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Ukraine Norway Historic Defence Agreement- दोनों देशों के बीच ‘एलिजाबेथ’ समझौते की घोषणा

Ukraine Norway Historic Defence Agreement- दोनों देशों के बीच ‘एलिजाबेथ’ समझौते की घोषणा

Ukraine Norway Historic Defence Agreement

संदर्भ:

हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कीव में एक ऐतिहासिक यूक्रेन-नॉर्वे रक्षा समझौता (Ukraine Norway Historic Defence Agreement) और ‘एलिजाबेथ’ (या एलिसिव) रणनीतिक साझेदारी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए।

यूक्रेन-नॉर्वे रक्षा समझौता: मुख्य बिंदु 

  • स्थान: इस रक्षा और सुरक्षा सहयोग समझौते पर 23 अगस्त 2026 को यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) में आयोजित नॉर्डिक-बाल्टिक एइट (NB8) शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए. 
  • हस्ताक्षरकर्ता: इस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने आधिकारिक हस्ताक्षर किए. 
  • नामकरण: इस रणनीतिक साझेदारी घोषणापत्र को ‘एलिजाबेथ समझौता’ (Ellisiv Accord) नाम दिया गया है। यह नाम 11वीं शताब्दी के कीव के राजकुमार यारोस्लाव द वाइज की बेटी ‘एलिजाबेथ’ के नाम पर रखा गया है, जो नॉर्वे की रानी बनी थीं। यह दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है। 
  • प्रावधान: 
    • दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धता: नॉर्वे ने यूक्रेन के लिए अपने नानसेन सहायता कार्यक्रम (Nansen Support Programme) के तहत वित्तीय वर्ष 2027 के लिए लगभग 9 बिलियन डॉलर (85 बिलियन नॉर्वेजियन क्रोनर) की भारी-भरकम सहायता बनाए रखने की घोषणा की है।
    • फंड का आवंटन: इस 9 बिलियन डॉलर की सहायता राशि में से 7.5 बिलियन डॉलर सैन्य सहायता (Norway Military Aid Ukraine) के लिए और 1.5 बिलियन डॉलर नागरिक व मानवीय सहायता के लिए आवंटित किए जाएंगे।
    • ड्रोन डील प्रारूप (Drone Deal Format): यह समझौता मुख्य रूप से ‘ड्रोन डील’ ढांचे के तहत हस्ताक्षरित किया गया है। इसके अंतर्गत दोनों देश ड्रोन और स्वायत्त प्रौद्योगिकियों (Autonomous Technologies) के सह-विकास और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देंगे।
    • तकनीकी विनिमय और युद्ध अनुभव साझा करना: यूक्रेन अपने युद्धकालीन जमीनी अनुभवों (Wartime Combat Experience), डेटा और परिचालन अंतर्दृष्टि को नॉर्वे के साथ साझा करेगा। इसके बदले नॉर्वे यूक्रेन को उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों (Advanced Air Defence) और विनिर्माण विशेषज्ञता प्रदान करेगा। 
  • बहुआयामी क्षेत्र: यह रक्षा साझेदारी (Ukraine Defence Partnership) तीन प्रमुख युद्धक्षेत्रीय डोमेन को कवर करती है:
  • हवाई क्षेत्र (Air Domain): उन्नत वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों (जैसे NASAMS) का एकीकरण और यूक्रेनी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा.
  • समुद्री क्षेत्र (Maritime Domain): काला सागर (Black Sea) और आज़ोव सागर में यूक्रेन की समुद्री क्षमताओं और रसद (Logistics) को मजबूत करना. 
  • भूमि और ऊर्जा क्षेत्र: अग्रिम पंक्ति पर रसद आपूर्ति और रूस द्वारा लक्षित यूक्रेन के गंभीर बुनियादी ऊर्जा ढांचे (Critical Energy Infrastructure) की सुरक्षा व पुनर्निर्माण।
  • आवश्यकता:
    • रूस के खिलाफ दीर्घकालिक प्रतिरोध: यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) के एक लंबे खिंचते संघर्ष में बदलने के कारण यूक्रेन को गोला-बारूद और तकनीकी हथियारों की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता है।
    • यूक्रेन के रक्षा उद्योग का विकास: यह सौदा नॉर्वे के फंड का उपयोग करके स्वयं यूक्रेन के भीतर सैन्य उपकरणों के निर्माण को सक्षम बनाता है, जिससे बाहरी आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) पर निर्भरता कम होगी।
    • नाटो साझेदारी और यूरोपीय सुरक्षा: नॉर्वे एक नाटो सदस्य (Ukraine NATO Partners) है। इस प्रकार के द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते यूक्रेन के भविष्य में नाटो में शामिल होने के मार्ग को प्रशासनिक रूप से सुदृढ़ करते हैं। 
  • महत्व:
    • वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव: यूरोपीय देशों (जैसे नॉर्वे, फिनलैंड, डेनमार्क) द्वारा यूक्रेन के साथ मिलकर संयुक्त ड्रोन उत्पादन करने से वैश्विक स्तर पर मानवरहित युद्ध प्रणालियों (UAVs) के तकनीकी मानकों में तेजी से बदलाव आएगा।
    • रूस-भारत रणनीतिक संतुलन: नॉर्वे और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को लगातार दी जा रही भारी सैन्य सहायता के कारण रूस पर प्रतिबंधों का दबाव बना रहेगा। भारत के लिए रूस के साथ अपने पारंपरिक रक्षा और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ संतुलन साधना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।
    • सैन्य तकनीक: इस समझौते के तहत आधुनिक युद्ध के मैदान पर ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare) के अनुभवों का जो डेटा नॉर्वे को मिलेगा, उसका प्रभाव नाटो की भविष्य की युद्ध रणनीतियों पर पड़ेगा। भारत भी अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा के लिए इन उभरती हुई सैन्य प्रौद्योगिकियों (Emerging Defense Technologies) का बारीकी से अध्ययन कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Ukraine और Norway के बीच Defence Agreement क्या है?

