Maharashtra Religious Freedom Act 2026 को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने ‘महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2026‘ (Maharashtra Religious Freedom Act 2026) को संवैधानिक मंजूरी दी.
- जिसके बाद 30 जुलाई 2026 को इसे महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचित कर राज्य में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है.
महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 के मुख्य प्रावधान:
- अवैध धर्मांतरण का निषेध: इस अधिनियम के द्वारा किसी भी व्यक्ति द्वारा बल (Force), कपट (Deceit/Fraud), जबरदस्ती (Coercion), प्रलोभन (Allurement/Inducement) या विवाह के झांसे (Marriage-related deception) द्वारा किए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरण को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है.
- प्रलोभन (Allurement) की व्याख्या: इसके अंतर्गत मुफ्त शिक्षा, रोजगार का वादा, नकदी, बेहतर जीवनशैली, चमत्कारी उपचार (Divine Healing) या शादी का प्रलोभन देकर किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा.
- जबरदस्ती (Coercion): किसी व्यक्ति या परिवार पर सामाजिक बहिष्कार (Social Ex-communication) या ईश्वरीय अप्रसन्नता (Divine Displeasure) का भय दिखाना भी इसके दायरे में शामिल है.
- शून्य विवाह (Void Marriage): अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, केवल अवैध धार्मिक धर्मांतरण (Unlawful Conversion) के एकमात्र उद्देश्य से की गई किसी भी शादी को न्यायालय द्वारा ‘शून्य और अमान्य’ (Null and Void) घोषित किया जा सकता है.
- 60 दिनों का नोटिस (60-Day Advance Notice): स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को स्थानीय सक्षम प्राधिकारी—जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) को न्यूनतम 60 दिन पहले लिखित रूप में इसकी पूर्व सूचना देना अनिवार्य है.
- धर्मांतरण के बाद की घोषणा: धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक गुरु या संस्था को भी समारोह के बाद निर्धारित समय में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणा-पत्र प्रस्तुत करना होगा.
- पुलिस शिकायत का अधिकार: इस कानून के तहत न केवल पीड़ित व्यक्ति, बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन, या कोई भी सगे-संबंधी (Relatives) पुलिस स्टेशन में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा सकते हैं.
- दंड संरचना:
- सामान्य अपराध: सामान्य मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 से 7 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- संवेदनशील समूह (Vulnerable Groups): यदि पीड़ित कोई नाबालिग (Minor), महिला, या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) का सदस्य है, तो सजा 7 वर्ष की कैद और न्यूनतम ₹5 लाख का जुर्माना होगी.
- सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion): एक ही समय में दो या अधिक व्यक्तियों के अवैध धर्मांतरण के मामलों में 7 वर्ष तक का कारावास और ₹5 लाख तक का आर्थिक दंड तय किया गया है.
- बार-बार अपराध करने पर (Repeat Offenders): यदि कोई व्यक्ति या संस्था दोबारा इस कानून का उल्लंघन करती है, तो उसे 10 वर्ष तक की जेल और ₹7 लाख का जुर्माना भुगतना होगा.
- विधिक प्रकृति: इस अधिनियम (Anti Conversion Law) के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) प्रकृति के होंगे. इसके मामलों की सुनवाई विशेष रूप से सत्र न्यायालय (Session Court) द्वारा की जाएगी.
- पीड़ितों का पुनर्वास: कानून में राज्य के समेकित कोष (Consolidated Fund of the State) से अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को कानूनी और सामाजिक पुनर्वास सहायता (Rehabilitation Support) प्रदान करने का विशेष उपबंध किया गया है.
कानून से जुड़ी प्रमुख आलोचनाएं:
- निजता के अधिकार का हनन: आलोचकों का तर्क है कि जिलाधिकारी को 60 दिन पहले नोटिस देने की अनिवार्यता नागरिकों के मौलिक अधिकार—अनुच्छेद 21 (Right to Privacy) और व्यक्तिगत स्वायत्तता का उल्लंघन करती है.
- अल्पसंख्यकों में असुरक्षा: विभिन्न नागरिक और धार्मिक संगठनों (जैसे बॉम्बे के आर्चडायसिस) ने चिंता व्यक्त की है कि इस कानून का दुरुपयोग अल्पसंख्यक समुदायों को डराने-धमकाने के लिए किया जा सकता है.
- संवैधानिक चुनौती: इस अधिनियम को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) के विपरीत बताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है.
- प्रशासनिक हस्तक्षेप: व्यक्तिगत आस्था और विवाह जैसे निजी निर्णयों में राज्य तथा पुलिस की प्रत्यक्ष भूमिका बढ़ने से प्रशासनिक अतिरेक (Bureaucratic Overreach) की आशंका व्यक्त की जा रही है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 क्या है?
उत्तर: यह महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी या लालच देकर कराए जाने वाले अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए पारित एक सख्त राज्य कानून (Maharashtra Law 2026) है.
प्रश्न 2: इस कानून का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (Freedom of Religion) की रक्षा करना और विवाह या प्रलोभन के बहाने होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकना है.
प्रश्न 3: क्या यह धर्मांतरण से संबंधित कानून है?
उत्तर: हाँ, यह एक प्रकार का धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti Conversion Law) है जो स्वेच्छा से किए गए परिवर्तनों को विनियमित और अवैध परिवर्तनों को दंडित करता है.
प्रश्न 4: कानून में क्या प्रमुख प्रावधान शामिल हैं?
उत्तर: इसमें धर्मांतरण से 60 दिन पूर्व नोटिस देने की अनिवार्यता, शादी को अमान्य घोषित करने का अधिकार और पीड़ित के रिश्तेदारों को FIR का अधिकार शामिल है.
प्रश्न 5: इस कानून का उल्लंघन करने पर क्या सजा होगी?
उत्तर: अपराध की गंभीरता के आधार पर दोषी को 3 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख से ₹7 लाख तक का जुर्माना हो सकता है.
प्रश्न 6: क्या इस कानून पर कोई विवाद हुआ है?
उत्तर: हाँ, आलोचक इसे निजता के अधिकार (Article 21) और धार्मिक स्वतंत्रता (Article 25) के खिलाफ मान रहे हैं, जिसके कारण इसे कोर्ट में चुनौती दी जा रही है. की गई है.