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UN Declaration on Sea Level Rise, 81वीं UNGA मे सर्वसम्मति से अपनाया गया

UN Declaration on Sea Level Rise, 81वीं UNGA मे सर्वसम्मति से अपनाया गया

UN Declaration on Sea Level Rise

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (81st UN General Assembly) के दौरान वैश्विक नेताओं ने समुद्र के जलस्तर पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (UN Declaration on Sea Level Rise) को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा 2026 के बारे में:

  • परिचय: UN Declaration on Sea Level Rise सर्वसम्मति पर आधारित अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घोषणा (Political Declaration) है।
    • इसमें जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र के जलस्तर (Rising Sea Levels) से उत्पन्न होने वाली संप्रभुता, कानूनी अधिकारों और मानव अधिकारों की चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक सिद्धांत स्थापित किए गए है।
  • संस्था: इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के तत्वावधान में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में अपनाया गया।
  • सह-प्रवर्तक देश: आम सहमति को बनाने की वार्ता प्रक्रिया का नेतृत्व संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया (Australia) और केप वर्डे (Cabo Verde) द्वारा किया गया था।
    • इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका (US) सहित संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने साझा पाठ पर सहमति जताई।
  • प्रमुख बिंदु:
    • निरंतर राज्यत्व की मान्यता (Presumption of Continued Statehood): यदि कोई छोटा द्वीप देश बढ़ते समुद्र के कारण पूरी तरह से जलमग्न (Submerged) हो जाता है, तब भी उसकी संप्रभुता (Sovereignty), राज्य का दर्जा और संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता (UN Membership) कानूनी रूप से समाप्त नहीं होगी।
    • समुद्री सीमाओं का स्थिरीकरण (Stability of Maritime Baselines): संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत स्थापित देशों के क्षेत्रीय जल और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) स्थायी रहेंगे। तटरेखा के पीछे खिसकने पर भी उनकी समुद्री सीमाओं में कोई कटौती नहीं की जाएगी।
    • विस्थापित व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण: समुद्र के स्तर में वृद्धि के कारण सीमा पार विस्थापित होने वाले लोगों की राष्ट्रीयता, नागरिकता और आत्मनिर्णय के अधिकार (Right to Self-determination) की रक्षा की जाएगी।
    • वैज्ञानिक अवलोकन और डेटा साझाकरण: तटीय जोखिमों के मानचित्रण के लिए महासागरीय डेटा साझाकरण और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को सुदृढ़ किया जाएगा।
    • वित्त पोषण अंतर को पाटना (Closing the Finance Gap): यह घोषणा विकासशील और निम्न-तटीय देशों के लिए अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) और ‘हानि और क्षति कोष’ (Loss and Damage Fund) से आसान और पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता प्रदान करने का आह्वान करती है।
  • अवसंरचना लचीलापन: तटीय शहरों में जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) नीतियों के तहत लचीले बुनियादी ढांचे (Resilient Infrastructure) के निर्माण पर निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

वैश्विक जोखिम: चिंताएं और सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार इस संकट की भयावहता निम्नलिखित है:

  • चिंताएं:
    • त्वरित वृद्धि: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और ग्लेशियरों के पिघलने के कारण वैश्विक औसत समुद्र स्तर में वर्ष 2024 में 5.9 मिलीमीटर की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो 2025-2026 में भी इसी स्तर के करीब बनी हुई है।
    • भविष्य का अनुमान: आईपीसीसी (IPCC) के अनुसार, वर्ष 2050 तक समुद्र का स्तर औसतन 15 से 30 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है।
    • विस्थापन का संकट: दुनिया भर में लगभग 77 करोड़ लोग उच्च ज्वार रेखा (High-tide Line) से 5 मीटर से भी कम की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं। यदि तत्काल अनुकूलन उपाय नहीं किए गए, तो वर्ष 2050 तक 1.2 अरब लोग विस्थापित हो सकते हैं।
    • तटीय बाढ़ का खतरा (Coastal Flooding Risk): समुद्र का स्तर बढ़ने से चक्रवाती तूफान (Storm Surges), तटीय क्षरण (Coastal Erosion) और समुद्री खारे पानी के भूजल में प्रवेश (Saltwater Intrusion) की घटनाएं दस गुना तक बढ़ सकती हैं।
  • क्षेत्र:
    • लघु द्वीप विकासशील देश (Small Island Developing States – SIDS): प्रशांत और हिंद महासागर के द्वीप राष्ट्र जैसे फिजी, तुvalu (Tuvalu), और वानुअतु अस्तित्व के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। तुवालु जैसे देश चरम विस्थापन से निपटने के लिए खुद को एक ‘डिजिटल राष्ट्र’ (Digital Nation) के रूप में स्थानांतरित करने की योजना बना रहे हैं।
    • कम ऊंचाई वाले डेल्टा क्षेत्र: बांग्लादेश, वियतनाम और मिस्र के घनी आबादी वाले नदी डेल्टा क्षेत्र स्थायी जलमग्नता के कगार पर हैं।
    • भारत की संवेदनशीलता: भारत की व्यापक तटीय सीमा के कारण लगभग 35 करोड़ लोग समुद्री अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं।
      • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) के अनुसार, वर्ष 2100 तक भारत के तटों पर सापेक्ष समुद्र स्तर 0.5 से 1 मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, सुंदरबन और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों को स्थायी बाढ़ (Coastal Flooding Climate Change) का गंभीर खतरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: UN Declaration on Sea Level Rise क्या है?

उत्तर: यह संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया पहला ऐसा वैश्विक राजनीतिक घोषणापत्र (UN Climate Declaration) है जो समुद्र स्तर बढ़ने से प्रभावित देशों की संप्रभुता, समुद्री सीमाओं और मानवाधिकारों की रक्षा करता है।

प्रश्न 2: 81st UNGA में Sea Level Rise Declaration कब अपनाया गया?

उत्तर: न्यूयॉर्क में आयोजित 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (81st UN General Assembly) के एक उच्च स्तरीय सत्र के दौरान 24 सितंबर 2026 को इसे सर्वसम्मति से अपनाया गया।

प्रश्न 3: Rising sea levels को लेकर UN ने क्या चिंता जताई है?

उत्तर: संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है कि वर्ष 2024 में समुद्र स्तर 5.9 मिमी बढ़ा है, जिससे तटीय बाढ़ (Coastal Flooding) और वर्ष 2050 तक 1.2 अरब लोगों के विस्थापन का खतरा है।

प्रश्न 4: Sea level rise से किन देशों और क्षेत्रों को सबसे ज्यादा खतरा है?

उत्तर: इससे सबसे ज्यादा खतरा छोटे द्वीप देशों (Small Island States) जैसे तुवालु, फिजी तथा भारत के तटीय शहरों (मुंबई, कोलकाता) और निम्न डेल्टा क्षेत्रों को है।

प्रश्न 5: UN declaration में climate adaptation पर क्या जोर दिया गया है?

उत्तर: घोषणापत्र में विकासशील देशों के लिए अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) बढ़ाने, लचीले बुनियादी ढांचे के निर्माण और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने पर बल दिया गया है।

प्रश्न 6: Sea level rise से coastal flooding का खतरा कैसे बढ़ता है?

उत्तर: समुद्र का स्तर बढ़ने से उच्च ज्वार और चक्रवाती तूफानों (Storm Surges) के दौरान पानी तटीय इलाकों में तेजी से प्रवेश करता है, जिससे स्थायी जलमग्नता और क्षरण होता है।

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