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UNCCD COP17 Mongolia 2026- आयोजन, अध्यक्षता, मुख्य फोकस क्षेत्र एवं महत्व

UNCCD COP17 Mongolia 2026- आयोजन, अध्यक्षता, मुख्य फोकस क्षेत्र एवं महत्व

UNCCD COP17 Mongolia 2026

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन (UNCCD COP17) की शुरुआत 17 अगस्त 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में हुई है। यह वैश्विक शिखर सम्मेलन भूमि क्षरण और सूखे की परस्पर जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

UNCCD (United Nations Convention to Combat Desertification) COP17 Mongolia 2026 के मुख्य बिंदु:

  • आयोजन स्थल: यह सम्मेलन मंगोलिया (Mongolia) की राजधानी उलानबातर (Ulaanbaatar) में आयोजित किया जा रहा है। 
  • अवधि: यह वैश्विक सम्मेलन 17 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक संचालित होगा। 
  • सत्र का प्रकार: यह मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के पक्षकारों का 17वां सत्र (17th session of the Conference of the Parties – COP17) है। 
  • अध्यक्षता: सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मंगोलिया की विदेश मंत्री बातमंख बातसेटसेग (Batmunkh Battsetseg) को सर्वसम्मति से COP17 का अध्यक्ष (COP17 President) चुना गया है। 
  • मुख्य विषय: इस वर्ष का आधिकारिक विषय “भूमि का पुनर्स्थापन, आशा का पुनर्स्थापन” (Restoring Land, Restoring Hope) निर्धारित किया गया है।
  • भागीदार देश: इस सम्मेलन (UNCCD Conference Mongolia) में UNCCD के सभी 197 सदस्य देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक वैज्ञानिक, नागरिक समाज, युवा प्रतिनिधि और चरवाहा समुदायों के नेता भी शामिल हैं।
  • विशेष संयोग: यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और पशुपालक वर्ष (IYRP 2026) के दौरान हो रहा है, जिसकी वकालत स्वयं मंगोलिया ने की थी।
  • फोकस क्षेत्र:
    • चारागाहों का संरक्षण (Rangelands): पृथ्वी की लगभग 54% भूमि पर फैले चारागाहों का सतत प्रबंधन (Sustainable Land Management) करना और इस पर निर्भर 50 करोड़ पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित करना।
    • स्टेप एक्शन एजेंडा (Steppe Action Agenda): मंगोलियाई प्रेसीडेंसी द्वारा पेश किया गया यह एजेंडा शुष्क भूमि क्षेत्रों (Drylands) में खाद्य सुरक्षा (Food security) और पारिस्थितिक तंत्र बहाली (Ecosystem restoration) पर केंद्रित है।
    • सूखा लचीलापन क्षमता सूचकांक (DRCI): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने देशों को सूखे से निपटने के लिए तैयार करने हेतु एक नया तकनीकी उपकरण ‘Drought Resilience Capacity Index’ प्रस्तावित किया है।
  • भारत का योगदान: भारत ने इस मंच का उपयोग करते हुए अपने घास के मैदानों और खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के वैज्ञानिक संरक्षण के लिए अपनी पहली मार्गदर्शिका (India First Guide for Open Natural Ecosystems) का आधिकारिक विमोचन किया। 

UNCCD क्या है?

