करता है।
FAQs:
What is Operation Milaap?
यह लापता और अपहृत व्यक्तियों को खोजने के लिए चलाया गया एक पुलिस अभियान है।
What is the objective of Operation Milaap?
इसका मुख्य उद्देश्य लापता बच्चों को खोजना और उन्हें उनके परिवारों से मिलाना है।
Which agency launched Operation Milaap?
इसे भारत में दिल्ली पुलिस द्वारा लॉन्च किया गया था।
How does Operation Milaap help children?
इसमें बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों से शोषित या बिछड़े बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जाता है।
Why is Operation Milaap important?
यह बाल तस्करी को रोकता है और असहाय बच्चों को सुरक्षित घर वापस पहुँचाता है।
