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बोरजुली आर्द्रभूमि जैव विविधता विरासत स्थल घोषित

बोरजुली आर्द्रभूमि जैव विविधता विरासत स्थल घोषित

Borjuli Wetland

संदर्भ:

हाल ही में असम सरकार ने सोनितपुर जिले में स्थित बोरजुली आर्द्रभूमि (Borjuli Wetland) को जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site – BHS) के रूप में अधिसूचित किया।

बोरजुली आर्द्रभूमि (Borjuli Wetland) के बारे मे:

  • अवस्थिति: यह महत्वपूर्ण असम आर्द्रभूमि (Assam Wetland) भारत के असम राज्य के सोनितपुर जिले में स्थित है.
    • यह स्थल ब्रह्मपुत्र नदी घाटी के बाढ़ प्रवण मैदानी इलाकों (Flood Plains) का हिस्सा है.
  • सीमित क्षेत्रफल: यह एक अत्यंत छोटा पारिस्थितिक तंत्र (Wetland Ecosystem) है, जो मात्र 0.41 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है.
  • प्रजाति: यह स्थल मुख्य रूप से जंगली चावल की अत्यंत दुर्लभ प्रजाति ‘ओरिज़ा रूफिपोगोन’ (Oryza rufipogon) के प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध है.
  • जीन अभयारण्य: जैव विविधता भारत (Biodiversity India) के तहत इसे कृषि फसलों के जंगली रिश्तेदारों (Crop Wild Relatives) के संरक्षण के लिए एक जीवित आनुवंशिक बैंक माना गया है.
  • परियोजना: यहाँ वर्ष 2022 से ‘इन-सीटू (In-situ) संरक्षण और जंगली धान प्रबंधन परियोजना’ चलाई जा रही है.
    • इस संरक्षण कार्य को ICAR-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBPGR) और असम राज्य जैव विविधता बोर्ड संयुक्त रूप से क्रियान्वित कर रहे हैं.
    • इस पूरी संरक्षण योजना को राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA), कृषि मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है.
  • दर्जा: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) की सिफारिश पर इसे जुलाई 2026 में आधिकारिक तौर पर जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site – BHS) अधिसूचित किया गया.

क्यों घोषित किया गया जैव विविधता विरासत स्थल?

  • आनुवंशिक पूर्वज का संरक्षण: यहाँ वैश्विक स्तर पर खाए जाने वाले घरेलू चावल (ओरिज़ा सैटिवा) का प्रत्यक्ष विकासवादी पूर्वज (Progenitor) ‘ओरिज़ा रूफिपोगोन’ प्राकृतिक रूप से पनपता है, जिसे बचाना अत्यंत आवश्यक है.
  • प्राकृतिक रोग प्रतिरोधकता: यहाँ के जंगली धान में फसलों को नष्ट करने वाले कीटों (Pests) और कवक रोगों के खिलाफ अचूक प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता (Pest Resistance) मौजूद है. 
  • जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience): इस प्रजाति में अत्यधिक बाढ़ (जलमग्नता), सूखा और मिट्टी की लवणता (Salinity) को सहन करने वाले विशिष्ट जीन पाए जाते हैं, जो टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं.
  • इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation): कृत्रिम लैब के बजाय प्रजाति को उसके मूल प्राकृतिक पर्यावरण में ही विकसित होने और अनुकूलन की प्राकृतिक प्रक्रिया जारी रखने का अवसर देना प्राथमिक उद्देश्य था. 

जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) क्या होते हैं?

  • परिचय: जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site) विशिष्ट, अद्वितीय और पारिस्थितिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील (Fragile) तंत्र होते हैं.
  • कानूनी आधार: इनकी घोषणा जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 के तहत की जाती है.
  • अधिसूचना का अधिकार: राष्ट्रीय प्राधिकरण के परामर्श से केवल राज्य सरकारें ही इन्हें आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित कर सकती हैं.
  • विविध भौगोलिक विस्तार: ये स्थल स्थलीय (Terrestrial), तटीय, अंतर्देशीय जल निकायों या समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों (Marine Ecosystems) में फैले हो सकते हैं.
    • इनमें जंगली के साथ-साथ पालतू/घरेलू प्रजातियों की उच्च जैव विविधता और अंतरा-विशिष्ट श्रेणियां पाई जाती हैं.
    • इन क्षेत्रों में ऐसे जीव या वनस्पतियां शामिल होती हैं जो वैश्विक स्तर पर केवल उसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाती हैं.
    • इनमें ऐसी प्रजातियां सुरक्षित रखी जाती हैं जिनका जैव-वैज्ञानिक विकास (Evolutionary significance) का एक लंबा इतिहास रहा हो.
  • चयन: इनका चयन लुप्तप्राय, गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Threatened Species) या कीस्टोन प्रजातियों के पर्यावास के आधार पर होता है.
    • यह दर्जा उन क्षेत्रों को भी मिलता है जिनका स्थानीय समुदायों के साथ गहरा नैतिक, सौंदर्य या सांस्कृतिक संबंध (Sacred Groves) रहा हो.
  • विकेंद्रीकृत प्रबंधन: इनका प्रशासनिक संचालन जमीनी स्तर पर गठित स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) द्वारा किया जाता है.
    • वन्यजीव अभयारण्यों के विपरीत, BHS घोषित होने से स्थानीय समुदायों की पारंपरिक कृषि या आजीविका पद्धतियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है. 
  • भारत में स्थिति: जुलाई 2026 तक भारत में कुल 55 जैव विविधता विरासत स्थल हैं, जिनमें बोरजुली नवीनतम है।
    • कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित नल्लूर इमली उपवन (Nallur Tamarind Grove) को 2007 में भारत का पहला जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया था।

FAQs:

  1. बोरजुली आर्द्रभूमि कहाँ स्थित है?

    यह अनूठी आर्द्रभूमि भारत के असम राज्य के सोनितपुर जिले में ब्रह्मपुत्र नदी घाटी के मैदानी क्षेत्र में स्थित है।

  2. इसे जैव विविधता विरासत स्थल क्यों घोषित किया गया?

    यहाँ चावल के जंगली पूर्वज ‘ओरिज़ा रूफिपोगोन’ का प्राकृतिक वास है, जिसके इन-सीटू संरक्षण के लिए यह दर्जा मिला।

  3. इस आर्द्रभूमि का पारिस्थितिक महत्व क्या है?

    यह एक प्राकृतिक जीन अभयारण्य है, जो जलवायु-अनुकूल और रोग-प्रतिरोधी फसलों के विकास के लिए आनुवंशिक संसाधन प्रदान करता है।

  4. यहां कौन-कौन सी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं?

    यहाँ मुख्य रूप से आनुवंशिक रूप से महत्वपूर्ण जंगली धान की प्रजाति ओरिज़ा रूफिपोगोन (Oryza rufipogon) पाई जाती है

  5. जैव विविधता विरासत स्थल का क्या अर्थ है?

    जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत अधिसूचित अद्वितीय, समृद्ध और पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र जैव विविधता विरासत स्थल कहलाते हैं।

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