प्रस्तावित Shri Jagannath International Airport को MoEFCC से मिली पर्यावरण संबंधी मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change – MoEFCC) ने ओडिशा के पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Shri Jagannath International Airport) परियोजना को अंतिम पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance – EC) और तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone – CRZ) मंजूरी प्रदान की।
प्रस्तावित श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बारे में:
- परिचय: Shri Jagannath International Airport, ओडिशा सरकार की एक महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना (Greenfield Airport Project) है।
- यह हवाई अड्डा ओडिशा के पुरी जिले में सिपासरुबाली और संधापुर मौजा (Sipasarubali and Sandhapur Mouzas) के तटीय बेल्ट में ब्रह्मगिरी के पास प्रस्तावित है, जो विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- कुल क्षेत्रफल: यह परियोजना कुल 1,164.754 एकड़ (लगभग 471.348 हेक्टेयर) भूमि पर विकसित की जा रही है। इसमें 942.863 एकड़ सरकारी भूमि और 221.891 एकड़ निजी भूमि शामिल है।
- वित्तीय लागत: इस अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण पर कुल ₹5,631 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
- विकास एजेंसी: इसका विकास भारतीय विमानन प्राधिकरण (Airports Authority of India – AAI) और राज्य के परिवहन विभाग के समन्वय से किया जाएगा।
- रनवे: यहाँ कोड-ई (Code-E) श्रेणी का 3,700 मीटर × 45 मीटर का एक विशाल रनवे बनाया जाएगा, जिससे बोइंग 777-300ER और एयरबस A350 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय यात्री विमान यहाँ आसानी से उतर सकेंगे।
- टर्मिनल बिल्डिंग: प्रथम चरण में 54,000 वर्ग मीटर का एकीकृत टर्मिनल भवन (Integrated Terminal) बनाया जाएगा। [6]
- यात्री क्षमता:
- चरण I (Phase I): प्रति वर्ष 4.6 मिलियन यात्री।
- चरण II (Phase II): प्रति वर्ष 10.18 मिलियन यात्री।
- चरण III (Phase III): प्रति वर्ष 16.69 मिलियन यात्री।
MoEFCC द्वारा दी गई विधिक मंजूरियों के नियम:
MoEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण विधिक मंजूरियां (MoEFCC Environmental Approval) दी हैं:
- पर्यावरण मंजूरी (EC): पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 के तहत दी गई पर्यावरण मंजूरी हवाई अड्डा भारत (Environmental Clearance Airport India) के विधिक नियमों को पूरा करती है।
- CRZ मंजूरी: यह क्षेत्र तटीय विनियमन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए तटीय पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुँचाने की शर्त पर विशेष तटीय विनियमन क्षेत्र मंजूरी (CRZ Clearance) प्रदान की गई है।
- वन मंजूरी (Stage-I Forest Clearance): वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत पुरी वन्यजीव प्रभाग की 27.887 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।
विकास बनाम पर्यावरण: आवश्यकता, पर्यटन लाभ एवं चुनौतियां:
- वैश्विक धार्मिक कूटनीति: पुरी भारत के ‘चार धामों’ में से एक है। सीधा अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क मिलने से दक्षिण-पूर्व एशिया (जहाँ बौद्ध और हिंदू संस्कृति का प्रभाव है) और पश्चिमी देशों के अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री सीधे पुरी हवाई अड्डा विकास (Puri Airport Development) का लाभ उठा सकेंगे।
- आर्थिक गुणक प्रभाव (Economic Multiplier Effect): नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अध्ययनों के अनुसार, विमानन अवसंरचना में निवेश से क्षेत्रीय आर्थिक विकास में 3.25 गुना और रोजगार सृजन में 6.1 गुना की वृद्धि होती है। इससे होटल, हस्तशिल्प और स्थानीय परिवहन उद्योगों को व्यापक लाभ होगा।
