असम का दुर्लभ हरगिला पक्षी
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड में असम के दुर्लभ और संकटग्रस्त हरगिला पक्षी (Greater Adjutant Stork) का विशेष रूप से उल्लेख किया।
- इसे असमिया भाषा में ‘हरगिला’ (Hargila Bird) यानी “हड्डियां निगलने वाला” कहा जाता है, जो आज भारतीय जैव विविधता का एक मुख्य सांस्कृतिक गौरव बन चुका है।
असम के दुर्लभ हरगिला पक्षी (Greater Adjutant Stork) के बारे मे:
- शारीरिक बनावट और ऊंचाई (Physical Stature): यह सारस प्रजाति (Stork family) का एक अत्यंत विशाल पक्षी है, जिसकी ऊंचाई लगभग 1.5 मीटर (5 फीट) तक होती है।
- विशिष्ट पहचान (Unique Features): इसका सिर गुलाबी-पीला और पूरी तरह से गंजा होता है, इसकी चोंच खंजर जैसी बड़ी होती है और गर्दन के नीचे एक थैलीनुमा पाउच लटका रहता है।
- नामकरण: ब्रिटिश काल के अधिकारियों ने इसकी सख्त और धीमी चाल के कारण इसे ‘ग्रेटर एडजुटेंट’ (Greater Adjutant) नाम दिया था, जो मार्च करते हुए किसी सैन्य अधिकारी की तरह लगती है।
- प्राकृतिक पर्यावास (Bird Habitat): यह मुख्य रूप से आर्द्रभूमि (Wetland Birds) और दलदली इलाकों में रहना पसंद करता है, जहां इसे पर्याप्त भोजन मिलता है।
- वैश्विक आबादी: दुनिया भर में बचे गिने-चुने सारसों में से लगभग 75% से 80% केवल असम (Assam Wildlife) के कामरूप जिले के कुछ गांवों में पाए जाते हैं।
- वर्ष 2007 में असम में इनकी संख्या मात्र 450 थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर 1,800 से अधिक हो चुकी है।
- पारिस्थितिक महत्व: यह एक सर्वाहारी और मुख्य रूप से मैला ढोने वाला (Scavenger) पक्षी है, जो मरे हुए जानवरों के सड़े मांस को खाकर पर्यावरण को बीमारियों से मुक्त रखता है।
- खतरा: लंबे समय तक असम के गांवों में इस पक्षी को ‘अशुभ’ और ‘मौत का सूचक’ मानकर नफरत की नजर से देखा जाता था, जिससे लोग इसके घोंसले वाले पेड़ काट देते थे।
- संरक्षण स्थिति: ग्रामीण समुदायों के लगातार प्रयासों के चलते हाल ही में आईयूसीएन (IUCN Red List) ने इसकी स्थिति को “लुप्तप्राय” (Endangered) से सुधारकर “निकट संकटग्रस्त” (Near Threatened) की श्रेणी में डाल दिया है।
- हरगिला सेना का उदय (Hargila Army): विख्यात वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन (Purnima Devi Barman) ने इस पक्षी को बचाने के लिए स्थानीय महिलाओं को एकजुट कर ‘हरगिला आर्मी’ नामक आंदोलन खड़ा किया।
- इस संरक्षण मॉडल के लिए डॉ. पूर्णिमा को टाइम पत्रिका की ‘वुमन ऑफ द ईयर 2025’ और Assam Hargila ज्योग्राफिक सोसाइटी के ‘वेफाइंडर अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया है।
- सांस्कृतिक कायाकल्प (Cultural Integration): ग्रामीणों की सोच बदलने के बाद अब इस पक्षी को भगवान विष्णु के वाहन ‘गरुड़’ के रूप में सम्मान दिया जाता है और स्थानीय शादियों के लोकगीतों में भी इसे शामिल किया गया है।
हरगिला पक्षी के संरक्षण के लिए चलाए गए सरकारी अभियान:
असम वन विभाग (Assam Forest Department) और ‘आरण्यक’ (Aaranyak) नामक गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से इस लुप्तप्राय प्रजाति (Endangered Species) को बचाने के लिए कई ज़मीनी अभियान (Hargila Conservation) चलाए गए हैं:
- इस अभियान का सबसे बड़ा स्तंभ ‘हरगिला आर्मी’ (Hargila Army) है, जिसमें आज 20,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- ये महिलाएं उन निजी जमीनों और पेड़ों (जैसे कदम्ब और सिल्क कॉटन) की चौबीसों घंटे सुरक्षा करती हैं जहां ये पक्षी अपने घोंसले बनाते हैं।
- नवजात बच्चों को घोंसलों से गिरने से बचाने के लिए पेड़ों के नीचे विशेष सुरक्षा जाल लगाए जाते हैं।
- संरक्षण को आजीविका से जोड़ने के लिए इन महिलाओं को हथकरघा का प्रशिक्षण दिया गया है. ये महिलाएं असमिया पारंपरिक स्कार्फ ‘गमोचा‘ और साड़ियों पर हरगिला पक्षी के मोटिफ (डिज़ाइन) बुनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचती हैं।
- इस बेहतरीन आर्थिक मॉडल ने उपेक्षित और अवांछित समझे जाने वाले पक्षी को पूरे असम के लिए सांस्कृतिक गौरव और महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा प्रतीक बना दिया है।
FAQs:
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हरगिला (Greater Adjutant Stork) पक्षी क्या है?
यह सारस परिवार का एक विशाल, दुर्लभ और मुख्य रूप से पर्यावरण को साफ रखने वाला मैला ढोने वाला (Scavenger) पक्षी है.
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हरगिला पक्षी को दुर्लभ और संकटग्रस्त क्यों माना जाता है?
इसके घोंसले वाले पेड़ों की कटाई, अंधविश्वास के कारण शिकार और आर्द्रभूमि (Wetlands) के सिकुड़ने से इसकी वैश्विक आबादी बहुत कम रह गई है.
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हरगिला पक्षी मुख्य रूप से कहाँ पाया जाता है?
यह मुख्य रूप से भारत के असम (कामरूप जिला) और बिहार (भागलपुर) तथा कंबोडिया के कुछ सीमित हिस्सों में पाया जाता है.
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असम में हरगिला संरक्षण अभियान क्यों सफल माना जाता है?
जनभागीदारी के कारण पक्षियों की संख्या 450 से बढ़कर 1,800 से अधिक हो गई है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल बना है.
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Hargila Army क्या है और इसकी शुरुआत किसने की?
यह 20,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं का संरक्षण संगठन है, जिसकी शुरुआत प्रसिद्ध वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन ने की थी.
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हरगिला पक्षी का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में क्या महत्व है?
यह मरे हुए जीवों और सड़ते हुए जैविक कचरे को खाकर प्रकृति को साफ रखता है और बीमारियों को फैलने से रोकता है.
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IUCN Red List में Greater Adjutant Stork की क्या स्थिति है?
सफल सामुदायिक संरक्षण प्रयासों के कारण अब इसे “लुप्तप्राय” (Endangered) से अपग्रेड करके “निकट संकटग्रस्त” (Near Threatened) श्रेणी में रखा गया है.
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हरगिला पक्षी के संरक्षण के लिए कौन-कौन से प्रयास किए जा रहे हैं?
इसके तहत घोंसलों की सुरक्षा, पेड़ों की कटाई पर रोक, जागरूकता अभियान और वस्त्र बुनाई के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है.
