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विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक Toshakhana नीलामी प्रक्रिया शुरू की

विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक Toshakhana नीलामी प्रक्रिया शुरू की

Indian Toshakhana Rules

संदर्भ:

हाल ही में विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय तोशाखाना (Toshakhana) के लिए सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया की घोषणा की है, जिसमें सरकारी अधिकारियों द्वारा प्राप्त लगभग 300 राजनयिक उपहार और स्मृति चिन्ह सार्वजनिक ई-नीलामी के लिए रखे गए हैं।

तोशाखाना क्या है?

भारत का तोशाखाना (Toshakhana) का शाब्दिक अर्थ ‘खजाना घर’ (Treasure House) होता है। यह विदेश मंत्रालय के तहत एक विशेष विभाग है। जब भी भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री या अन्य सरकारी अधिकारी विदेशी यात्राओं पर जाते हैं या भारत आए विदेशी मेहमानों से मिलते हैं, तो उन्हें मिलने वाले तमाम राजनयिक उपहार (Diplomatic Gifts) और स्मृति चिह्नों को इसी तोशाखाना में जमा किया जाता है।

  • तोशाखाना की अवधारणा प्राचीन मुगल काल और महाराजाओं के समय से जुड़ी है, जब विदेशी राजाओं से मिले कीमती उपहारों को शाही राजकोष में रखा जाता था। 
  • आधुनिक भारत में, इसके प्रशासनिक संचालन को व्यवस्थित करने के लिए सबसे पहले 1978 में नियम अधिसूचित किए गए थे। 

कानूनी नियम और नियम पुस्तिका: 

भारत में उपहार को संभालने के लिए सरकारी नियम (Government Regulations) बेहद सख्त हैं। वर्तमान में Toshakhana Rules, 2024 (तोशाखाना नियम, 2024) के तहत इसका संचालन किया जाता है। इसके तहत प्रमुख कानूनी बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • उपहार जमा करने की समय सीमा: आधिकारिक प्रोटोकॉल भारत (Official Protocol India) के अनुसार, किसी भी विदेशी दौरे से लौटने के बाद सरकारी अधिकारी को मिले सभी उपहारों को 30 दिनों के भीतर तोशाखाना में जमा कराना अनिवार्य है।
  • गिफ्ट रिटेंशन लिमिट (उपहार रखने की सीमा): लोक सेवक नियम (Public Servants Rules) और उपहार स्वीकृति नियम (Gift Acceptance Rules) के तहत, अधिकारी केवल ₹5,000 तक की बाजार कीमत के उपहारों को ही अपने पास मुफ्त में रख सकते हैं।
  • अतिरिक्त भुगतान का नियम: यदि उपहार की कीमत ₹5,000 से अधिक आंकी जाती है और अधिकारी उसे अपने पास स्मृति के रूप में रखना चाहता है, तो उसे ₹5,000 से ऊपर की अतिरिक्त मूल्य राशि सरकारी कोष में खुद से जमा करनी होती है। भुगतान न करने पर उपहार तोशाखाना की स्थाई संपत्ति बन जाता है।
  • वर्गीकरण और छंटनी: खराब होने वाली वस्तुएं (जैसे फल, मिठाइयाँ) तुरंत वितरित या नष्ट कर दी जाती हैं, जबकि हेरिटेज, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाता है।

इसे कौन हैंडल करता है?

तोशाखाना का प्रबंधन पूर्ण रूप से विदेश मंत्रालय (MEA) के एस्टेब्लिशमेंट डिवीजन (तोशाखाना सेक्शन) द्वारा किया जाता है। भारत सरकार का मुख्य केंद्रीय तोशाखाना नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के जवाहरलाल नेहरू भवन मुख्यालय में स्थित है। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर भी राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को मिलने वाले घरेलू उपहारों के लिए गृह मंत्रालय के तहत ‘उपहार संग्रहालय’ जैसी प्रणालियां काम करती हैं, जो सरकारी प्रोटोकॉल (Government Protocol) के दायरे में आती हैं।

Toshakhana नीलामी के मुख्य विवरण: 

