India-Ghana Relations: विज्ञान, शिक्षा और कृषि में सहयोग हेतु 2 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए
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संदर्भ:
हाल ही में अक्टूबर 2026 में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की आधिकारिक घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विज्ञान, शिक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने हेतु दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह यात्रा भारत-अफ्रीका संबंधों (India-Africa Relations 2026) को एक नया रणनीतिक आयाम प्रदान करती है।
भारत-घाना द्विपक्षीय समझौते 2026:
- यात्रा: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 6 से 10 अक्टूबर 2026 तक तीन अफ्रीकी देशों (घाना, कोटे डी आइवर और इथियोपिया) की यात्रा पर हैं।
- इस यात्रा के पहले चरण में घाना की राजधानी अक्रा में दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Talks) संपन्न हुई।
- समझौते और शामिल क्षेत्र: यात्रा के दौरान भारत और घाना ने दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (India-Ghana MoU) का आदान-प्रदान किया, जो मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों—विज्ञान, शिक्षा और कृषि पर केंद्रित हैं:
- प्रथम समझौता: वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा (Scientific Research and Education Agreement)
- संस्थाएं: यह ऐतिहासिक समझौता भारत के भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) और घाना विश्वविद्यालय (University of Ghana) के बीच हुआ है।
- दायरा: इसके अंतर्गत दोनों संस्थान अकादमिक आदान-प्रदान, जैविक विविधता के अध्ययन, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) और क्षमता निर्माण (Capacity Building) के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। [2, 7, 8]
- द्वितीय समझौता: कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी (Agricultural Research and Technology Agreement)
- संस्थाएं: यह समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR), नई दिल्ली और घाना के सीएसआईआर-फसल अनुसंधान संस्थान (CSIR-Crops Research Institute) के बीच हस्ताक्षरित किया गया।
- दायरा: इसके तहत कृषि शिक्षा (Agricultural Education), टिकाऊ खेती के तरीकों, फसल उत्पादकता बढ़ाने और अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- ब्रिक्स सदस्यता का समर्थन (BRICS Membership Support): इस वार्ता के दौरान घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुडजेटो अबलाक्वा ने घोषणा की कि घाना के कैबिनेट ने ब्रिक्स (BRICS) समूह में शामिल होने के फैसले को मंजूरी दे दी है। भारत ने घाना की इस आकांक्षा का पूर्ण समर्थन (Support) किया है।
- क्षेत्रीय संगठनों के साथ जुड़ाव: डॉ. जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अफ्रीकी संघ (African Union – AU) और पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर बल दिया।
- साझेदारी का विस्तार: दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों (India-Ghana Bilateral Relations) को मजबूत करते हुए व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स (दवा निर्माण), और डिजिटल गवर्नेंस जैसे नए क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी (Comprehensive Partnership) के विस्तार पर सहमति जताई।
India-Ghana Relations: विस्तार से
- राजनयिक शुरुआत: भारत ने घाना की आज़ादी से पहले ही 1953 में अक्रा (Accra) में अपना प्रतिनिधि कार्यालय खोला था। वर्ष 1957 में घाना के स्वतंत्र होने पर दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM): भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और घाना के पहले राष्ट्रपति क्वामे नक्रमा (Kwame Nkrumah) गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक नेताओं में शामिल थे।
- उच्च स्तरीय यात्राएं: जुलाई 2025 में भारतीय प्रधानमंत्री ने घाना की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा की (जो पिछले तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी)। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाया गया।
- इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री को घाना के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
- द्विपक्षीय व्यापार: भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2024-25 में 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। दोनों देशों ने आगामी वर्षों में इस व्यापार को 6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
- निर्यात-आयात:
- घाना से भारत को निर्यात: मुख्य रूप से सोना (कुल निर्यात का लगभग 70%), कोको और काजू।
- भारत से घाना को निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), कृषि मशीनरी, वस्त्र (टेक्सटाइल), स्टील, और वाहन (टाटा और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी)।
- व्यापार संतुलन: सोने के बड़े पैमाने पर निर्यात के कारण व्यापार संतुलन आमतौर पर घाना के पक्ष में रहता है।
- लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC): भारत सरकार ने घाना के विकास प्रोजेक्ट्स (जैसे कृषि-प्रसंस्करण, मछली प्रसंस्करण, अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण विद्युतीकरण और रेलवे विस्तार) के लिए लगभग 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की ऋण सहायता प्रदान की है।
- क्षमता निर्माण: भारत ‘भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग’ (ITEC) कार्यक्रम और ‘इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट’ के तहत घाना के नागरिकों को प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास में मदद करता है।
- रक्षा सहयोग: दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ता जा रहा है।
- वैश्विक मंचों पर सहयोग: दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और राष्ट्रमंडल (Commonwealth) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का समर्थन किया है। [4]
- ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA): भारत ने घाना को ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
- प्रवासी भारतीय: घाना में लगभग 10,000 भारतीयों का समुदाय रहता है, जो वहां के स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: योग, भारतीय संगीत, सिनेमा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (CEP) भी लागू है।
भारत-घाना संबंधों का रणनीतिक महत्व:
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग का सुदृढ़ीकरण (Strengthening South-South Cooperation): भारत और घाना ऐतिहासिक रूप से गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के संस्थापक सदस्य रहे हैं। वर्तमान युग में विज्ञान और कृषि सहयोग (Science and Agriculture Cooperation) के माध्यम से दोनों देश दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप दे रहे हैं, जो पश्चिमी देशों पर विकासशील राष्ट्रों की तकनीकी निर्भरता को कम करता है।
- खाद्य सुरक्षा और कृषि आधुनिकीकरण: घाना और अन्य पश्चिम अफ्रीकी देशों के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) एक प्रमुख चिंता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तकनीकी ज्ञान और उन्नत बीजों की मदद से घाना अपनी घरेलू कृषि उत्पादकता (Agricultural Productivity) को बढ़ा सकता है। भारत के लिए यह कृषि-मशीनरी और उर्वरक निर्यात के नए बाजार खोलता है।
- डिजिटल कूटनीति और तकनीकी हस्तांतरण: भारत अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) जैसे UPI और फिनटेक (Fintech) समाधानों को वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ साझा कर रहा है। घाना के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग (Technology Cooperation) डिजिटल विभाजन को कम करने और वहां के ‘वन मिलियन कोडर्स इनिशिएटिव’ जैसे कार्यक्रमों को गति देने में सहायक होगा।
- स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स हब: भारत को ‘विश्व की दवा फैक्ट्री’ कहा जाता है। घाना के साथ व्यापक साझेदारी (Comprehensive Partnership) के तहत भारत अफ्रीकी महाद्वीप में टीकों और जीवन रक्षक दवाओं के स्थानीय उत्पादन के लिए घाना को एक प्रमुख ‘वैक्सीन हब’ (Vaccine Hub) के रूप में विकसित करने में सहयोग कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत और घाना के बीच 2026 में कितने समझौतों पर हस्ताक्षर हुए?
उत्तर: अक्टूबर 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 2 प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए।
प्रश्न 2: भारत-घाना समझौतों में किन क्षेत्रों को शामिल किया गया है?
उत्तर: इन समझौतों में मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research), शैक्षणिक सहयोग (Education) और कृषि प्रौद्योगिकी (Agriculture) के क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
प्रश्न 3: India Ghana Science Cooperation Agreement क्या है?
उत्तर: यह भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और घाना विश्वविद्यालय के बीच हुआ समझौता है, जो जैव विविधता और अकादमिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
प्रश्न 4: भारत और घाना के बीच Education Cooperation क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह विकासशील देशों में मानव संसाधन विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण (Capacity Building) और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के अवसर बढ़ाता है।
प्रश्न 5: Agriculture Sector में India Ghana Cooperation से क्या फायदा होगा?
उत्तर: इससे घाना को उन्नत भारतीय कृषि तकनीक (Agricultural Technology) मिलेगी, फसल अनुसंधान मजबूत होगा और पश्चिम अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
प्रश्न 6: भारत और घाना के बीच Bilateral Relations कैसे हैं?
उत्तर: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध (India Ghana Bilateral Relations) ऐतिहासिक, मैत्रीपूर्ण और मजबूत हैं, जो अब व्यापार, डिजिटल और रक्षा क्षेत्रों में एक व्यापक साझेदारी (Comprehensive Partnership) में बदल रहे हैं।
