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नीति आयोग वैश्विक आयुर्वेद रोड़मैप रिपोर्ट

नीति आयोग वैश्विक आयुर्वेद रोड़मैप रिपोर्ट

Global Ayurveda Roadmap

संदर्भ:

हाल ही में नीति आयोग ने प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PwC) के सहयोग से “आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रोडमैप” (Global Ayurveda Roadmap) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। 

  • इस रिपोर्ट में पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) प्रणाली को वर्ष 2047 (विकसित भारत) तक वैश्विक स्तर पर एक साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में स्थापित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। 

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • तीन-स्तंभीय रणनीतिक ढांचा: वैश्विक स्वास्थ्य (Global Health) परिदृश्य में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए रिपोर्ट में तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
  • उपलब्धता (Availability): इसके तहत वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्यबल तैयार करना, हर्बल दवाओं (Herbal Medicine) के निर्यात और विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ाना तथा शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण शामिल है। [
  • स्वीकार्यता (Acceptability): इसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय नियमों का अनुपालन, शैक्षणिक व औद्योगिक सहयोग, वैश्विक बीमा कवरेज प्राप्त करना और हर्बल उत्पादों का स्थानीयकरण शामिल है। 
  • प्रसार (Propagation/Awareness): रणनीतिक ब्रांडिंग, चिकित्सा मूल्य पर्यटन (Medical Value Travel) को बढ़ावा देना और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे वैश्विक निकायों में आयुर्वेद भारत (Ayurveda India) की उपस्थिति मजबूत करना।
  • आर्थिक और रोजगार क्षमता: भारत का पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र वर्तमान में लगभग 61 अरब डॉलर का हो चुका है, जिसमें वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 10% है।
    • वैश्वीकरण से भारतीय स्वास्थ्य सेवा (Indian Healthcare) क्षेत्र में निर्यात और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। 
  • साक्ष्य-आधारित अनुसंधान: नीति आयोग रिपोर्ट (NITI Aayog Report) के अनुसार, भविष्य की पीढ़ियों के लिए वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और बहु-देशीय नैदानिक ​​परीक्षण (Multi-country clinical trials) आवश्यक हैं।
  • एककीकृत चिकित्सा प्रणाली (Integrative Medicine): पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) के साथ तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट ने लाइसेंसिंग ढांचे और वैश्विक अनुसंधान केंद्रों की स्थापना पर जोर दिया है।
  • सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति: आयुर्वेद का प्रसार भारत की ज्ञान-आधारित ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को सुदृढ़ करेगा। 

चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति:

चरणसमयावधिमुख्य फोकस क्षेत्र (Focus Areas)
अल्पकालिक (Short-term)2026–2029वैश्विक आयुर्वेद रजिस्टर (GAR) का निर्माण, WHO-GMP प्रमाणन, निर्यात डेटाबेस।
मध्यम अवधि (Medium-term)2030–2035ओईसीडी (OECD) देशों में बीमा पायलट प्रोग्राम, नियामक समन्वय।
दीर्घकालिक (Long-term)2036–2047कम से कम 20 राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) में औपचारिक समावेश।

नीति आयोग के प्रमुख सुझाव:

  • वैश्विक आयुर्वेद रजिस्टर (GAR): दुनिया भर के प्रमाणित चिकित्सकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस।
  • आयुर्वेद और योग के लिए विश्व महासंघ: अंतर्राष्ट्रीय मानकों के निर्धारण के लिए एक शीर्ष वैश्विक निकाय की स्थापना का प्रस्ताव।
  • चिकित्सा मूल्य पर्यटन ज़ोन: प्रमुख भारतीय शहरों में विशेष वेलनेस (Wellness) और समग्र चिकित्सा (Holistic Medicine) केंद्रों का विकास।
  • अनुभव केंद्र: जेनेवा, न्यूयॉर्क, लंदन, सिंगापुर और टोक्यो जैसे वैश्विक शहरों में प्रीमियम आयुर्वेद अनुभव केंद्र स्थापित करना। 

