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Territorial Army India: परिचय, कानूनी आधार, योग्यता एवं कार्य

Territorial Army India: परिचय, कानूनी आधार, योग्यता एवं कार्य

Territorial Army India

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्रादेशिक सेना (Territorial Army India) ने 9 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत अपना 77वां स्थापना दिवस (77th Raising Day) मनाया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी रैंकों और पूर्व सैनिकों को बधाई देते हुए ‘नागरिक भी, सैनिक भी’ के उनके अद्वितीय संकल्प को सराहा।

भारतीय प्रादेशिक सेना के बारे में:

  • परिचय: भारतीय प्रादेशिक सेना (Territorial Army India), यह नियमित भारतीय सेना (Indian Army) की एक स्वैच्छिक और अंशकालिक रक्षित वाहिनी (Indian Army Reserve Force) है।
    • यह बल सामान्य नागरिकों को नागरिक जीवन में अपनी नियमित नौकरियों या व्यवसायों को जारी रखते हुए सैन्य वर्दी पहनने और राष्ट्र की सेवा करने का एक दुर्लभ मंच प्रदान करता है। 
    • इसका मूल ध्येय वाक्य “सावधानी व शूरता” (Vigilance and Valour) है। 
  • विकासक्रम: इसकी ऐतिहासिक जड़ें प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1917 में गठित ‘भारतीय रक्षा बल’ (Indian Defence Force) और 1920 के ‘भारतीय प्रादेशिक बल अधिनियम’ (Indian Territorial Force Act) में समाहित हैं।
    • आधुनिक स्वरूप में इसकी स्थापना संसद द्वारा प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 (Territorial Army Act 1948) पारित करके की गई थी। 
    • भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी ने 9 अक्टूबर 1949 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया था, जिसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को ‘प्रादेशिक सेना दिवस’ मनाया जाता है। 
  • प्रशासनिक ढांचा: यह बल पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के प्रशासनिक नियंत्रण में प्रादेशिक सेना महानिदेशालय (Directorate General Territorial Army) द्वारा संचालित होता है।
    • सक्रिय सेवा या वार्षिक प्रशिक्षण (Annual Training) के दौरान इसके सभी कर्मियों पर ‘सैन्य अधिनियम, 1950’ (Army Act 1950) लागू होता है। 
    • इस कानून के तहत नियोक्ताओं (Employers) के लिए यह विधिक बाध्यता (Legal Obligation) है कि वे अपने कर्मचारियों को प्रादेशिक सेना के प्रशिक्षण शिविरों के लिए सवेतन अवकाश (Paid Leave) प्रदान करें।
  • योग्यता मानदंड एवं चयन प्रक्रिया: प्रादेशिक सेना में अधिकारी (Officer) और गैर-अधिकारी (जवान) दोनों स्तरों पर भर्ती की जाती है।
    • आवेदक केवल भारत का नागरिक (पुरुष और महिला दोनों) होना चाहिए। महिला अधिकारियों की भर्ती वर्ष 2019 से नियमित रूप से की जा रही है।
  • आवेदन की अंतिम तिथि को उम्मीदवार की आयु 18 से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री अनिवार्य है।
  • सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य शर्त यह है कि उम्मीदवार का लाभकारी रूप से नियोजित (Gainfully Employed) या स्व-नियोजित होना आवश्यक है। पूर्णतः बेरोजगार नागरिक इस पद के लिए पात्र नहीं होते क्योंकि यह एक अंशकालिक सेवा है।
  • नियमित सेना, नौसेना, वायुसेना, पुलिस, जीआरईएफ (GREF) और अर्धसैनिक बलों के सेवारत सदस्य इसके लिए आवेदन नहीं कर सकते। 
  • चयन प्रक्रिया: 
    • प्रवेश परीक्षा: इसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाती है। 
    • साक्षात्कार: लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को प्रारंभिक साक्षात्कार बोर्ड (PIB) और उसके बाद सेवा चयन बोर्ड (SSB) के कड़े मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।
    • कमीशन और वेतन: अंतिम चयन के बाद उम्मीदवारों को लेफ्टिनेंट (Lieutenant) के रूप में कमीशन दिया जाता है। उन्हें सेना के पे-मैट्रिक्स लेवल 10 (₹56,100 – ₹1,77,500) और ₹15,500 प्रति माह सैन्य सेवा वेतन (MSP) के अनुसार भुगतान किया जाता है। 
  • सैन्य प्रशिक्षण: कमीशन मिलने के बाद अधिकारियों को प्रथम वर्ष में 1 महीने का बुनियादी प्रशिक्षण और बाद के वर्षों में प्रतिवर्ष 2 महीने का वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (Annual Training Camp) पूरा करना होता है।
    • इसके साथ ही सेवा के शुरुआती दो वर्षों के भीतर ओटीए (OTA) नागपुर में तीन महीने का पोस्ट-कमिशन प्रशिक्षण अनिवार्य होता है।

