Ganga Flood Prone Area Redefined- त्रि-स्तरीय बाढ़ क्षेत्र वर्गीकरण, सक्रिय बाढ़ मैदान-नियामक क्षेत्र-चेतावनी क्षेत्र
संदर्भ:
हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) ने ‘गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण (द्वितीय संशोधन) आदेश, 2026’ आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया। इसके माध्यम से वैज्ञानिक मानदंडों के आधार पर गंगा और उसकी सहायक नदियों के बाढ़ संभावित क्षेत्र पुनः परिभाषित (Ganga Flood Prone Area Redefined) को किए गए है।
‘गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण (द्वितीय संशोधन) आदेश, 2026’: पृष्ठभूमि एवं संशोधन
- मूल अधिनियम: वर्ष 2016 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ‘गंगा नदी प्राधिकरण आदेश, 2016’ लागू किया गया था।
- इस मूल आदेश में गंगा और उसकी सहायक नदियों के पूरे बाढ़ क्षेत्र (Ganga Floodplain) को एक समान रूप से ‘निर्माण-मुक्त क्षेत्र’ (Construction-free Zone) घोषित किया गया था।
- संशोधन की आवश्यकता: 2016 के कानून में ‘सक्रिय बाढ़ क्षेत्र’ शब्द तो था परंतु उसकी कोई स्पष्ट और गणितीय परिभाषा नहीं थी।
- इसके अतिरिक्त, संपूर्ण गंगा बेसिन योजना (Ganga Basin Planning) में एकसमान प्रतिबंध के कारण बुनियादी ढांचागत विकास (Infrastructure Development) और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) परियोजनाओं में कई विधिक अड़चनें आ रही थीं।
- नई परिभाषा: नवीनतम संशोधन के तहत, केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC) के तकनीकी दिशानिर्देशों के आधार पर बाढ़ आने की आवृत्ति (Flood Frequency) और लौटने की अवधि (Return Period) के अनुसार गंगा फ्लड ज़ोन (Ganga Flood Zone) को तीन सुस्पष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- सक्रिय बाढ़ मैदान (Active Flood Plain): इसके अंतर्गत गंगा या उसकी सहायक नदियों के वे क्षेत्र शामिल हैं जो प्रत्येक 5 वर्ष में कम से कम एक बार (1-in-5-year return period) आने वाली बाढ़ के कारण जलमग्न हो जाते हैं।
- इस क्षेत्र में स्थायी आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा। केवल धार्मिक आयोजनों जैसी मामूली अस्थायी संरचनाओं को ही अनुमति मिलेगी।
- नियामक क्षेत्र (Regulatory Zone): यह नदी का मध्यवर्ती क्षेत्र है जो औसतन 5 से 25 वर्षों में एक बार आने वाली बाढ़ (1-in-25-year flood) से प्रभावित होता है।
- इस क्षेत्र से ‘निर्माण मुक्त’ पूरी तरह हटा दिया गया है। अब यहाँ राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और स्थानीय प्राधिकरणों से विशेष तकनीकी विधिक मंजूरी (Clearances) प्राप्त करने के बाद विकासात्मक निर्माण किए जा सकेंगे।
- चेतावनी क्षेत्र (Warning Zone): यह बाढ़ क्षेत्र का सबसे बाहरी घेरा है जो 25 से 100 वर्षों की अवधि में एक बार आने वाली अत्यंत दुर्लभ या अधिकतम प्रवाह वाली ऐतिहासिक बाढ़ (1-in-100-year extreme flood) की चपेट में आता है।
- इस क्षेत्र में जलवायु सुदृढ़ता (Climate Resilience) मानकों को ध्यान में रखते हुए, सुरक्षात्मक और पर्यावरण अनुकूल विकास कार्यों की अनुमति नियामक मंजूरी के अधीन होगी।
- रखरखाव का नया स्वरूप:
- प्रदूषण स्रोतों में कमी: संशोधित आदेश स्पष्ट करता है कि नदी तटों को कंक्रीट के जंगलों में तब्दील करने के बजाय उनका रखरखाव प्रदूषण के स्रोतों (Pollution Sources) और मानवजनित दबावों को कम करने के लिए किया जाएगा।
- भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge): इस नीति का मुख्य तकनीकी उद्देश्य बाढ़ के मैदानों के प्राकृतिक जलभृत पुनर्भरण कार्यों (Natural Aquifer Functions) को अक्षुण्ण रखना है।
महत्व:
- विधिक विसंगतियों का निवारण (Legal Streamlining): राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में चल रहे विभिन्न मुकदमों (जैसे उत्तर प्रदेश में गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट मामले) में 2016 के कानून के अस्पष्ट शब्द जाल का हवाला दिया जाता था। यह संशोधन विधिक स्पष्टता लाता है।
- संतुलित विकास और आपदा नियंत्रण (Balanced Development): यह नीति ‘पर्यावरण बनाम विकास’ के द्वंद्व को सुलझाती है। यह नदी तंत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाते हुए बाढ़ नियंत्रण उपायों (Flood Control Measures) जैसे तटबंधों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।
- वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन (Scientific Disaster Management): बाढ़ के मैदानों की सटीक मैपिंग (Ganga Floodplain Mapping) से प्रशासन को सटीक बाढ़ पूर्वानुमान (Flood Forecasts) जारी करने और बाढ़ संवेदनशीलता (Flood Vulnerability) के आधार पर प्रभावी निकासी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: केंद्र सरकार ने गंगा के बाढ़ संभावित क्षेत्र को क्यों पुन: परिभाषित किया?
उत्तर: वर्ष 2016 के पुराने नियमों में विधिक विसंगतियां थीं और ‘सक्रिय बाढ़ क्षेत्र’ की कोई वैज्ञानिक परिभाषा नहीं थी, जिससे विकास कार्य बाधित हो रहे थे।
प्रश्न 2: Ganga Flood Prone Area से क्या मतलब है?
उत्तर: इसका तात्पर्य गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित उन निचले मैदानी क्षेत्रों से है जो समय-समय पर अत्यधिक जल प्रवाह के कारण जलमग्न हो जाते हैं।
प्रश्न 3: नए Flood Zone की पहचान कैसे की गई?
उत्तर: केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के आधार पर बाढ़ आने की समय-अवधि (5 वर्ष, 25 वर्ष और 100 वर्ष की आवृत्ति) को मानक मानकर पहचान की गई है।
प्रश्न 4: गंगा के Floodplain की Mapping क्यों जरूरी है?
उत्तर: नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रदूषण मुक्त रखने, भूजल संचयन को बढ़ाने और तटीय क्षेत्रों में होने वाली जान-माल की हानि को रोकने के लिए मैपिंग आवश्यक है।
प्रश्न 5: नए नियमों का गंगा किनारे रहने वाले लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: 5 साल वाले सक्रिय क्षेत्र के बाहर (नियामक और चेतावनी जोन में) रहने वाले लोगों को उचित विधिक मंजूरी के साथ संपत्तियों और ढांचों के विकास की सुविधा मिलेगी।