आयुर्वेद और संबंधित तथ्य:

  • त्रिदोष सिद्धांत (Vata, Pitta, Kapha): आयुर्वेद के अनुसार, मानव शरीर तीन मौलिक जैविक ऊर्जाओं से संचालित होता है: वात (गति), पित्त (उपापचय), और कफ (संरचना)। स्वास्थ्य इन तीनों के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। 
  • पंचमहाभूत: यह चिकित्सा प्रणाली ब्रह्मांड के पांच मूल तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पर आधारित है, जिनसे मिलकर मानव शरीर और प्रकृति का निर्माण हुआ है। 
  • प्रकृति: हर व्यक्ति की एक अद्वितीय शारीरिक और मानसिक बनावट होती है, जिसे प्रकृति कहा जाता है। इसे जानकर व्यक्ति अपनी जीवनशैली और आहार को उसी अनुसार ढाल सकता है। 
  • रोग का मूल कारण: आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों का इलाज करने के बजाय बीमारी की जड़ (निदान) पर काम करता है। इसका मानना है कि रोगों का मुख्य कारण प्रज्ञापराध (बुद्धिमत्ता की कमी या गलत आदतें) हैं।
  • अग्नि (पाचन तंत्र): आयुर्वेद में जठराग्नि (पाचन अग्नि) को स्वास्थ्य का मुख्य आधार माना जाता है। मजबूत अग्नि का अर्थ है अच्छा स्वास्थ्य और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता।
  • आहार और पोषण: “आहार ही औषधि है।” आयुर्वेद में भोजन पकाने के तरीके, खाने का समय और षड्रस (छह स्वाद – मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा और कसैला) के संतुलन को बहुत महत्व दिया जाता है। 
  • पंचकर्म थेरेपी: शरीर से विषाक्त पदार्थों (Ama) को बाहर निकालने के लिए पांच मुख्य शुद्धिकरण प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है: वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण। 
  • रसायन चिकित्सा (कायाकल्प): यह आयुर्वेद का एक विशेष अंग है जो बुढ़ापे को धीमा करने, उम्र बढ़ाने और शरीर के ऊतकों को पुनर्जीवित करने (Rejuvenation) पर केंद्रित है।
  • प्राकृतिक औषधियां: आयुर्वेद में मुख्य रूप से पौधों, खनिजों और प्राकृतिक स्रोतों से बनी औषधियों (जैसे- अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी, गिलोय) का उपयोग किया जाता है, जिनके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते। 
  • दिनचर्या (दैनिक जीवनशैली): इसमें सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की स्वस्थ आदतें शामिल हैं, जैसे- नस्य, ऑयल पुलिंग (गंडूष), और व्यायाम, जो शरीर को ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य और योग: आयुर्वेद में मन को शांत करने और ध्यान केंद्रित करने के लिए सत्व, रजस और तमस गुणों का विश्लेषण किया जाता है। मानसिक शांति के लिए योग और प्राणायाम इसके अभिन्न अंग हैं। 

FAQs:

  1.  वैश्विक आयुर्वेद रोडमैप रिपोर्ट क्या है?

    नीति आयोग द्वारा जारी यह रिपोर्ट (Global Ayurveda Roadmap) वर्ष 2047 तक आयुर्वेद को साक्ष्य-आधारित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की नीतिगत रूपरेखा है।

  2. नीति आयोग ने यह रिपोर्ट क्यों जारी की?

    पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दिलाने, निर्यात बढ़ाने और स्वास्थ्य कूटनीति मजबूत करने के लिए।

  3. रिपोर्ट के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?

    आयुर्वेद का वैश्विक मानकीकरण, अनुसंधान सुदृढ़ करना, अंतर्राष्ट्रीय बीमा कवरेज और भारत को वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा में अग्रणी बनाना।

  4. आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं

    वैश्विक आयुर्वेद रजिस्टर (GAR) बनाना, बहु-देशीय नैदानिक परीक्षण, चिकित्सा पर्यटन बढ़ाना और विदेशों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना।

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