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Central Armed Police Forces Act 2026 लागू: प्रावधान, आवश्यकता एवं चुनौतियां

Central Armed Police Forces Act 2026 लागू: प्रावधान, आवश्यकता एवं चुनौतियां

CAPF Act 2026

संदर्भ:

गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) ने 8 अक्टूबर 2026 से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 (Central Armed Police Forces Act 2026) को पूरे देश में लागू कर दिया है। 

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस वर्ष 9 अप्रैल 2026 को इस महत्वपूर्ण Central Armed Police Forces Law को अपनी स्वीकृति दी थी। 

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026:

  • पृष्ठभूमि: Central Armed Police Forces Act 2026, वर्ष 2025 के ‘संजय प्रकाश बनाम भारत संघ’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के ऐतिहासिक निर्णय की पृष्ठभूमि में लाया गया है।
    • न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सीएपीएफ (CAPF) कैडर के अधिकारियों को संगठित समूह ‘ए’ सेवा (Organised Group ‘A’ Service – OGAS) के तहत सभी वित्तीय और पदोन्नति लाभ दिए जाएं तथा वरिष्ठ पदों (Senior Administrative Grade) पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए। 
    • सरकार ने इस न्यायिक निर्देश को संतुलित करने और प्रशासनिक एकरूपता लाने के लिए संसद के माध्यम से इस नए कानून (CAPF General Administration Act) को पारित किया है।
  • प्रावधान:
    • एकीकृत विधिक ढांचा (Umbrella Legal Framework): पहले प्रत्येक अर्धसैनिक बल अपने अलग-अलग अधिनियमों के तहत शासित होता था। यह कानून सभी बलों के लिए एक समान प्रशासनिक तंत्र (CAPF Legal Framework) स्थापित करता है।
  • अधिभावी प्रभाव (Overriding Effect): अधिनियम में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि इस कानून और किसी अन्य पूर्ववर्ती कानून, प्रशासनिक आदेश या अदालत के फैसले (Court Judgments) के बीच कोई विसंगति होती है, तो इस अधिनियम के नियम ही मान्य होंगे।
  • वरिष्ठ पदों पर आईपीएस कोटा (IPS Deputation Quotas): इस कानून के तहत शीर्ष नेतृत्व पदों पर आईपीएस (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को वैधानिक सुरक्षा दी गई है:
    • महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (Special DG) के 100% पद विशेष रूप से आईपीएस अधिकारियों द्वारा भरे जाएंगे।
    • अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के न्यूनतम 67% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे।
    • महानिरीक्षक (IG) के 50% पदों पर आईपीएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर तैनात किए जाएंगे। 
  • नियम बनाने की शक्ति (Power to Make Rules): यह कानून केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) को सीएपीएफ अधिकारियों की भर्ती (Recruitment), वरिष्ठता नियमों (CAPF Seniority Rules) और सेवा शर्तों (CAPF Service Conditions) पर नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
  • आवश्यकता:
    • प्रशासनिक विखंडन का अंत: गृह मंत्रालय के अनुसार, एक साझा कानून के अभाव में बलों के नियम खंडित रूप से विकसित हुए थे, जिससे बार-बार सेवा-संबंधी मुकदमों (Litigations) की स्थिति बनती थी।
    • केंद्र-राज्य समन्वय: सरकार का तर्क है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने तथा उग्रवाद-विरोधी अभियानों के दौरान राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच परिचालन समन्वय (Operational Synergy) के लिए शीर्ष स्तर पर आईपीएस अधिकारियों का नेतृत्व आवश्यक है। 
    • सामरिक सुदृढ़ता: सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा के बढ़ते परिचालन दायित्वों को देखते हुए एक केंद्रीयकृत नियंत्रण और कमान संरचना (Centralised Control Structure) की अत्यधिक आवश्यकता थी। 
  • चुनौतियां:
    • कॅरियर प्रगति में ठहराव (Career Stagnation): सीएपीएफ कैडर के अधिकारियों (लगभग 13,000 ग्रुप ‘ए’ अधिकारी) को सबसे बड़ी चिंता पदोन्नति नियमों (CAPF Officers Promotion Rules) को लेकर है।
      • शीर्ष पदों पर भारी आरक्षण के कारण कैडर अधिकारियों को पदोन्नति के लिए 15 से 25 वर्ष तक का लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
    • न्यायिक टकराव: यह अधिनियम सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के 2025 के उस फैसले को निष्प्रभावी करता है जिसमें आईपीएस प्रतिनियुक्ति को कम करने को कहा गया था।
      • सेवारत अर्धसैनिक अधिकारियों ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिस पर 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होनी निर्धारित है।
    • संस्थागत स्वायत्तता पर प्रभाव: आलोचकों का मानना है कि आंतरिक अधिकारियों को कमान न मिलने से बलों के भीतर व्यावसायिक विशेषज्ञता और संस्थागत स्वायत्तता (Organisational Autonomy) कमजोर हो सकती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार द्वारा पारित एक एकीकृत कानून (Central Armed Police Forces Law) है, जो पाँच प्रमुख अर्धसैनिक बलों के प्रशासनिक ढांचे, भर्ती और सेवा शर्तों को संचालित करता है।

प्रश्न 2: CAPF अधिनियम, 2026 लागू करने का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका उद्देश्य विभिन्न केंद्रीय बलों के नियमों में एकरूपता लाना, मुकदमों को कम करना और राज्य पुलिस के साथ बेहतर परिचालन समन्वय स्थापित करना है।

प्रश्न 3: इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?

उत्तर: इसके तहत केंद्र सरकार को नियम बनाने की सर्वोच्च शक्ति मिली है और वरिष्ठ नेतृत्व पदों (DG, ADG, IG) पर आईपीएस अधिकारियों के लिए निश्चित कोटा निर्धारित किया गया है।

प्रश्न 4: CAPF के अंतर्गत कौन-कौन से बल आते हैं?

उत्तर: इस अधिनियम की अनुसूची (Central Armed Police Forces Structure) के तहत मुख्य रूप से पाँच बल आते हैं: CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB।

प्रश्न 5: नए कानून का CAPF अधिकारियों की पदोन्नति पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: वरिष्ठ स्तर (ADG/IG) के अधिकांश पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित होने से आंतरिक कैडर अधिकारियों के पदोन्नति अवसरों में सीमितता आ सकती है।

प्रश्न 6: CAPF के सामान्य प्रशासन में क्या बदलाव किए गए हैं?

उत्तर: इसके तहत पुराने अलग-अलग नियमों (CAPF Administration Rules) को निरस्त कर गृह मंत्रालय को एकीकृत प्रशासनिक और विधिक नियंत्रण प्रदान किया गया है।

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