‘Samudra Manthan Scheme’ को कैबिनेट की मंजूरी- जानिए इस अपतटीय योजना के बारे में विस्तार से
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने देश की अपतटीय ऊर्जा क्षमता और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को गति देने के लिए ₹84,084 करोड़ के कुल परिव्यय वाली ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan Scheme – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को आधिकारिक मंजूरी प्रदान की.
समुद्र मंथन योजना (Samudra Manthan Scheme) क्या हैं?
- परिचय: ‘समुद्र मंथन’ योजना देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अंतर्गत आने वाले समुद्री अवसादी बेसिनों (Sedimentary Basins) में हाइड्रोकार्बन संसाधनों के व्यापक अन्वेषण पर केंद्रित है.
- मंत्रालय: भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum & Natural Gas) के तत्वावधान में संचालित पहल होगी.
- कारण:
- बढ़ती आयात निर्भरता (High Import Dependence): वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की कच्चे तेल की आयात निर्भरता 88.7% और प्राकृतिक गैस की निर्भरता लगभग 50% तक पहुँच गई है. पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट (West Asia Crisis) के बीच राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित करना अनिवार्य हो गया था.
- घटते पारंपरिक स्रोत: भारत के मौजूदा ऑनशोर (जमीनी) तेल और गैस क्षेत्रों का उत्पादन समय के साथ घट रहा है.
- अन्वेषण जोखिम को कम करना: गहरे पानी (Deepwater) में ड्रिलिंग अत्यधिक पूंजी-गहन और जोखिम भरी होती है. सार्वजनिक वित्तपोषण के जरिए निजी व सरकारी कंपनियों के वित्तीय जोखिम को कम (De-risking) करना इस योजना का मुख्य आधार है.
- उद्देश्य:
- भंडार में संवृद्धि: देश के हाइड्रोकार्बन संचित भंडारों में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समतुल्य (MMTOE) से अधिक की नई वृद्धि (Reserve Accretion) दर्ज करना.
- उत्पादन लक्ष्य: घरेलू कच्चे तेल और गैस के वार्षिक उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना.
- तकनीकी नेतृत्व: भारत को अपतटीय समुद्री प्रौद्योगिकियों (Offshore Technologies) और वैश्विक विनिर्माण का हब बनाना.
- लागू वर्ष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए विज़न के अनुरूप इसे वित्त वर्ष 2030-31 तक के लिए लागू किया गया है.
- बजटीय आवंटन: ₹84,084 करोड़ के इस कुल बजट को चार विशिष्ट तकनीकी स्तंभों में विभाजित किया गया है:
- गहरे पानी में अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग (₹43,200 करोड़): इसके तहत समुद्र की अत्यधिक गहराई में 60 नए अन्वेषण कुओं (Exploratory Wells) की ड्रिलिंग की जाएगी. सरकार प्रति कुएं की कुल लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ तक की वित्तीय सहायता देगी.
- अपतटीय भूकंपीय डेटा अधिग्रहण (₹28,534 करोड़): इसके माध्यम से समुद्री सतह के नीचे उच्च गुणवत्ता वाले त्रि-आयामी (3D) भूकंपीय डेटा का संग्रह, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा.
- साझा अपतटीय बुनियादी ढांचा हब (₹10,000 करोड़): उत्पादन की कुल लागत को कम करने के लिए समुद्र में साझा उत्पादन प्लेटफॉर्म और पाइपलाइनों (Evacuation Infrastructure) का विकास किया जाएगा.
- मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विसेज ज़ोन (₹2,000 करोड़): ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तेल और गैस क्षेत्र के उपकरणों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित जोन स्थापित किए जाएंगे.
- लाभान्वित क्षेत्र:
- ऊर्जा और रिफाइनिंग (Energy Sector): घरेलू स्तर पर गैस और कच्चे तेल की प्रचुरता से ऊर्जा क्षेत्र को स्थिरता मिलेगी.
- भारी इंजीनियरिंग और विनिर्माण: समुद्री रिग्स, जहाजों और पाइपलाइन निर्माण में लगी मेक इन इंडिया (Make in India) कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलेंगे.
- डिजिटल और अनुसंधान क्षेत्र: एआई-सक्षम प्रणालियों, उन्नत डेटा प्रोसेसिंग और भू-वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों में तकनीकी रोजगार का सृजन होगा.
ब्लू इकोनॉमी और तटीय समुदायों के साथ संबंध:
- ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) संबंध: भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति का लक्ष्य समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग करते हुए आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है.
- समुद्र मंथन योजना (Samudra Manthan Scheme) भारत के 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक के अप्रयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के मैपिंग और वैज्ञानिक मूल्यांकन को सक्षम बनाती है.
- अंडमान बेसिन, कृष्णा-गोदावरी बेसिन और मुंबई ऑफशोर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेल-गैस की खोज भारत के समुद्री कूटनीतिक प्रभुत्व को मजबूत करेगी.
- तटीय समुदायों (Coastal Communities) पर प्रभाव:
- तटीय अवसंरचना विकास (Coastal Development): गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अंडमान निकोबार जैसे तटीय राज्यों के बंदरगाहों का आधुनिकीकरण होगा.
- स्थानीय रोजगार सृजन: अपतटीय विनिर्माण और रसद आपूर्ति (Logistics) से तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे.
- मत्स्य पालन के साथ सह-अस्तित्व: साझा बुनियादी ढांचा हब के निर्माण से तटीय नौवहन सुरक्षित होगा. सरकार पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के कड़े नियमों के तहत काम करेगी ताकि स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका और समुद्री पारिस्थितिकी को कोई क्षति न पहुंचे.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: समुद्र मंथन योजना क्या है?
उत्तर: यह ₹84,084 करोड़ के बजट वाली भारत की एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) है, जो समुद्री तेल और गैस खोज पर केंद्रित है.
प्रश्न 2: कैबिनेट ने इस योजना को क्यों मंजूरी दी?
उत्तर: देश की 88.7% कच्चे तेल की भारी आयात निर्भरता को कम करने और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे मंजूरी दी गई है.
प्रश्न 3: इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 MMTOE की वृद्धि करना और गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाना है.
प्रश्न 4: इससे किन क्षेत्रों को लाभ मिलेगा?
उत्तर: इससे मुख्य रूप से ऊर्जा क्षेत्र, इस्पात व भारी इंजीनियरिंग विनिर्माण, डिजिटल डेटा प्रसंस्करण और समुद्री रसद (Logistics) उद्योग को भारी लाभ मिलेगा.
प्रश्न 5: ब्लू इकोनॉमी से इसका क्या संबंध है?
उत्तर: यह भारत के विशाल समुद्री आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर छिपे प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत दोहन (Ocean Economy) कर नीली अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है.
प्रश्न 6: क्या यह योजना तटीय समुदायों को लाभ पहुंचाएगी?
उत्तर: हाँ, यह तटीय राज्यों में बंदरगाह बुनियादी ढांचे का विकास (Coastal Development) करेगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी व औद्योगिक रोजगार के अवसर सृजित करेगी. से नए व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान शर्तों पर और बिना जमानत के ऋण सहायता प्रदान की जाती है.
