Apni Pathshala

Mayun Island: भौगोलिक अवस्थिति, विशेषताएं, इतिहास एवं रणनीतिक महत्व

Mayun Island: भौगोलिक अवस्थिति, विशेषताएं, इतिहास एवं रणनीतिक महत्व

Mayun Island

संदर्भ:

हाल ही में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर संकट (Yemen Red Sea Crisis) के बीच एक बड़े सैन्य अभियान के तहत रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मयून द्वीप (Mayun Island) पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया। 

मयून द्वीप: भौगोलिक अवस्थिति, विशेषताएं, इतिहास एवं रणनीतिक महत्व:

  • अवस्थिति: मयून द्वीप, जिसे पेरिम द्वीप (Perim Island) भी कहा जाता है, लाल सागर (Red Sea) के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित यमन के अधिकार क्षेत्र वाला एक रणनीतिक ज्वालामुखी द्वीप (Volcanic Island) है।
    • यह द्वीप बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) के ठीक बीच में स्थित है और इस संकरे जलमार्ग को दो प्रमुख चैनलों में विभाजित करता है:
      • पश्चिमी चैनल (दफ्त-एल-मयून): यह लगभग 26 किलोमीटर (16 मील) चौड़ा और 200 मीटर गहरा है। अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक और बड़े जहाजों का नौवहन मुख्य रूप से इसी चैनल से होता है।
      • पूर्वी चैनल (बाब इस्कंदर): यह केवल 3 किलोमीटर (2 मील) चौड़ा और काफी उथला (लगभग 30 मीटर) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से स्थानीय छोटी नौकाओं द्वारा किया जाता है।
  • सीमाएं: इसके पूर्व में यमन की मुख्य भूमि का तट (धुबाब जिला) और पश्चिम में हॉर्न ऑफ अफ्रीका के देश जिबूती और इरिट्रिया स्थित हैं। 
  • विशेषताएं: यह एक अत्यंत छोटा और पथरीला द्वीप है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 13 वर्ग किलोमीटर (5 वर्ग मील) है।
    • इसकी लंबाई लगभग 4.5 किमी और चौड़ाई 2.5 किमी है। 
    • इसकी अधिकतम ऊंचाई समुद्र तल से 214 फीट (65 मीटर) है, जो इसके अधिभोगी को पूरे जलडमरूमध्य पर नजर रखने के लिए एक प्राकृतिक वॉचटावर (Watchtower) प्रदान करती है। 
    • इसके दक्षिण-पश्चिमी छोर पर एक प्राकृतिक बंदरगाह (Harbor) और उत्तर में एक सैन्य हवाई पट्टी (Airfield) स्थित है।
  • इतिहास: स्वेज नहर (Suez Canal) के निर्माण (1869) से पहले ही इस द्वीप का रणनीतिक महत्व रेखांकित हो चुका था।
    • फ्रांस द्वारा स्वेज नहर बनाने के कदमों को देखते हुए, ब्रिटेन ने 1857 में इस द्वीप पर कब्जा कर लिया और यहाँ एक नौसैनिक कोलिंग स्टेशन (Coaling Station) स्थापित किया, जो 1935 तक वैश्विक जहाजों के लिए ईंधन भरने का मुख्य केंद्र रहा।
    • राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से यह द्वीप यमन के ताइज़ प्रांत (Taiz Governorate) के ‘धुबाब जिले’ (Bab al-Mandab District) के अंतर्गत आता है। 
    • 1967 में स्वतंत्र यमन का हिस्सा बनने के बाद से इस पर यमन सरकार का नियंत्रण था। यमन गृहयुद्ध के दौरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस द्वीप पर एक आधुनिक सैन्य एयरबेस का निर्माण किया था, लेकिन जनवरी 2026 में संयुक्त अरब अमीरात की सेना की वापसी (Military Withdrawal) के बाद यह यमन की आधिकारिक सरकार के पास था, जिससे अब हूती बलों ने इसे छीन लिया है। 

मयून द्वीप का रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व:

  • वैश्विक व्यापार का प्रवेश द्वार (Chokepoint Command): मयून द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री चोकपॉइंट्स (Maritime Chokepoints) में से एक, बाब अल-मंडेब पर सीधा नियंत्रण प्रदान करता है।
    • दुनिया का लगभग 12% वैश्विक व्यापार और कुल पेट्रोलियम जहाजों का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा (Threat to Energy Security): मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण जब ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) आंशिक रूप से प्रभावित हुआ, तब सऊदी अरब ने अपने कच्चे तेल के निर्यात को लाल सागर मार्गों पर डायवर्ट कर दिया था।
    • मयून द्वीप पर हूती नियंत्रण से सऊदी अरब के तेल टैंकरों और पश्चिमी देशों के वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Shipping) पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का जोखिम चरम पर पहुँच गया है।
  • रूट डायवर्जन और वैश्विक मुद्रास्फीति: इस द्वीप से होने वाले खतरों के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियों को लाल सागर के बजाय अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ (Cape of Good Hope) का चक्कर लगाकर लंबा रास्ता चुनना पड़ रहा है।
    • इससे यात्रा के समय में 10 से 14 दिनों की वृद्धि और परिवहन लागत (Freight Cost) में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित कर वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) को बढ़ावा दे रही है।
  • क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Regional Balance of Power): इस द्वीप पर नियंत्रण के माध्यम से ईरान के हूती सहयोगियों को लाल सागर और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) के जंक्शन पर एक अभेद्य सैन्य गढ़ मिल गया है। यह लाल सागर में तैनात अमेरिकी (US Navy) और संबद्ध देशों के नौसैनिक टास्क फोर्स के लिए एक गंभीर चुनौती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मयून द्वीप कहां स्थित है?

उत्तर: यह द्वीप लाल सागर (Red Sea) के दक्षिणी छोर पर, यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के बीच बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के ठीक मध्य में स्थित है। 

प्रश्न 2: Mayun Island को Perim Island क्यों कहा जाता है?

उत्तर: ‘मयून’ इसका स्थानीय अरबी नाम है, जबकि ब्रिटिश औपनिवेशिक काल और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मानचित्रों में इसे पेरिम द्वीप (Perim Island) के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3: मयून द्वीप किस देश के अधिकार क्षेत्र में आता है?

उत्तर: भौगोलिक और कानूनी रूप से यह द्वीप यमन (Yemen) के संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा है और प्रशासनिक रूप से ताइज़ गवर्नरशिप के अंतर्गत आता है।

प्रश्न 4: Perim Island का Bab el-Mandeb Strait में क्या strategic importance है?

उत्तर: यह जलडमरूमध्य के सबसे संकरे बिंदु पर स्थित होने के कारण, पूरे लाल सागर और स्वेज नहर व्यापार मार्ग को नियंत्रित करने या अवरुद्ध करने की क्षमता रखता है। 

प्रश्न 5: Houthi control से Perim Island की importance क्यों बढ़ गई है?

उत्तर: हूतियों के नियंत्रण से यह द्वीप एक सक्रिय सैन्य प्रेशर पॉइंट (Pressure Point) बन गया है, जिससे वे लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।

प्रश्न 6: Mayun Island से Red Sea shipping पर क्या असर पड़ सकता है?

उत्तर: सुरक्षा जोखिमों के कारण वैश्विक जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समुद्री माल ढुलाई दरें (Freight Rates) महंगी हो रही हैं और वैश्विक व्यापार धीमा पड़ रहा है।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top