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Tulu Language Karnataka- जानिए तुलु भाषा के बारे में जो कर्नाटक की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा बनी

Tulu Language Karnataka- जानिए तुलु भाषा के बारे में जो कर्नाटक की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा बनी

Tulu Language Karnataka

संदर्भ:

हाल ही में कर्नाटक मंत्रिमंडल (Karnataka Cabinet) ने तटीय जिलों दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में बोली जाने वाली जनभाषा तुलु (Tulu) को क्षेत्र की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा (Second Additional Administrative Language) के रूप में आधिकारिक मंजूरी दे दी।

तुलु भाषा के बारे में:

  • परिचय: तुलु भाषा मुख्य रूप से दक्षिण भारत की एक प्राचीन द्रविड़ भाषा (Dravidian Language) है। यह द्रविड़ परिवार की पांच प्रमुख विकसित भाषाओं (पंच द्रविड़: तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और तुलु) में से एक मानी जाती है। 
  • भाषाई विशिष्टता: यह भाषा लगभग 2,300 से 2,600 वर्ष पुरानी मानी जाती है। भाषाई शोधकर्ताओं के अनुसार, यह द्रविड़ परिवार की कुछ सबसे प्राचीन विशेषताओं को आज भी अपने मूल रूप में संजोए हुए है।
  • विस्तार:
    • तुलु नाडु (Tulu Nadu): जिस भौगोलिक क्षेत्र में यह भाषा बहुतायत में बोली जाती है, उसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ‘तुलु नाडु’ कहा जाता है। 
    • प्रमुख जिले: यह मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय जिलों—दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) और उडुपी (Udupi) तथा पड़ोसी राज्य केरल के उत्तरी छोर पर स्थित कासरगोड (Kasaragod) जिले में बोली जाती है। इसके अलावा चिक्कमगलूरु और शिवमोग्गा के कुछ हिस्सों में भी इसका विस्तार है। 
  • जनसंख्या: 2011 की राष्ट्रीय जनगणना (2011 Census) के अनुसार, भारत में तुलु को मातृभाषा के रूप में बोलने वाले मूल निवासियों की संख्या 18.4 लाख से अधिक थी।
  • लिपि का इतिहास:
    • तुलु-तिगलारी लिपि (Tulu-Tigalari Script): आम धारणा के विपरीत, तुलु केवल एक मौखिक भाषा नहीं है। इसकी अपनी एक समृद्ध ऐतिहासिक लिपि है जिसे तुलु-तिगलारी लिपि कहा जाता है। 14वीं-15वीं शताब्दी के कई प्राचीन शिलालेख और ताड़ के पत्ते के ग्रंथ इसी लिपि में पाए गए हैं।
    • आधुनिक माध्यम: वर्तमान समय में व्यावहारिक और मुद्रण की सुगमता के लिए तुलु भाषा को लिखने के लिए व्यापक रूप से कन्नड़ लिपि (Kannada Script) का उपयोग किया जाता है।
  • सांस्कृतिक महत्व:
    • भूत कोला (Bhootakola): यह तुलु नाडु की एक प्रसिद्ध धार्मिक और लोक नृत्य परंपरा है, जिसमें स्थानीय देवों (दैव) की पूजा की जाती है। (फिल्म ‘कांतारा’ में इसी संस्कृति को दिखाया गया है)।
    • यक्षगान (Yakshagana): हालांकि यह कन्नड़ में भी लोकप्रिय है, लेकिन तुलु नाडु में ‘तुलु यक्षगान’ (पारंपरिक नाट्य नृत्य) के नाटक बहुत प्रसिद्ध हैं।
    • कंबला (Kambala): कीचड़ भरे खेतों में होने वाली पारंपरिक भैंसों की दौड़, जो तुलु संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा है।
  • प्रशासनिक निर्णय: मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अगुवाई में कैबिनेट ने शिक्षाविद् एम. मोहन अल्वा समिति (2023 की रिपोर्ट) की सिफारिशों के आधार पर इस भाषा को दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा की मंजूरी मिली।
    • कर्नाटक सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में तुलु के आधिकारिक उपयोग, अनुवाद (Translation) और सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण (Training) के लिए ₹82 लाख का वार्षिक कोष आवंटित किया है।
संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 345 (Article 345) राज्य विधानमंडलों को यह विधिक अधिकार देता है कि वे राज्य में उपयोग होने वाली किसी भी एक या अधिक स्थानीय भाषाओं को आधिकारिक प्रशासनिक कार्यों के लिए विधिक रूप से अपना सकते हैं।

इसका महत्व:

  • सांस्कृतिक अस्मिता का संरक्षण: पिछले 70 वर्षों से स्थानीय समुदाय तुलु को आधिकारिक मान्यता देने की मांग कर रहा था। इस निर्णय से तटीय कर्नाटक (Coastal Karnataka) की अनूठी लोक परंपराओं जैसे—यक्षगान (Yakshagana), भूत कोला (Bhuta Kola) और पाड्डनास (मौखिक महाकाव्य) को संस्थागत संरक्षण मिलेगा।
  • प्रशासनिक सुगमता और समावेशिता: दक्षिण कन्नड़ और उडुपी (Tulu in Udupi Dakshina Kannada) के जिला-स्तरीय सरकारी कार्यालयों, स्थानीय निकायों और अदालतों में सार्वजनिक आवेदनों, सूचनाओं और संचार के लिए तुलु का उपयोग संभव होगा। इससे ग्रामीण आबादी और प्रशासन के बीच की दूरी कम होगी।
  • आठवीं अनुसूची की मांग को बल: तुलु भाषा को अभी तक भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में शामिल नहीं किया गया है (जिसमें वर्तमान में 22 भाषाएं हैं)। राज्य सरकार द्वारा इसे प्रशासनिक दर्जा (Tulu Administrative Status) दिए जाने के बाद, केंद्र सरकार पर इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का राजनीतिक और नैतिक दबाव बढ़ेगा। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Tulu language क्या है?

उत्तर: तुलु मुख्य रूप से दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक और केरल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली एक अत्यंत प्राचीन द्रविड़ भाषा (Dravidian Language) है।

प्रश्न 2: Karnataka में Tulu को कौन सा administrative status मिला है?

उत्तर: कर्नाटक सरकार ने इसे राज्य के दो विशिष्ट तटीय जिलों के लिए दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा (Second Additional Administrative Language) का आधिकारिक दर्जा दिया है। 

प्रश्न 3: Tulu किन districts में additional administrative language होगी?

उत्तर: यह विधिक दर्जा विशेष रूप से कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) और उडुपी (Udupi) जिलों में लागू किया गया है।

प्रश्न 4: Tulu language मुख्य रूप से कहाँ बोली जाती है?

उत्तर: यह भाषा मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय क्षेत्र (तुलु नाडु) और केरल के कासरगोड जिले में रहने वाले तुलु भाषी समुदाय द्वारा बोली जाती है।

प्रश्न 5: Udupi और Dakshina Kannada में Tulu का क्या महत्व है?

उत्तर: इन जिलों में तुलु जनभावना, दैनिक जनजीवन और स्थानीय संस्कृति (जैसे भूत कोला व लोक कलाओं) की मूल पहचान (Tuluva Pride) है।

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