SVEP प्रोग्राम से ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि उद्यमों को मिला बढ़ावा, जानिए इस प्रोग्राम के बारे में
संदर्भ:
हाल ही में पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau – PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि उद्यमों (Non-farm Enterprises) को बढ़ावा देकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है.
SVEP योजना क्या हैं?
- परिचय: स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (Start-up Village Entrepreneurship Programme – SVEP) ग्रामीण भारत में सूक्ष्म और नैनो-उद्यमों (Micro and Nano-enterprises) को उत्प्रेरित करने वाला मॉडल है.
- यह ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन (Poverty Reduction) और स्वरोजगार (Self Employment) को बढ़ावा देने की एक महत्वाकांक्षी पहल है.
- शुरुआत: इस कार्यक्रम को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 में एक उप-योजना (Sub-scheme) के रूप में अनुमोदित किया गया था.
- मूल योजना: यह दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत कार्य करता है.
- मंत्रालय: यह पूर्ण रूप से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) द्वारा संचालित की जाती है.
- तकनीकी भागीदार: अहमदाबाद स्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) इसका मुख्य तकनीकी सहायता भागीदार (Technical Support Partner) है.
योजना के मुख्य उद्देश्य:
- गैर-कृषि क्षेत्र का विकास: ग्रामीण आबादी की केवल कृषि पर निर्भरता को कम करने के लिए विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमों (Village Enterprises) की स्थापना करना.
- व्यापक समावेशन: ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को प्रथम पीढ़ी का उद्यमी (First-generation Entrepreneurs) बनने के लिए प्रेरित करना.
- स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र: ब्लॉक स्तर पर एक ऐसा सुदृढ़ वित्तीय और तकनीकी ढांचा तैयार करना, जो व्यवसायों के स्थिर होने तक उनका मार्गदर्शन कर सके.
- प्रोग्राम का कार्यान्वयन ढांचा:
- ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC-EP): ब्लॉक स्तर पर यह मुख्य समन्वय केंद्र होता है, जो ऋण आवेदनों का मूल्यांकन और व्यावसायिक डेटा का प्रबंधन करता है. सरकार प्रत्येक चयनित ब्लॉक के कार्यान्वयन के लिए ₹6.50 करोड़ का वित्तीय प्रावधान करती है.
- सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP-EP): स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और प्रमाणित युवाओं का एक कैडर (Cadder) तैयार किया जाता है, जिसमें कम से कम 60% महिलाएं होती हैं. एक CRP-EP अधिकतम 50 उद्यमों को व्यवसाय योजना और बाजार लिंकेज (Market Linkages) में मदद करता है.
- सामुदायिक निर्णय प्रक्रिया: इसमें ऋण देने और उद्यमों के चयन का अधिकार स्थानीय स्वयं सहायता समूह (SHG) संघों को दिया गया है, जिससे वित्तीय सुगमता सुनिश्चित होती है.
- वित्तीय सहायता:
- सामुदायिक उद्यम निधि (Community Enterprise Fund – CEF): इस कोष से उद्यमियों को बिना किसी जमानत (Collateral-Free) के शुरुआती बीज पूंजी (Seed Money) या ऋण प्रदान किया जाता है.
- वित्तीय प्रगति: केंद्र सरकार ने कार्यक्रम की निरंतरता बनाए रखने के लिए फरवरी 2026 तक संचयी रूप से ₹942.09 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा जारी किया है, जो इसके शुरुआती बजटीय आवंटन से लगभग 738% अधिक है.
योजना की प्रमुख उपलब्धियां:
- उद्यमों की संख्या: 30 जून 2026 तक, SVEP ने देश भर के 429 ब्लॉकों में 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सफलतापूर्वक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की है.
- राज्यों का प्रदर्शन: फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने में केरल (51,926 उद्यम) शीर्ष पर रहा है, जिसके बाद बिहार (35,899) और झारखंड (34,481) का स्थान है.
- लाभप्रदता और प्रभाव: भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के मूल्यांकन के अनुसार, समर्थित उद्यमों में से 99% उद्यम वर्तमान में मुनाफे में चल रहे हैं, जिनकी औसत मासिक आय लगभग ₹39,000 है.
महत्व:
- सामाजिक समावेशन (Social Inclusion): SVEP के अंतर्गत स्थापित उद्यमों के 86% उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं. यह ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से चली आ रही आर्थिक असमानता को दूर करने में सहायक है.
- महिला आर्थिक सशक्तिकरण (Women Economic Empowerment): मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, SVEP समर्थित 75% से अधिक उद्यमों का स्वामित्व या प्रबंधन महिलाओं के हाथों में है. यह ग्रामीण महिलाओं को केवल आजीविका मिशन (Livelihood Mission) के लाभार्थियों से बदलकर स्वतंत्र सूक्ष्म-व्यवसायी बनाता है.
- पलायन पर रोक (Mitigating Distress Migration): ग्रामीण क्षेत्रों में ही विनिर्माण और सेवा से जुड़े रोजगार सृजित होने से ग्रामीण युवाओं का आजीविका के लिए शहरों की ओर होने वाला मजबूरन पलायन कम हुआ है.
- केंद्रीकृत योजनाओं के साथ अभिसरण (Convergence of Schemes): यह कार्यक्रम बैंकों के अलावा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र की अन्य योजनाओं के साथ वित्तीय लिंकेज स्थापित करता है, जिससे छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने में मदद मिलती है.
- पारिवारिक जीवन स्तर में सुधार: इस कार्यक्रम के जरिए होने वाली आय से ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा बढ़ी है, जिससे उनके स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की उच्च शिक्षा (Education) पर होने वाले निवेश में प्रत्यक्ष सुधार देखा गया है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) क्या है?
उत्तर: यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित DAY-NRLM की एक उप-योजना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि आधारित सूक्ष्म उद्योगों (Non-farm Micro-enterprises) को बढ़ावा देती है.
प्रश्न 2: SVEP का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को वित्तीय सहायता, व्यवसाय प्रबंधन प्रशिक्षण (Soft Skills) और मेंटरशिप प्रदान कर गरीबी से बाहर निकालना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है.
प्रश्न 3: इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा?
उत्तर: इसका लाभ मुख्य रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिला सदस्यों, उनके परिवारों, और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्ग के युवाओं को मिलता है.
प्रश्न 4: SVEP किस मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है?
उत्तर: यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के तत्वावधान में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLMs) के माध्यम से संचालित किया जाता है.
प्रश्न 5: ग्रामीण उद्यमिता को यह योजना कैसे बढ़ावा देती है?
उत्तर: यह स्थानीय स्तर पर प्रमाणित ‘कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन’ (CRP-EP) का कैडर तैयार करती है, जो ग्रामीण उद्यमियों को बिजनेस प्लान बनाने और बाजार से जुड़ने में व्यावहारिक मदद देते हैं.
प्रश्न 6: क्या इस योजना के तहत वित्तीय सहायता मिलती है?
उत्तर: हाँ, इस योजना के अंतर्गत स्थापित सामुदायिक उद्यम निधि (CEF) के माध्यम से नए व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान शर्तों पर और बिना जमानत के ऋण सहायता प्रदान की जाती है.
