GAGAN Satellite Landing प्रणाली से हुई देश की पहली सैटेलाइट-आधारित जेट विमान लैंडिंग
संदर्भ:
हाल ही में इंडीगो (IndiGo) के एअरबस ए320 (Airbus A320) जेट विमान ने उदयपुर हवाई अड्डे पर स्वदेशी गगन (GAGAN) प्रणाली का उपयोग करके देश की पहली Satellite Based Landing (सैटेलाइट-आधारित जेट विमान लैंडिंग) को सफलतापूर्वक पूरा दिया।
GAGAN GAGAN Satellite Landing प्रणाली क्या हैं?
- परिचय: गगन का पूरा नाम GPS Aided GEO Augmented Navigation है। यह भारत का पहला स्वदेशी Satellite-Based Augmentation System (SBAS) है, जो विमानन क्षेत्र में जीपीएस (GPS) संकेतों की सटीकता को कई गुना तक बढ़ाने में सक्षम है।
- विकासकर्ता: इस अत्याधुनिक प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विकसित करने में कुल अनुमानित लागत ₹774 करोड़ आई है, जिसमें केंद्र सरकार, इसरो और एएआई का बजटीय योगदान शामिल है।
- तकनीकी ढांचा (Technical Infrastructure): इस प्रणाली के तहत पूरे देश में 15 भारतीय संदर्भ स्टेशन (INRES), 2 भारतीय मास्टर कंट्रोल सेंटर (INMCC) और 3 भारतीय लैंड अपलिंक स्टेशन (INLUS) स्थापित किए गए हैं।
- प्रयुक्त उपग्रह (Satellites): गगन के सिग्नल इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए गए GSAT-8 और GSAT-10 जैसे भू-स्थैतिक (Geostationary) उपग्रहों के माध्यम से निरंतर प्रसारित किए जाते हैं।
- सटीकता (Accuracy): यह जीपीएस की 7.6 मीटर की सामान्य सटीकता को सुधारकर क्षैतिज (Horizontal) रूप से 1.5 मीटर और लंबवत (Vertical) रूप से 2.5 मीटर तक की पिनपॉइंट सटीकता प्रदान करता है।
- संचालन कवरेज (Coverage): यह प्रणाली न केवल संपूर्ण भारतीय हवाई क्षेत्र बल्कि हिंद महासागर, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक निर्बाध विमानन सेवाएं देने में सक्षम है।
- वर्टिकल गाइडेंस (LPV Approach): यह Localiser Performance with Vertical Guidance (LPV) दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिससे विमान को रनवे पर उतरते समय क्षैतिज और लंबवत दोनों तरह का सटीक 3D मार्गदर्शन मिलता है।
- प्रमाणीकरण: नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA India) ने विमान सुरक्षा और जीवन सुरक्षा (Safety-of-Life) संचालन के लिए गगन को आधिकारिक तौर पर प्रमाणित किया है।
- विमानन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए DGCA ने 1 जुलाई 2021 के बाद भारत में पंजीकृत होने वाले सभी वाणिज्यिक विमानों के लिए गगन उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है।
- विशिष्टता: भूमध्यरेखीय आयनमंडल (Equatorial Ionospheric) क्षेत्र में वर्टिकल गाइडेंस के साथ प्रमाणित होने वाली यह दुनिया की पहली SBAS प्रणाली है।
- अंतर-संचालनीयता (Interoperability): यह प्रणाली अमेरिका के WAAS, यूरोप के EGNOS और जापान के MSAS जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय नौवहन प्रणालियों के साथ पूरी तरह से अनुकूल और इंटरऑपरेबल है।
गगन (GAGAN) प्रणाली का महत्व:
- छोटे और क्षेत्रीय हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण: भारत के कई छोटे और टियर-2 श्रेणी के हवाई अड्डों पर महंगे ग्राउंड-बेस्ड इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की कमी है।
- GAGAN Satellite Landing तकनीक के कारण अब इन छोटे हवाई अड्डों पर भी बिना ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े जेट विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकेगी, जिससे ‘उड़ान’ (UDAN) जैसी क्षेत्रीय संपर्क योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
- खराब मौसम और कम दृश्यता (Visibility) में मददगार: सामान्य तौर पर छोटे हवाई अड्डों पर उड़ानों के संचालन के लिए 5,000 मीटर तक की दृश्यता की आवश्यकता होती है।
