PM Surya Sarovar Yojana को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए योजना के बारे मे विस्तार से
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM Surya Sarovar Yojana – PM-SSY) को मंजूरी प्रदान की.
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM Surya Sarovar Yojana) क्या हैं?
- परिचय: यह दूरगामी केंद्रीय क्षेत्रक योजना (Central Sector Scheme) है. इसके तहत जल निकायों के ऊपर तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर सौर पैनल स्थापित करके फ्लोटिंग सौर फोटोवोल्टिक (Floating Solar Photovoltaic – FSPV) परियोजनाओं का विकास किया जाएगा.
- यह सीमित भूमि संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) क्षमता बढ़ाने की एक आधुनिक तकनीक है.
- मंजूरी तिथि: इस योजना को 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया.
- नोडल मंत्रालय: यह परियोजना भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy – MNRE) द्वारा संचालित और प्रशासित की जा रही है.
- वित्तीय आवंटन: इस सौर ऊर्जा योजना (Solar Power Scheme) के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹5,070 करोड़ का वित्तीय बजट स्वीकृत किया गया है.
- अनुमानित निवेश: इस सरकारी सहयोग के माध्यम से निजी और सार्वजनिक भागीदारी को मिलाकर कुल ₹28,500 करोड़ का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है.
- स्वीकृति चरण: परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 (5 वर्ष) के बीच स्वीकृत किया जाएगा.
- वित्तीय सहायता सहायता: योजना के अंतर्गत पात्र परियोजनाओं को वित्तीय सहायता (Financial Support) का वितरण वित्त वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा.
- मुख्य घटक:
- फ्लोटिंग सौर क्षमता (FSPV Target): देश भर के बांधों, जलाशयों, झीलों और औद्योगिक तालाबों में 5,000 मेगावाट (MW) क्षमता की तैरती सौर परियोजनाएं स्थापित करना.
- ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (ESS): ग्रिड स्थिरता (Grid Stability) बनाए रखने के लिए इन सौर परियोजनाओं के साथ न्यूनतम दो घंटे की भंडारण क्षमता वाली सह-स्थित बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System – BESS) लगाना अनिवार्य है. इसके तहत कुल 10,000 MWh की भंडारण क्षमता विकसित होगी.
- केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA):
- सफल क्रियान्वयन और चालू (Commissioning) होने पर विकासकर्ताओं को ₹1 करोड़ प्रति मेगावाट की सीधी वित्तीय सहायता दी जाएगी.
- परियोजना के प्रारंभिक जोखिम को कम करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Studies), बाथीमेट्री (Bathymetry) और हाइड्रोग्राफी (Hydrography) आकलन हेतु प्रति परियोजना ₹50 लाख तक का अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा.
- तकनीकी आधार: यह योजना राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (National Institute of Solar Energy – NISE) के वैज्ञानिक आकलन पर आधारित है.
- संस्थान के अनुसार भारत के अंतर्देशीय जल निकायों (Inland Water Bodies) में लगभग 102.18 गीगावाट (GW) की विशाल फ्लोटिंग सौर क्षमता मौजूद है, जबकि वर्तमान स्थापित क्षमता मात्र 700 मेगावाट ही है.
- प्राकृतिक शीतलन प्रभाव: पानी की सतह पर होने के कारण प्राकृतिक रूप से सौर पैनल ठंडे रहते हैं. इससे पारंपरिक भूमि-आधारित सौर पैनलों की तुलना में इनकी ऊर्जा उत्पादन दक्षता (Efficiency) काफी बढ़ जाती है.
महत्व:
- दुर्लभ भूमि संसाधनों का संरक्षण: भारत में भूमि अधिग्रहण एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती है. जल निकायों का उपयोग करने से कृषि और वन भूमि पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे भूमि उपयोग विवाद (Land-use Conflicts) पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं.
- जल संरक्षण और वाष्पीकरण में कमी: जल निकायों पर तैरती हुई सोलर लेक योजना (Solar Lake Scheme) पानी की सतह को सीधे सूर्य के प्रकाश से ढक देती है. इससे जलाशयों से होने वाले वाष्पीकरण (Evaporation) में भारी कमी आती है, जो भारत के शुष्क इलाकों में जल सुरक्षा को मजबूत करता है.
- ग्रिड विश्वसनीयता और पीक डिमांड प्रबंधन: सौर ऊर्जा की अनियमितता (Intermittency) को दूर करने के लिए अनिवार्य 2-घंटे का बैटरी स्टोरेज (BESS) बिजली ग्रिड को संतुलित रखेगा. यह अत्यधिक मांग (Peak Demand) के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा.
- जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति (COP Commitments): यह महत्वाकांक्षी योजना भारत को वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और पंचामृत प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में गति प्रदान करेगी.
- कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती: इस हरित ऊर्जा (Green Energy) पहल से देश में प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन (1 करोड़) टन CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो पर्यावरण (Sustainable Development) के लिए अत्यंत हितकारी है.
- घरेलू विनिर्माण और आत्मनिर्भरता: योजना के तहत प्लवन प्रणाली (Flotation Systems), पीवी मॉड्यूल और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी के घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) को प्राथमिकता दी जाएगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सशक्त करेगा.
- रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था: परियोजना की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में लगभग 16,000 से 17,000 पूर्णकालिक समकक्ष नौकरियों (Full-time Jobs) का सृजन होगा, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का विकास होगा.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना क्या है?
उत्तर: यह ₹5,070 करोड़ के बजट वाली एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका उद्देश्य देश के जलाशयों पर बैटरी स्टोरेज से लैस तैरते सौर पैनल स्थापित करना है.
प्रश्न 2: इस योजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य भूमि का उपयोग किए बिना जलाशयों पर 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता और 10,000 MWh ऊर्जा भंडारण प्रणाली का विकास करना है.
प्रश्न 3: योजना से किन लोगों को लाभ मिलेगा?
उत्तर: इससे उपभोक्ताओं को स्वच्छ और सस्ती बिजली मिलेगी, स्थानीय विनिर्माण उद्योग सुदृढ़ होगा तथा खेल एवं तकनीकी क्षेत्रों में 16,000 से अधिक रोजगार पैदा होंगे.
प्रश्न 4: क्या यह योजना सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए है?
उत्तर: हाँ, यह विशेष रूप से भारत के राष्ट्रीय सौर मिशन (Solar Mission India) के तहत फ्लोटिंग सौर ऊर्जा (FSPV) और आधुनिक ग्रिड स्टोरेज तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए है.
प्रश्न 5: इस योजना का संचालन कौन-सा मंत्रालय करेगा?
उत्तर: इस राष्ट्रीय स्तर की योजना का नोडल संचालन भारत सरकार का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) कर रहा है.
प्रश्न 6: योजना के लिए कितना बजट निर्धारित किया गया है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹5,070 करोड़ का कुल वित्तीय परिव्यय (Central Budget) निर्धारित किया है.
प्रश्न 7: इससे पर्यावरण को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे प्रतिवर्ष 1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी और जलाशयों का पानी वाष्पीकरण से सुरक्षित रहेगा.