  • परिचय: मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification – UNCCD) या संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन पर्यावरण और विकास को सतत भूमि प्रबंधन से जोड़ने वाला एकमात्र विधिक रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। 
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 1 बिलियन हेक्टेयर क्षरणग्रस्त भूमि के पुनरुद्धार (Global Land Restoration) और सूखा प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाना है।
  • गठन: इसका गठन 1994 में किया गया था, जो 1992 के रियो डी जनेरियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) के दौरान अपनाई गई सिफारिशों का प्रत्यक्ष परिणाम था। 
  • सदस्य देश: 197 पक्षकार (196 देश और यूरोपीय संघ)।
  • संरचना:
    • कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP): यह इस कन्वेंशन का सर्वोच्च नीति-निर्माता शासी निकाय (Governing Body) है, जो इसके कार्यान्वयन की समीक्षा करता है। 
    • सहायक निकाय: इसके अंतर्गत दो मुख्य सहायक समितियां काम करती हैं:
      • CRIC: अभिसमय के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए समिति।
      • CST: विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति, जो तकनीकी नवाचार और डेटा-संचालित नीतियां बनाती है।
  • कार्य एवं शक्तियां:
    • भूमि क्षरण तटस्थता (LDN): इसका मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य 15 (SDG 15.3) के तहत वर्ष 2030 तक भूमि क्षरण तटस्थता (Land Degradation Neutrality) हासिल करना है, ताकि उत्पादक भूमि का शुद्ध नुकसान शून्य हो। 
    • जलवायु लचीलापन (Climate resilience): यह वैश्विक स्तर पर मरुस्थलीकरण (Desertification) और सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करके खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। 
  • राष्ट्रीय कार्य योजनाओं (NAPs) का निर्माण: यह सदस्य देशों को अपने-अपने देश की भौगोलिक स्थिति के अनुसार ‘राष्ट्रीय कार्य योजना’ बनाने और उसे लागू करने में मदद करता है। 
  • सूखा प्रबंधन (Drought Resilience): देशों को सूखे के बाद राहत देने के बजाय, उन्हें पहले से ही ‘प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ (Early Warning Systems) और तैयारी के लिए तैयार करना।
  • वित्तीय संसाधनों को जुटाना (Global Mechanism): इसके तहत बने Global Mechanism (GM) के जरिए विकासशील देशों को भूमि सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय फंड, निजी निवेश और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। 
  • निचले स्तर से शासन (Bottom-up Approach): मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए स्थानीय किसानों, आदिवासियों, चरवाहों और महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाना। 
  • समीक्षा और जवाबदेही की शक्ति: सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी प्रगति रिपोर्ट COP को सौंपें। UNCCD इन रिपोर्टों की जांच करता है और देशों को सुधार के निर्देश देता है।
  • संशोधन और नए नियम बनाने की शक्ति: COP के पास इस समझौते (Convention) के नियमों में बदलाव करने, नए दिशा-निर्देश जोड़ने या क्षेत्रीय क्रियान्वयन के लिए नए एनेक्स (Annexes) पास करने की पूरी शक्ति है।
  • वैश्विक नीतियां तय करना: यह पर्यावरण से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को निर्धारित करता है, जैसे कि सदस्य देशों द्वारा भविष्य के लिए भूमि बहाली (Land Restoration) के संकल्प दिलवाना। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: UNCCD COP17 Mongolia 2026 क्या है?

उत्तर: यह मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे (Land Degradation and Drought) से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के पक्षकारों का 17वां वैश्विक शिखर सम्मेलन है। 

प्रश्न 2: UNCCD COP17 की शुरुआत कब और कहां हुई?

उत्तर: इसकी आधिकारिक शुरुआत 17 अगस्त 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में हुई, जो 28 अगस्त तक चलेगा।

प्रश्न 3: UNCCD COP17 का आयोजन Mongolia में क्यों किया जा रहा है?

उत्तर: मंगोलिया का 77% भूभाग जलवायु परिवर्तन और मरुस्थलीकरण से गंभीर रूप से प्रभावित है, जिससे यह शुष्क भूमि बहाली पर चर्चा का प्रमुख केंद्र है।

प्रश्न 4: UNCCD का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: इसका पूरा नाम मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification) है।

प्रश्न 5: UNCCD COP17 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 1 बिलियन हेक्टेयर क्षरणग्रस्त भूमि के पुनरुद्धार (Global Land Restoration) और सूखा प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाना है।

प्रश्न 6: COP17 में Land Degradation और Desertification पर क्यों चर्चा हो रही है?

उत्तर: क्योंकि वर्तमान में दुनिया की 40% भूमि क्षरणग्रस्त है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता और 3 अरब लोगों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

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