India First Guide for Open Natural Ecosystems लॉन्च, जानिए क्या हैं इसकी विशेषताएं?
संदर्भ:
हाल ही में भारत ने मंगोलिया के उलानबातर में आयोजित UNCCD COP17 (मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन) में घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के लिए भारत की पहली मार्गदर्शिका (India First Guide for Open Natural Ecosystems) लॉन्च की।
खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र (Open Natural Ecosystems – ONEs) क्या होते है?
- परिचय: खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र (ONEs) ऐसे प्राकृतिक परिदृश्य होते हैं, जहाँ मुख्य रूप से घास, झाड़ियाँ और शाकीय पौधे (Herbs) पाए जाते हैं, और वृक्षों का घनत्व या तो बहुत कम (Scattered) होता है या पूरी तरह अनुपस्थित होता है।
- ऐतिहासिक रूप से इन्हें जंगलों की तुलना में “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में गलत वर्गीकृत किया जाता रहा है।
- प्रकार: एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, भारत के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में ONEs लगभग 3.2 लाख वर्ग किलोमीटर (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10%) हिस्से को कवर करते हैं। इसके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
- हिमालयी और तराई घास के मैदान (Himalayan and Terai Grasslands): ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों और तलहटी में फैले दलदली व शुष्क घास के मैदान।
- थार और बन्नी परिदृश्य (Thar and Banni Landscapes): गुजरात का कच्छ (बन्नी) और राजस्थान का मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र।
- दक्कन के सवाना (Deccan Savannas): मध्य और दक्षिण भारत के पठारी सवाना परिदृश्य।
- चट्टानी पठार और खड्ड (Rocky Plateaus and Ravines): जैसे चंबल के खड्ड और पश्चिमी घाट के पठार।
- झाड़ीदार भूमि और तटीय तंत्र (Scrubland and Coastal Ecosystems): तटीय रेत के टीले और कांटेदार झाड़ीदार क्षेत्र।
- महत्व:
- अद्वितीय जैव विविधता (Grassland Biodiversity India): ये क्षेत्र अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों जैसे—ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण), ब्लैकबक (काला हिरण), भारतीय भेड़िया और लेसर फ्लोरिकन को आश्रय देते हैं। ये जीव घने जंगलों में जीवित नहीं रह सकते।
- भूमिगत कार्बन संचयन (Carbon Sequestration): वनों की तुलना में घास के मैदान (Grasslands Conservation India) अपनी जड़ों और मिट्टी के नीचे अधिक स्थायी रूप से कार्बन का भंडारण करते हैं। वनाग्नि के दौरान भी यह कार्बन सुरक्षित रहता है, जो जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- आजीविका और पशुधन (Sustain Pastoral Livelihoods): भारत के लगभग 50 करोड़ पशुधन और 20 से अधिक देहाती (Pastoralist) तथा घुमंतू समुदाय अपनी आजीविका के लिए इन्हीं चारागाहों पर निर्भर हैं।
- जल और मृदा संरक्षण (Water & Soil Conservation): ये तंत्र भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) को सुगम बनाते हैं और शुष्क क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकते हैं।
- चुनौतियाँ:
- बंजर भूमि (Wasteland Misclassification): सरकारी ‘वेस्टलैंड एटलस’ में इन समृद्ध घास के मैदानों को अनुपत्पादक मानकर उद्योगों या सौर/पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवंटित कर दिया जाता है।
- अनुचित वनीकरण (Inappropriate Afforestation): “ग्रीन इंडिया मिशन” के तहत घास के मैदानों में जबरन पेड़ लगाने (जैसे विदेशी प्रजाति प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा) से स्थानीय पारिस्थितिकी नष्ट हो जाती है।
मार्गदर्शिका (Guide) की मुख्य विशेषताएं:
यह पहली मार्गदर्शिका पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के मार्गदर्शन में अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट (ATREE), IUCN, ISRO के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) और ICFRE द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है।
- 24 पारिस्थितिक प्रकारों का वर्गीकरण: इस गाइड में भारत भर के 24 विशिष्ट खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों का व्यापक मानचित्रण और वैज्ञानिक विवरण दिया गया है।
- पारंपरिक ज्ञान का समावेशन: इसमें राजस्थान के ‘ओरण’ (सामुदायिक पवित्र उपवन) और ‘गौचर’ (ग्राम चरागाह) जैसे पारंपरिक संरक्षण मॉडल को शामिल किया गया है।
- वैज्ञानिक बहाली (Science-based Restoration): यह मार्गदर्शिका नीति निर्माताओं को वन-केंद्रित मानसिकता से हटकर शुष्क भूमियों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करती है।
भारत सरकार के प्रयास:
- भूमि क्षरण तटस्थता (LDN Target): भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षरणग्रस्त भूमि को बहाल करने का संकल्प लिया है, जिसमें इन पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली प्रमुख घटक है।
- अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट (Aravalli Green Wall Project): अरावली पहाड़ियों के क्षरण को रोकने और मरुस्थलीकरण की रोकथाम के लिए स्थानीय प्रजातियों का रोपण।
- कैम्पा फंड (CAMPA Fund) का तर्कसंगत उपयोग: अब सरकार इस कोष का उपयोग घास के मैदानों के प्राकृतिक पुनरुद्धार (Ecological Restoration) के लिए करने पर बल दे रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Open Natural Ecosystems क्या होते हैं?
उत्तर: ये स्वाभाविक रूप से खुले परिदृश्य (Naturally Open Landscapes) हैं, जहाँ मुख्य रूप से घास और झाड़ियाँ होती हैं तथा वृक्षों का आवरण बहुत सीमित होता है।
प्रश्न 2: भारत ने Grasslands और अन्य Open Natural Ecosystems के लिए पहली Guide क्यों जारी की?
उत्तर: इन क्षेत्रों को “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में गलत वर्गीकृत होने से बचाने और इनके वैज्ञानिक संरक्षण (Conservation Planning) हेतु इसे जारी किया गया है।
प्रश्न 3: भारत के Open Natural Ecosystems में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
उत्तर: इसमें हिमालयी घास के मैदान, थार मरुस्थल, बन्नी चरागाह, दक्कन के सवाना, चट्टानी पठार, खड्ड और झाड़ीदार भूमियां शामिल हैं।
प्रश्न 4: Grasslands और Savannas का Ecological महत्व क्या है?
उत्तर: ये अद्वितीय जैव विविधता (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को सहारा देते हैं, जल चक्र को नियंत्रित करते हैं और महत्वपूर्ण चारागाह संसाधन प्रदान करते हैं।
प्रश्न 5: भारत में Grassland Conservation क्यों जरूरी है?
उत्तर: भारत के करोड़ों देहाती समुदायों (Pastoral Communities) की आजीविका बचाने, पशुधन को चारा देने और लुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए यह आवश्यक है।
प्रश्न 6: Open Natural Ecosystems को Forests से अलग क्यों माना जाता है?
उत्तर: जंगलों में वृक्षों का घनत्व अधिक होता है, जबकि ONEs में वृक्ष विरल होते हैं और यहाँ की जैव विविधता पूरी तरह धूप वाले खुले वातावरण के अनुकूल होती है।
प्रश्न 7: Grassland Restoration से Biodiversity को कैसे फायदा होता है?
उत्तर: इससे घास के मैदानों के विशेषज्ञ जीवों (जैसे काले हिरण और भेड़िये) को उनका प्राकृतिक आवास वापस मिलता है, जिससे उनकी आबादी बढ़ती है।