प्रादेशिक सेना के प्रमुख कार्य एवं भूमिका (Territorial Army Duties & Role):

भारतीय प्रादेशिक सेना की भूमिका बहुआयामी है, जिसे संकट और शांति दोनों समय नियमित सेना के पूरक के रूप में संरचित किया गया है:

  • नियमित सेना को सहयोग (Assisting Regular Army): युद्ध या बाह्य आक्रमण के समय अग्रिम चौकियों और परिचालन क्षेत्रों में नियमित भारतीय सेना को अतिरिक्त जनशक्ति प्रदान करना। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के प्रबंधन के लिए इसके इंजीनियर रेजिमेंट तैनात किए गए हैं।
  • महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: आंतरिक सुरक्षा संकटों के दौरान देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों (VAs/MDs) जैसे रेलवे (Railway Engineer Regiments) और तेल विपणन क्षेत्र (Oil Sector Units) को सुरक्षा प्रदान करना।
  • नागरिक प्रशासन की सहायता (HADR Operations): प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप, चक्रवात) या नागरिक अशांति के समय नागरिक प्रशासन को राहत और पुनर्वास कार्यों में मानवीय सहायता प्रदान करना।
  • पारिस्थितिकी बल (Ecological Task Force – ETF): प्रादेशिक सेना के पास 10 विशेष पारिस्थितिकी बटालियन हैं, जो देश के दुर्गम और अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में वनीकरण (Afforestation), आर्द्रभूमि के पुनरुद्धार और ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ (Namami Gange) जैसी परियोजनाओं में ऐतिहासिक भूमिका निभा रही हैं।
  • प्रसिद्ध हस्तियां: देश में प्रादेशिक सेना के प्रति जागरूकता बढ़ाने में कई मानद अधिकारियों जैसे महेंद्र सिंह धोनी (लेफ्टिनेंट कर्नल), कपिल Dev और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारतीय प्रादेशिक सेना क्या है?

उत्तर: यह भारतीय सेना की एक अंशकालिक और स्वैच्छिक रक्षित वाहिनी (Reserve Force) है, जो नौकरीपेशा नागरिकों को देश सेवा का अवसर देती है। 

प्रश्न 2: Territorial Army का कानूनी आधार क्या है?

उत्तर: इसका कानूनी संचालन संसद द्वारा पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 (Territorial Army Act 1948) के वैधानिक नियमों के तहत किया जाता है। 

प्रश्न 3: प्रादेशिक सेना में शामिल होने के लिए क्या योग्यता चाहिए?

उत्तर: उम्मीदवार को भारत का नागरिक, किसी भी विषय में स्नातक (Graduate) और नागरिक जीवन में लाभकारी रूप से नियोजित होना अनिवार्य है।

प्रश्न 4: Territorial Army में आयु सीमा क्या है?

उत्तर: प्रादेशिक सेना में नागरिक आवेदकों के शामिल होने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित है।

प्रश्न 5: क्या नौकरी करने वाले नागरिक Territorial Army में शामिल हो सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यह बल विशेष रूप से उन्हीं नागरिकों (सरकारी/निजी कर्मचारियों या व्यवसायियों) के लिए है जो पहले से किसी लाभकारी काम में लगे हैं।

प्रश्न 6: प्रादेशिक सेना के प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर: इसके प्रमुख कार्यों में आपातकाल में नियमित सेना की सहायता करना, आवश्यक सेवाओं का रखरखाव, आपदा प्रबंधन और पारिस्थितिकी संरक्षण (ETF) शामिल हैं।

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