- भुवनेश्वर पर दबाव कम होना: यह बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Bhubaneswar) के बाद राज्य का दूसरा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र बनेगा, जिससे राजधानी के हवाई अड्डे पर यातायात का दबाव कम होगा।
- चुनौतियाँ:
- वन्यजीवों के लिए खतरा: यह प्रस्तावित स्थल बालूखंड-कोणार्क वन्यजीव अभयारण्य (Balukhand-Konark Wildlife Sanctuary) और चिलिका झील (Chilika Lake – एक प्रसिद्ध रामसर आर्द्रभूमि) के बेहद करीब है।
- प्रवासी पक्षियों और बर्ड-स्ट्राइक का जोखिम: चिलिका झील ‘सेंट्रल एशियन फ्लाईवे’ (Central Asian Flyway) का हिस्सा है। हवाई अड्डे के कारण प्रवासी पक्षियों के मार्ग में व्यवधान आएगा और विमानों से पक्षियों के टकराने (Bird-Strike Risks) का खतरा अत्यधिक बढ़ जाएगा।
- समुद्री पारिस्थितिकी पर प्रभाव: यह तटीय क्षेत्र लुप्तप्राय ओलिड रिडले कछुओं (Olive Ridley Turtles) के घोंसले बनाने (Nesting) और चिलिका में पाई जाने वाली इरावदी डॉलफिन (Irrawaddy Dolphins) का प्राकृतिक आवास है। हवाई अड्डे के ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण से इनका जीवन चक्र प्रभावित हो सकता है।
- चक्रवात बफर का नुकसान: निर्माण के लिए लगभग 13,000 तटीय पेड़ों (मुख्य रूप से काजू और झाऊ/Casuarina) को काटा जाएगा, जो तटीय ओडिशा के लिए चक्रवात (Cyclone Buffers) के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
पर्यावरण मंत्रालय की कड़ी शर्तें:
MoEFCC ने अंतिम स्टेज-II वन मंजूरी के लिए राज्य सरकार के सामने 33 कड़े विधिक नियम और शर्तें रखी हैं:
- क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation): नष्ट होने वाले जंगलों के बदले राज्य सरकार को 29.939 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर अनिवार्य वनीकरण करना होगा।
- वन्यजीव प्रबंधन योजना: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) की सिफारिशों पर आधारित एक साइट-विशिष्ट वन्यजीव संरक्षण योजना (Wildlife Management Plan) को सख्ती से लागू करना होगा।
- बर्ड हेजार्ड स्टडी: मंत्रालय ने किसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थान से ‘बर्ड हेजार्ड और रिस्क असेसमेंट स्टडी’ कराने का निर्देश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट कहां प्रस्तावित है?
उत्तर: यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Jagannath International Airport Odisha) ओडिशा के पुरी जिले के सिपासरुबाली (Sipasarubali) तटीय क्षेत्र में प्रस्तावित है।
प्रश्न 2: MoEFCC ने एयरपोर्ट परियोजना को कौन-सी पर्यावरण संबंधी मंजूरी दी है?
उत्तर: केंद्रीय मंत्रालय ने परियोजना को अंतिम पर्यावरण मंजूरी (EC), तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मंजूरी और 27.88 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन की स्टेज-I वन मंजूरी दी है।
प्रश्न 3: श्री जगन्नाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए सीधे हवाई संपर्क (Air Connectivity) की सुविधा देकर पुरी को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
प्रश्न 4: इस एयरपोर्ट से ओडिशा के पर्यटन को क्या फायदा होगा?
उत्तर: इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन (Odisha Tourism Infrastructure) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और स्थानीय होटल एवं हस्तशिल्प उद्योग को बहुगुणित लाभ होगा।
प्रश्न 5: क्या एयरपोर्ट के निर्माण से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है?
उत्तर: हाँ, इससे पास के बालूखंड अभयारण्य के वन्यजीवों, चिलिका के प्रवासी पक्षियों, ओलिभ रिडले कछुओं और चक्रवात सुरक्षा प्रदान करने वाले तटीय पेड़ों को नुकसान पहुँच सकता है।
प्रश्न 6: एयरपोर्ट परियोजना के लिए कौन-कौन सी मंजूरियां आवश्यक हैं?
उत्तर: इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से साइट क्लीयरेंस, रक्षा मंत्रालय से एनओसी (NOC), तथा MoEFCC से वन, पर्यावरण (EC) और तटीय (CRZ) मंजूरियां आवश्यक हैं।
