दलदली ईल की नई प्रजाति “Rakthamichthys anchi” की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में वैज्ञानिकों ने असम में भूजल जलभृतों (Underground Aquifers) से जुड़े कुओं के भीतर अंधे और गहरे लाल रंग के दलदली ईल (Swamp Eel) की एक बेहद दुर्लभ नई प्रजाति खोजी है, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘रक्तमिचथिस अंची’ (Rakthamichthys anchi) नाम दिया गया.
रक्तमिचथिस अंची (Rakthamichthys anchi) के बारे में:
- खोज स्थल: यह दुर्लभ मछली असम के गोलपारा जिले के एक छोटे से गाँव में स्थित लगभग 7 मीटर गहरे, धूप-रहित और परित्यक्त कुओं (Dug-out Wells) से खोजी गई.
- खोजकर्ता टीम: इस खोज का नेतृत्व डॉ. राल्फ ब्रिट्ज (Ralf Britz) ने किया। उनकी टीम में अमांडा के. पिनियन, विमरीथी के. मारक, कांगजाम वेलेंटिना और युमनाम लोकेश्वर जैसे प्रख्यात शोधकर्ता शामिल थे.
- नाम का अर्थ: प्रजाति का नाम ‘अंची’ (Anchi) स्थानीय गारो जनजाति (Garo Language) के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘रक्त’ या ‘खून’.
- वंश (Genus): यह ‘रक्तमिचथिस’ (Rakthamichthys) वंश से संबंधित है. यह शब्द मलयालम शब्द ‘रक्तम’ (रक्त) और ग्रीक शब्द ‘इक्थिस’ (मछली) से मिलकर बना है.
- वैज्ञानिक वर्गीकरण:
- वर्ग (Class): एक्टिनोपटेरिगी (Actinopterygii – रे-फिनयुक्त मछलियाँ)
- गण (Order): सिनब्रैंचिफॉर्म्स (Synbranchiformes)
- कुल (Family): सिनब्रैंचिडे (Synbranchidae – दलदली ईल)
- शारीरिक बनावट: जीवित अवस्था में यह मछली गहरे चमकीले लाल रंग की दिखाई देती है. हालांकि, इसके शरीर में कोई वास्तविक लाल रंजक या पिगमेंट (Pigment) नहीं पाया जाता.
- इसकी त्वचा पूरी तरह से पारदर्शी (Translucent Skin) होती है, जिसके कारण शरीर के भीतर प्रवाहित होने वाली रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) स्पष्ट दिखाई देती हैं.
- पूर्ण अंधकार में रहने के कारण विकासवादी अनुकूलन (Evolutionary Adaptation) के तहत इसकी बाहरी आँखें पूरी तरह से लुप्त हो चुकी हैं, जिससे यह प्रजाति पूरी तरह अंधी है.
- शारीरिक संरचना: इसका शरीर अत्यंत लंबा, पतला और कीड़े जैसा (Wormlike Body) होता है.
- इसमें तराजू (Scales) और तैरने वाले पंख (Fins) अनुपस्थित होते हैं.
- वैज्ञानिकों ने इसके आंतरिक अंगों का अध्ययन करने के लिए किसी नुकसान के बिना 3D माइक्रो-कंप्यूटेड टोमोग्राफी (Micro-CT) स्कैन और डीएनए (DNA) विश्लेषण का उपयोग किया.
- विशिष्ट कंकाल संरचना: यह अपने वंश की अन्य उत्तर-पूर्वी प्रजाति (आर. रोंगसॉ) और पश्चिमी घाट की प्रजातियों से पार्श्व-रेखा नहर छिद्रों (Lateral-line canal pores) की अनुपस्थिति और अधिक संख्या में प्रीनल कशेरुकाओं (Preanal Vertebrae: 90–100) के कारण पूरी तरह भिन्न है.
- आवास: यह एक फ्रीटोबिटीक (Phreatobitic) जीव है, जिसका अर्थ है कि यह विशेष रूप से जमीन के नीचे कंकड़-पत्थर और जलोढ़ जमाव वाले भूजल जलभृतों के भीतर गहरे अंधेरे में निवास करती है.
- आहार: यह मुख्य रूप से मांसाहारी (Carnivorous) प्रवृत्ति की होती है. भूमिगत जल में पाए जाने वाले सूक्ष्म अकशेरुकी जीवों (Invertebrates), छोटे क्रस्टेशियंस और जलीय कीटों को यह अपना आहार बनाती है.
- संरक्षण स्थिति: शोध के दौरान वैज्ञानिकों को केवल 4 नमूने (Specimens) ही प्राप्त हुए हैं, जो इसके सीमित और नाजुक अस्तित्व को दर्शाते हैं.
- नई प्रजाति होने के कारण अभी इसे IUCN Status रेड लिस्ट में आधिकारिक रूप से वर्गीकृत नहीं किया गया है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रक्तमिचथिस अंची क्या है?
उत्तर: यह असम में खोजी गई बिना आँखों वाली और पारदर्शी त्वचा के कारण गहरे लाल रंग की दिखने वाली दलदली ईल की एक नई दुर्लभ प्रजाति (New Swamp Eel Species) है.
प्रश्न 2: इस नई प्रजाति की खोज कहाँ हुई?
उत्तर: इसकी खोज उत्तर-पूर्व भारत के असम राज्य के गोलपारा जिले में स्थित लगभग 7 मीटर गहरे इंसानी कुओं के भूमिगत जलभृतों में की गई है.
प्रश्न 3: यह प्रजाति किस प्रकार की मछली है?
उत्तर: यह एक फ्रीटोबिटीक सिनब्रैंचिड ईल (Phreatobitic Synbranchid Eel) मछली है, जो पूरी तरह से जमीन के नीचे के जलभृतों (Aquifers) में रहने के लिए अनुकूलित है.
प्रश्न 4: इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह खोज प्रमाणित करती है कि उत्तर-पूर्वी भारत का भूमिगत जल तंत्र जैव विविधता (Biodiversity India) से समृद्ध है और यह जीवों के विकासवादी अनुकूलन को समझने में मदद करता है.
प्रश्न 5: इस प्रजाति की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: इसकी मुख्य विशेषताओं में बाहरी आँखों का न होना (अंधापन), शरीर पर रंजक (Pigment) न होना तथा पारदर्शी त्वचा से रक्त वाहिकाओं का दिखना शामिल है.र और गड़बड़ी की रिपोर्टिंग के लिए एक समर्पित ईमेल हेल्पलाइन शुरू की गई है.