  • कार्यक्रम की समयरेखा: ई-नीलामी सक्रिय है और 30 जून को समाप्त होगी ।
  • मूल्य सीमा: आरक्षित मूल्य 2,385 रुपये से शुरू होकर लगभग 17 लाख रुपये तक है ।
  • प्रमुख वस्तुएँ: इस संग्रह में विशिष्ट अनुष्ठानिक, विरासत संबंधी और सजावटी वस्तुएं शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख वस्तुएं हैं जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं:
  • रोलेक्स घड़ियाँ: दो रोलेक्स यॉट-मास्टर II लक्जरी घड़ियाँ, जिनकी नीलामी में सबसे अधिक शुरुआती कीमत है।
  • आभूषण और सोना: कुवैती सोने और रत्नों से जड़ा एक आभूषण सेट और 20 ग्राम का आर्गोर हेरियस स्विस सोने का बिस्किट।
  • चांदी के बर्तन: लंदन में बनी एक जटिल चांदी की चाय की सेट और ओमान से मंगाई गई एक अलंकृत चांदी की कटार।
  • तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स: एक एप्पल मैकबुक प्रो।
  • पुरातन वस्तुएँ: एक पुरातन चांदी का डिब्बा जिसे मूल रूप से विलासितापूर्ण सिगार/सिगरेट रखने के लिए बनाया गया था।

नीलामी की प्रक्रिया:

वर्तमान में हो रही नीलामी डिजिटल इंडिया के तहत पूरी तरह पारदर्शी है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • मूल्यांकन: सीमा शुल्क मूल्यांकनकर्ताओं (Customs Appraisers) और सरकारी विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति प्रत्येक वस्तु का वास्तविक बाजार मूल्य तय करती है।
  • आरक्षित मूल्य: वस्तु के मूल्यांकित मूल्य में पैकेजिंग और इंश्योरेंस लागत जोड़कर एक बेस प्राइस तय किया जाता है।
  • ऑनलाइन पोर्टल: यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन आयोजित की जाती है, जहाँ भारत का कोई भी नागरिक आधिकारिक तोशाखाना नीलामी पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकता है और बोली लगा सकता है।
  • डिलीवरी: सफल बोलीदाताओं को भुगतान पूरा होने के बाद वस्तुएं सुरक्षित रूप से उनके घर भेज दी जाती हैं।

नीलामी का फायदा:

  • सार्वजनिक भागीदारी: पहले उपहारों की नीलामी केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित थी, लेकिन अब आम जनता भी ऐतिहासिक और दुर्लभ वैश्विक धरोहरों को खरीद सकती है।
  • राजस्व अर्जन: नीलामी से प्राप्त होने वाला पूरा पैसा भारत के संचित कोष (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग देश के विकास कार्यों में होता है।
  • सार्वजनिक कार्यालय नैतिकता (Public Office Ethics) और पारदर्शिता: उपहारों को सार्वजनिक पोर्टल पर लाने से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और उपहारों के निजी दुरुपयोग पर पूरी तरह रोक लगती है, जो एक बेहतर भारतीय शासन (Governance India) को दर्शाता है।

FAQs:

  1. तोशाखाना क्या होता है?

    तोशाखाना सरकार का वह आधिकारिक कोष या विभाग है, जहाँ देश के गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों को विदेशी दौरों या राजनयिक मुलाकातों के दौरान मिले सभी उपहारों को सुरक्षित रखा जाता है।

  2. भारत में तोशाखाना के नियम क्या हैं?

    मुख्य नियमों के अनुसार, प्रत्येक सरकारी अधिकारी को मिले उपहार को 30 दिनों के भीतर जमा करना होता है। अधिकारी केवल ₹5,000 मूल्य तक के उपहार ही अपने पास रख सकते हैं; इससे महंगे उपहारों के लिए उन्हें बाजार मूल्य के अंतर का भुगतान करना पड़ता है

  3. सरकारी अधिकारियों को मिले उपहारों का क्या होता है?

    उपहारों का मूल्यांकन कस्टम एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है। जिन उपहारों को अधिकारी तय राशि देकर नहीं खरीदते, उन्हें सरकारी संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जाता है या फिर सार्वजनिक ई-नीलामी के जरिए देश के नागरिकों को बेच दिया जाता है।

  4. तोशाखाना का संचालन कौन करता है?

    इसका संचालन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) के अंतर्गत आने वाले एस्टेब्लिशमेंट डिवीजन का तोशाखाना अनुभाग करता है।

  5. तोशाखाना नियम क्यों बनाए गए हैं?

    ये नियम जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बनाए रखने और विदेशी ताकतों द्वारा उपहारों के माध्यम से भारत की विदेश नीति या नीति-निर्धारण को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास (हितों के टकराव) को रोकने के लिए बनाए गए हैं।

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