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India-Russia Relations – इतिहास, व्यापार, रक्षा, तकनीक एवं रणनीतिक संबंध

India-Russia Relations – इतिहास, व्यापार, रक्षा, तकनीक एवं रणनीतिक संबंध 

India-Russia Relations

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मास्को में 23-24 अगस्त 2026 को रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ IRI-GC-TEC (भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग) के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता की।  

भारत-रूस संबंध (India-Russia Relations): विस्तार से जानिए

  • ऐतिहासिक संबंध: दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंध शीत युद्ध (Cold War) के समय से हैं। वर्ष 1971 की ‘भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि’ (Treaty of Peace, Friendship and Cooperation) ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत की सुरक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
    • वर्ष 2000 में ‘रणनीतिक साझेदारी की घोषणा’ के बाद, वर्ष 2010 में इन द्विपक्षीय संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” (Special and Privileged Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया गया।
  • संस्थागत प्रारूप: द्विपक्षीय वार्ता को सुदृढ़ करने के लिए स्थापित तंत्र इस प्रकार हैं:
  • वार्षिक शिखर सम्मेलन (Annual Summit): यह दोनों देशों के बीच सर्वोच्च संस्थागत तंत्र है, जिसकी कूटनीतिक कमान भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति के हाथों में होती है। 
  • आईआरआईजीसी-टेक (IRIGC-TEC): व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर केंद्रित यह अंतर-सरकारी आयोग आर्थिक नीतियों का मुख्य इंजन है।
  • 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता (2+2 Ministerial Dialogue): दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच रणनीतिक और सैन्य समन्वय को बढ़ावा देने वाला मंच है। 
  • आर्थिक संबंध: वर्ष 2026 के 27वें सत्र में दोनों देशों ने आपसी द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को वर्ष 2030 तक $100 बिलियन (100 अरब डॉलर) तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
    • वर्तमान में भारत रूस से भारी मात्रा में आयात करता है। इस सत्र में भारत ने फार्मास्युटिकल्स (Pharmaceuticals), कृषि उत्पादों और मशीनरी के निर्यात को बढ़ाकर व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) को पाटने पर जोर दिया।
    • पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच दोनों देश रुपी-रूबल भुगतान प्रणाली (Rupee-Ruble Mechanism) और वित्तीय प्रणालियों (जैसे एसबीआई और वीटीबी बैंक) के एकीकरण पर निरंतर कार्य कर रहे हैं। 
  • रक्षा और सैन्य सहयोग: रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा सैन्य उपकरण आपूर्तिकर्ता (Chief Defence Supplier) रहा है। भारतीय सेना के लगभग 60% से अधिक हथियार रूसी मूल के हैं।
    • महत्वपूर्ण रक्षा सौदे (India Russia Defence Deal), इसके अंतर्गत भारत ने S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली (S-400 Triumf), सुखोई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमान और टी-90 टैंक हासिल किए हैं।
    • संयुक्त विनिर्माण और नवाचार: अब यह संबंध ‘क्रेता-विक्रेता’ (Buyer-Seller) मॉडल से आगे बढ़कर संयुक्त विकास की ओर बढ़ चुका है, जैसे ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) परियोजना और उत्तर प्रदेश में AK-203 राइफलों का स्थानीय निर्माण।
    • सैन्य अभ्यास: दोनों सेनाओं के बीच नियमित रूप से त्रि-सेवा अभ्यास ‘इंद्र’ (INDRA) का आयोजन किया जाता है। 
  • ऊर्जा और नागरिक परमाणु सहयोग: 
    • कच्चा तेल व्यापार (India Russia Oil Trade): यूक्रेन संघर्ष के बाद, भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल के आयात को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया, जिससे भारत की घरेलू ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित हुई।
    • नागरिक परमाणु ऊर्जा: तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) का निर्माण रूसी तकनीकी और वित्तीय सहयोग से किया जा रहा है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  • विज्ञान एवं अंतरिक्ष क्षेत्र:
    • अंतरिक्ष कूटनीति: इसरो (ISRO) के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ (Gaganyaan) के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (Gaganauts) को शुरुआती तकनीकी प्रशिक्षण रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में दिया गया था।
    • गहन तकनीक (Deep Tech): दोनों देश क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई, और क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के अन्वेषण में सहयोग बढ़ा रहे हैं। 
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
    • बहुपक्षीय मंच: भारत और रूस संयुक्त राष्ट्र (UN), ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 (G20) जैसे वैश्विक मंचों पर घनिष्ठ समन्वय बनाए रखते हैं।
    • वैश्विक कूटनीति (India Russia Diplomacy): रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का निरंतर समर्थन करता रहा है। वहीं भारत ने यूक्रेन संकट पर पश्चिमी दबाव के बावजूद एक स्वतंत्र और तटस्थ विदेश नीति अपनाई है। 

रूस भारत के लिए क्यों मायने रखता है?

  • भू-राजनीतिक संतुलन (Geopolitical Balancing): चीन और पाकिस्तान के आर्थिक-सैन्य गठजोड़ के बीच, रूस के साथ मजबूत संबंध भारत को यूरेशियाई क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की शक्ति देते हैं।
  • ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा: रियायती तेल के अलावा, रूस भारत को उर्वरकों (Fertilizers) का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, जो भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए जीवन रेखा है।
  • तकनीकी संप्रभुता: परमाणु और रक्षा के क्षेत्र में रूस ने भारत को ऐसी संवेदनशील तकनीकें हस्तांतरित की हैं जो पश्चिमी देश साझा करने से कतराते हैं (जैसे परमाणु संचालित पनडुब्बी लीज)।
  • कनेक्टिविटी कॉरिडोर: भारत अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक पूर्वी समुद्री गलियारे (Eastern Maritime Corridor) के माध्यम से रूस के संसाधन-समृद्ध सुदूर पूर्व (Russian Far East) क्षेत्र तक अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत-रूस संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: यह संबंध भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा आत्मनिर्भरता, यूरेशिया में भू-राजनीतिक संतुलन और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 2: India Russia Strategic Partnership क्या है?

उत्तर: यह वर्ष 2010 में स्थापित “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” है, जो राजनीति, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और आतंकवाद विरोध पर केंद्रित है। 

प्रश्न 3: भारत और रूस के बीच Defence Cooperation कैसा है?

उत्तर: यह सैन्य संबंध पारंपरिक ‘क्रेता-विक्रेता’ मॉडल से उन्नत होकर संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के आधुनिक युग में प्रवेश कर चुका है।

प्रश्न 4: India Russia Trade Relations में कौन से प्रमुख क्षेत्र हैं?

उत्तर: इसके प्रमुख क्षेत्रों में कच्चा तेल, हाइड्रोकार्बन, परमाणु तकनीक, उर्वरक, रत्न-आभूषण, फार्मास्युटिकल्स और रक्षा उपकरण शामिल हैं। 

प्रश्न 5: भारत रूस से कौन-कौन से प्रमुख Products Import करता है?

उत्तर: भारत मुख्य रूप से खनिज तेल (क्रूड ऑयल), सैन्य हथियार और हार्डवेयर, उर्वरक, कोयला और कीमती धातुएं आयात करता है।

प्रश्न 6: India Russia Energy Cooperation क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह सहयोग भारत को वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध कराता है तथा कुडनकुलम जैसे परियोजनाओं से स्वच्छ परमाणु ऊर्जा सुनिश्चित करता है।

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