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Hepatitis Elimination India 2030- भारत का 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य, जानिए हेपेटाइटिस के बारे में

Hepatitis Elimination India 2030- भारत का 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य, जानिए हेपेटाइटिस के बारे में

Hepatitis Elimination India 2030

संदर्भ:

हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान भारत ने वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य (Hepatitis Elimination India 2030) हासिल करने की अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराया। 

हेपेटाइटिस के बारे में:

  • परिचय: हेपेटाइटिस (Hepatitis) का सरल अर्थ है ‘यकृत (Liver) की सूजन’। यह मुख्य रूप से वायरल संक्रमण (Viral Infection) के कारण होता है, लेकिन अत्यधिक शराब के सेवन, कुछ विशिष्ट दवाओं, विषाक्त पदार्थों और ऑटोइम्यून विकारों के कारण भी हो सकता है।
    • यकृत हमारे शरीर में चयापचय (Metabolism), विषहरण (Detoxification) और आवश्यक प्रोटीन के निर्माण के लिए जिम्मेदार अंग है।
  • प्रकार: मानव शरीर को प्रभावित करने वाले हेपेटाइटिस वायरस मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं:
  • हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A): यह मुख्य रूप से दूषित भोजन और जल (Contaminated Food and Water) के सेवन से फैलता है। यह एक तीव्र (Acute) लेकिन आमतौर पर अल्पकालिक संक्रमण है। इसके लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है।
  • हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B): यह एक गंभीर रक्त-जनित (Blood-borne) वायरस है। यह संक्रमित रक्त के आदान-प्रदान, असुरक्षित यौन संपर्क, दूषित सुइयों और प्रसव के दौरान माँ से बच्चे में (Mother-to-Child Transmission) फैलता है।
    • यह क्रॉनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर (Liver Cancer) का कारण बन सकता है। इसके लिए 1980 के दशक से प्रभावी टीका उपलब्ध है।
  • हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C): यह भी संक्रमित रक्त के सीधे संपर्क से फैलता है। हेपेटाइटिस बी की तरह यह भी क्रॉनिक संक्रमण (Chronic Infection), सिरोसिस (Cirrhosis) और यकृत विफलता का कारण बनता है।
    • हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह आधुनिक एंटीवायरल दवाओं (Antiviral Medications) से पूरी तरह ठीक हो सकता है। 
  • हेपेटाइटिस डी (Hepatitis D): यह एक अनूठा वायरस है जो केवल उन व्यक्तियों को संक्रमित करता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हैं। यह दोहरे संक्रमण के कारण यकृत की स्थिति को अधिक गंभीर बना देता है।
  • हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E): हेपेटाइटिस ए की तरह, यह भी दूषित पानी के माध्यम से फैलता है और आमतौर पर तीव्र संक्रमण का कारण बनता है। गर्भवती महिलाओं में यह संक्रमण अधिक घातक साबित हो सकता है। 
  • सामान्य लक्षण: शुरुआती चरणों में यह बीमारी अक्सर लक्षणहीन (Asymptomatic) होती है। गंभीर स्थितियों में निम्नलिखित लक्षण (Hepatitis Symptoms) दिखाई देते हैं:
  • अत्यधिक थकान और कमजोरी
  • त्वचा और आँखों का पीला होना (पीलिया या Jaundice)
  • गहरे रंग का मूत्र और हल्के रंग का मल
  • पेट में दर्द (विशेष रूप से दाहिनी ओर यकृत के ऊपर)
  • मतली, उल्टी और भूख में कमी
  • उपाय: इससे बचने के लिए समय पर टीकाकरण (Hepatitis Prevention), सुरक्षित रक्त आधान और स्वच्छता आवश्यक है।

भारत सरकार की परियोजनाएं और कार्यान्वयन रणनीतियाँ:

  • राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP): इस जन-केंद्रित कार्यक्रम को भारत सरकार द्वारा जुलाई 2018 में लॉन्च किया गया था।
    • इसका प्राथमिक लक्ष्य सतत विकास लक्ष्य-3.3 (SDG 3.3) के अनुरूप वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस सी का पूर्ण उन्मूलन और हेपेटाइटिस बी के प्रसार को न्यूनतम करना है।
    • इस कार्यक्रम (NVHCP India) के तहत देश के सभी जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (Ayushman Arogya Mandir) पर मुफ्त स्क्रीनिंग, निदान और जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 
  • सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme): भारत सरकार ने हेपेटाइटिस बी के टीके को अपने राष्ट्रीय सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल किया है।
    • इसके तहत नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर ‘बर्थ डोज’ (Birth Dose) देना अनिवार्य किया गया है, जिसकी वर्तमान राष्ट्रीय कवरेज 92% से अधिक हो चुकी है। 
    • इसके बाद 6, 10 और 14वें सप्ताह पर अतिरिक्त खुराकें दी जाती हैं।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण: कार्यक्रम की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत निम्नलिखित रणनीतिक जुड़ाव किए गए हैं:
  • मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा: सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव-पूर्व अनिवार्य हेपेटाइटिस बी जांच (Antenatal Screening) की जाती है।
  • सुरक्षित रक्त आधान: देश के सभी ब्लड बैंकों में रक्त चढ़ाने से पहले हेपेटाइटिस बी और सी की अनिवार्य न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (NAT) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • उच्च जोखिम समूहों पर ध्यान: राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के साथ मिलकर सुई साझा करने वाले नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं (IDUs) के बीच विशेष स्क्रीनिंग और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
  • डिजिटल ट्रैकिंग और वर्तमान प्रगति: सरकार डेटा प्रबंधन के लिए पेपरलेस NVHCP-MIS पोर्टल और वेब रजिस्ट्री का उपयोग कर रही है।
    • सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 22.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 1,153 से अधिक विशेष उपचार केंद्रों के माध्यम से 6.12 लाख से अधिक मरीजों को मुफ्त एंटीवायरल उपचार दिया जा चुका है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Hepatitis क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?

उत्तर: हेपेटाइटिस यकृत (Liver) की सूजन को कहते हैं। वायरस के आधार पर यह मुख्य रूप से पांच प्रकार (A, B, C, D और E) का होता है।

प्रश्न 2: India ने 2030 तक Hepatitis elimination का target क्यों रखा है?

उत्तर: भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 3.3 (SDG 3.3) के प्रति अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को पूरा करने और देश को लिवर कैंसर के बढ़ते बोझ से बचाने के लिए यह लक्ष्य रखा है। 

प्रश्न 3: Hepatitis B और Hepatitis C में क्या अंतर है?

उत्तर: हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B India) के लिए टीका उपलब्ध है लेकिन यह पूरी तरह लाइलाज माना जाता है, जबकि हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका नहीं है परंतु यह एंटीवायरल दवाओं से पूरी तरह ठीक (Curable) हो सकता है। 

प्रश्न 4: Hepatitis के common symptoms क्या होते हैं?

उत्तर: इसके सामान्य लक्षणों (Hepatitis Symptoms) में अत्यधिक थकान, त्वचा और आँखों का पीला होना (पीलिया), पेट में तेज दर्द, मतली और गहरे रंग का मूत्र शामिल हैं।

प्रश्न 5: Hepatitis कैसे फैलता है और इससे कैसे बचें?

उत्तर: प्रकार A और E दूषित भोजन/पानी से तथा B और C संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुइयों और असुरक्षित यौन संबंधों से फैलते हैं। इससे बचने के लिए समय पर टीकाकरण (Hepatitis Prevention), सुरक्षित रक्त आधान और स्वच्छता आवश्यक है।

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