- लेकिन गगन तकनीक की मदद से विमान चालक दल महज 800 मीटर तक की कम दृश्यता और घने कोहरे या बादलों के बीच भी रनवे की सटीक स्थिति का पता लगाकर विमान को सुरक्षित उतार सकते हैं।
- ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी: सटीक सैटेलाइट नेविगेशन के कारण विमानों को सीधे हवाई मार्ग (Direct Air Routes) मिलते हैं।
- इससे विमानों को हवा में ज्यादा देर तक चक्कर नहीं काटना पड़ता, जिससे ईंधन की भारी बचत होती है और विमानन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है।
- उड़ान सुरक्षा (Flight Safety) और हवाई यातायात प्रबंधन: यह प्रणाली वास्तविक समय में विमान की सटीक अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई की जानकारी एअर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) को भेजती है।
- इससे Air Navigation और हवाई यातायात प्रबंधन अधिक सुव्यवस्थित होता है तथा दो विमानों के बीच की दूरी को सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे हादसों की आशंका शून्य हो जाती है।
अन्य प्रमुख स्वदेशी प्रणालियों के उदाहरण:
- नाविक (NavIC – IRNSS): यह भारत की अपनी स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है।
- 7 उपग्रहों के समूह वाला यह नेटवर्क भारत और उसकी सीमाओं से 1,500 किलोमीटर दूर तक सटीक पोजिशनिंग सेवाएं प्रदान करता है, जिसे भारत का अपना ‘जीपीएस’ कहा जाता है।
- अस्त्र मिसाइल (Astra Missile): यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जो अत्याधुनिक रडार गाइडेंस से लैस है।
- नेत्रा एवाक्स (NETRA AEW&C): यह हवा में उड़ने वाला भारत का स्वदेशी प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण विमान तंत्र है।
- यह हवाई क्षेत्र में दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोनों पर 360-डिग्री निगरानी रखने में सक्षम है।
- टीएसीडीईएस (TACDEIS) / स्वदेशी एटीसी स्वचालन प्रणाली: भारतीय हवाई अड्डों पर हवाई यातायात को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाने के लिए निर्मित स्वदेशी एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर।
FAQs:
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GAGAN प्रणाली क्या है?
गगन (GAGAN) एक अंतरिक्ष-आधारित सहायता प्रणाली (SBAS) है। यह जीपीएस (GPS) से मिलने वाले सिग्नलों में सुधार करके हवाई जहाजों को लैंडिंग और उड़ान के दौरान बेहद सटीक भौगोलिक स्थिति (3D Spatial Accuracy) प्रदान करती है।
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GAGAN का पूरा नाम क्या है?
गगन का पूरा नाम GPS Aided GEO Augmented Navigation (जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन) है
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भारत की पहली Satellite-Based Jet Landing क्यों महत्वपूर्ण है?
यह ऐतिहासिक लैंडिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सिद्ध हो गया है कि अब भारत के बड़े वाणिज्यिक जेट विमान भी बिना किसी महंगे जमीनी उपकरण (जैसे ILS) के, केवल सैटेलाइट सिग्नल के आधार पर छोटे और दुर्गम हवाई अड्डों पर खराब मौसम में भी सुरक्षित उतर सकते हैं।
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GAGAN प्रणाली किसने विकसित की है?
इस प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
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GAGAN से विमानन क्षेत्र को क्या लाभ होगा?
इससे हवाई सुरक्षा (Flight Safety) बढ़ेगी, उड़ानों में देरी कम होगी, कोहरे या खराब दृश्यता में भी विमान उतारे जा सकेंगे, सीधे रूट मिलने से ईंधन की बचत होगी और छोटे शहरों के हवाई अड्डों का परिचालन सुगम हो जाएगा।