उत्तर: यह ड्रोन डील प्रारूप (Drone Deal Format) के तहत एक दीर्घकालिक सैन्य-तकनीकी समझौता है, जिसमें संयुक्त ड्रोन उत्पादन और वायु रक्षा सहयोग शामिल है।

प्रश्न 2: Ukraine-Norway Defence Deal को ऐतिहासिक क्यों बताया जा रहा है?

उत्तर: इसे ‘एलिजाबेथ समझौता’ (Ellisiv Accord) नाम दिया गया है, जो न केवल वित्तीय वर्ष 2027 के लिए 9 बिलियन डॉलर की सहायता सुनिश्चित करता है बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को जोड़ता है। 

प्रश्न 3: इस Defence Agreement में किन क्षेत्रों पर सहयोग होगा?

उत्तर: इसमें मुख्य रूप से ड्रोन निर्माण, वायु रक्षा प्रणाली (NASAMS), समुद्री सुरक्षा, रसद आपूर्ति और यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे का पुनर्निर्माण शामिल है। 

प्रश्न 4: Norway Ukraine को किस प्रकार की Military Support देगा?

उत्तर: नॉर्वे वर्ष 2027 में लगभग 7.5 बिलियन डॉलर की सीधी सैन्य सहायता प्रदान करेगा, जिसके तहत हथियारों की खरीद और यूक्रेनी रक्षा उद्योगों को वित्तीय अनुदान दिया जाएगा।

प्रश्न 5: क्या इस समझौते में Defence Technology का भी सहयोग शामिल है?

उत्तर: हाँ, इसमें अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों (Defence Technology) का आदान-प्रदान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का सह-विकास शामिल है।

प्रश्न 6: Ukraine और Norway के बीच Security Cooperation क्यों बढ़ रही है?

उत्तर: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय सुरक्षा (European Security) को मजबूत करने और यूक्रेन को नाटो मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए यह सुरक्षा सहयोग (Ukraine Norway Security Cooperation) बढ़ाया जा रहा है।) के प्रशासनिक नियंत्रण में रहकर काम करेगा।

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