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Anti-Dumping Duty: परिचय, कार्यान्वयन, विशेषताएं एवं महत्व 

Anti-Dumping Duty: परिचय, कार्यान्वयन, विशेषताएं एवं महत्व 

Anti-Dumping Duty

संदर्भ:

राजस्व विभाग (वित्त मंत्रालय) ने चीन से आयातित या निर्यात किए जाने वाले ‘डेकोर पेपर’ (सजावटी कागज) पर डंपिंग रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) की अवधि बढ़ाकर 26 मार्च 2027 तक किया।

डंपिंग रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty): 

  • परिचय: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में निष्पक्षता और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डंपिंग रोधी शुल्क एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
  • डंपिंग रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) संप्रभु सरकार द्वारा डंप किए गए विदेशी आयात पर लगाया जाने वाला एक संरक्षणवादी टैरिफ (Protectionist Tariff) है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में अनुचित मूल्य निर्धारण के कारण होने वाली विकृति को समाप्त करना और स्थानीय निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है।
      • जब कोई देश या विदेशी निर्यातक किसी वस्तु को अपने घरेलू बाजार मूल्य (Normal Value) से काफी कम कीमत पर दूसरे देश में निर्यात करता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इस प्रक्रिया को डंपिंग (Dumping in International Trade) कहा जाता है।
        • यह एक अनुचित व्यापार प्रथा है, जिसका उद्देश्य विदेशी बाजारों पर कब्जा करना होता है।
  • कानूनी ढांचा:
    • वैश्विक मूल (Global Origin): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कानून विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सिद्धांतों के अधीन है। यह मुख्य रूप से टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT 1994) के अनुच्छेद VI और डब्लूटीओ डंपिंग रोधी नियमों (WTO Anti-Dumping Rules) पर आधारित है। 
    • भारतीय वैधानिक आधार (Statutory Basis in India): भारत में इसे सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की धारा 9A (Section 9A of Customs Tariff Act, 1975) के तहत प्रशासित किया जाता है।
      • इसके साथ ही ‘सीमा शुल्क टैरिफ (डंप की गई वस्तुओं की पहचान, मूल्यांकन और संग्रह तथा क्षति निर्धारण) नियम, 1995′ (Anti-Dumping Rules India) प्रभावी हैं।
  • संस्थागत संरचना: भारत में डंपिंग रोधी शुल्क के निर्धारण और कार्यान्वयन के लिए दो प्रमुख मंत्रालय मिलकर काम करते हैं:
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry): इसके अंतर्गत आने वाला व्यापार उपचार महानिदेशालय (Directorate General of Trade Remedies – DGTR) डंपिंग रोधी जांच (Anti-Dumping Investigation) के लिए सर्वोच्च नोडल एजेंसी है।
  • डीजीटीआर की भूमिका (DGTR Trade Remedies): घरेलू उद्योगों की शिकायतों के आधार पर या स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर डीजीटीआर जांच शुरू करता है। यदि जांच में डंपिंग से घरेलू उद्योग को वास्तविक क्षति होना सिद्ध होता है, तो डीजीटीआर शुल्क लगाने की सिफारिश करता है।
  • वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance): वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग (Department of Revenue) डीजीटीआर की सिफारिशों के आधार पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की अंतिम अधिसूचना (Notification) जारी करता है। सिफारिश के बाद शुल्क को लागू (Levy) करने का अंतिम अधिकार इसी मंत्रालय के पास है।
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया: डीजीटीआर द्वारा डंपिंग रोधी जांच निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:
  • शिकायत दर्ज करना: घरेलू उद्योग (Domestic Industry) साक्ष्यों के साथ डीजीटीआर के पास डंपिंग की लिखित शिकायत दर्ज करता है।
  • सत्यापन और साक्ष्य: महानिदेशालय आयात मात्रा में वृद्धि, आयातित वस्तुओं के मूल्य और घरेलू उद्योग की उत्पादन लागत का सूक्ष्म विश्लेषण करता है।
  • अंतिम निष्कर्ष और कार्यान्वयन: डंपिंग मार्जिन (Dumping Margin – सामान्य मूल्य और निर्यात मूल्य के बीच का अंतर) की गणना की जाती है। यदि सकारात्मक क्षति पाई जाती है, तो वित्त मंत्रालय अधिसूचना जारी कर शुल्क लगाता है।
  • सनसेट रिव्यू (Sunset Review): सामान्यतः यह शुल्क 5 वर्ष के लिए लगाया जाता है। लेकिन, इस अवधि की समाप्ति से पहले डीजीटीआर यह जांचने के लिए सनसेट रिव्यू (Sunset Review Investigation) शुरू कर सकता है कि क्या शुल्क हटाने से डंपिंग दोबारा शुरू हो सकती है। 
  • विशेषताएं:
    • यह सीमा शुल्क (Customs Duty) से भिन्न है: सीमा शुल्क एक राजस्व उत्पादक कर है जो सभी आयातों पर सामान्य रूप से लगता है। इसके विपरीत, एंटी-डंपिंग ड्यूटी केवल उन विशिष्ट वस्तुओं और देशों पर लगाई जाती है जो अनुचित व्यापार प्रथा (डंपिंग) में शामिल हैं।
    • लचीली शुल्क संरचना (Flexible Structure): यह शुल्क प्रति टन एक निश्चित डॉलर राशि (Specific Duty) या आयातित वस्तु के मूल्य के प्रतिशत (Ad-valorem) के रूप में लगाया जा सकता है।
    • गैर-भेदभावपूर्ण लेकिन लक्षित: यह डब्लूटीओ के नियमों के तहत न्यायसंगत है क्योंकि यह किसी देश के खिलाफ मनमाना टैरिफ नहीं है, बल्कि घरेलू बाजार में ‘समान अवसर’ (Level Playing Field) प्रदान करने का विधिक उपाय है।
  • मामले:
    • डेकोर पेपर मामला (Decor Paper): सितंबर 2026 में, वित्त मंत्रालय ने चीन से आयातित ‘डेकोर पेपर’ (सजावटी कागज) पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि को बढ़ाकर 26 मार्च 2027 तक कर दिया है ताकि घरेलू लामिनेट्स उद्योग सुरक्षित रहे।
    • एल्युमिनियम फॉयल (Aluminium Foil): डीजीटीआर ने चीन, थाईलैंड और मलेशिया से आयातित एल्युमिनियम फॉयल पर भी घरेलू उद्योग की सुरक्षा (Domestic Industry Protection) के लिए 5 वर्ष के विस्तार की सिफारिश की है।
    • पीवीसी पेस्ट रेजिन (PVC Paste Resin): चीन, कोरिया और ताइवान जैसे देशों से होने वाले सस्ते आयात को रोकने के लिए भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी प्रभावी की गई है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व:

  • घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: यह ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल को चीनी और अन्य विदेशी डंपिंग के दुष्प्रभावों से बचाकर घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करता है।
  • रोजगार की सुरक्षा: सस्ते आयात के कारण यदि घरेलू फैक्ट्रियां बंद होती हैं, तो बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलती है। यह शुल्क स्थानीय व्यवसायों को बचाकर नौकरियों का संरक्षण करता है।
  • बाजार एकाधिकार पर रोक: विदेशी कंपनियां शुरुआत में अत्यधिक कम कीमतों पर सामान बेचकर घरेलू प्रतिस्पर्धा को समाप्त कर देती हैं और बाद में एकाधिकार (Monopoly) स्थापित कर कीमतें बढ़ा देती हैं। एंटी-डंपिंग इस कूटनीति को विफल करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Anti-Dumping Duty क्या है?

उत्तर: यह डंप किए गए सस्ते विदेशी आयातों पर सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक सुधारात्मक व्यापार टैरिफ (Protectionist Tariff) है, जो घरेलू बाजार को संतुलित करता है।

प्रश्न 2: भारत में Anti-Dumping Duty क्यों लगाई जाती है?

उत्तर: विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय बाजार में उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे सामान से घरेलू उद्योगों की रक्षा (Domestic Industry Protection) करने हेतु इसे लगाया जाता है।

प्रश्न 3: Dumping क्या होती है?

उत्तर: जब कोई देश अपने घरेलू बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर किसी वस्तु को दूसरे देश में निर्यात करता है, तो उसे डंपिंग (Dumping) कहते हैं।

प्रश्न 4: Anti-Dumping Duty और Customs Duty में क्या अंतर है?

उत्तर: सीमा शुल्क (Customs Duty) सामान्य राजस्व और आयात नियंत्रण के लिए सभी आयातों पर लगता है, जबकि एंटी-डंपिंग ड्यूटी केवल अनुचित मूल्य वाले डंप आयात पर ही लक्षित होती हैं।

प्रश्न 5: भारत में Anti-Dumping Investigation कौन करता है?

उत्तर: भारत में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाला व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) डंपिंग रोधी जांच प्रक्रिया को संपन्न करता है। 

प्रश्न 6: DGTR का Anti-Dumping Duty में क्या role है?

उत्तर: डीजीटीआर (DGTR) डंपिंग के साक्ष्यों की प्रामाणिक जांच करता है और वास्तविक क्षति पाए जाने पर वित्त मंत्रालय को शुल्क लगाने की सिफारिश देता है।

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