भारतीय नौसेना का पोत INS Sahyadri, भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय अभ्यास के लिए हुआ रवाना
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना (Indian Navy) का स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri) दक्षिण कोरिया और भारत के बीच आयोजित होने वाले द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में भाग लेने के लिए दक्षिण कोरिया के बुसान नौसैनिक बंदरगाह पर पहुंचा।

भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय अभ्यास:
- परिचय: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक सुरक्षा के बीच भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय अभ्यास (Indian Navy Bilateral Exercise) दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है।
- यह भारत और दक्षिण कोरिया गणराज्य की नौसेनाओं के बीच (India South Korea Naval Exercise) आयोजित होने वाला द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
- इसका मुख्य उद्देश्य दोनों मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ावा देना और समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना है।
- प्रतिभागी: इस अभ्यास में भारतीय नौसेना (IN) और कोरिया गणराज्य की नौसेना (RoKN) सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- समुद्र में भारतीय आईएनएस सह्याद्रि के साथ दक्षिण कोरिया का प्रसिद्ध युद्धपोत आरओकेएस मुनमु द ग्रेट (ROKS Munmu the Great) संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास में भाग ले रहा है।
- मेजबान देश और स्थान: इस वर्ष का मेजबान दक्षिण कोरिया है, और अभ्यास का हार्बर चरण बुसान नौसैनिक बंदरगाह (Busan Naval Harbour) पर आयोजित किया जा रहा है।
- ऐतिहासिक निरंतरता: वर्ष 2026 में आयोजित किया जा रहा यह अभ्यास इस द्विपक्षीय श्रृंखला का दूसरा संस्करण है।
- इसका पहला संस्करण भी अक्टूबर 2025 में बुसान में ही आयोजित किया गया था, जिसमें आईएनएस सह्याद्रि ने हिस्सा लिया था।
- दो-चरणीय परिचालन संरचना (Two-Phase Operational Structure): यह नौसैनिक अभ्यास दो प्रमुख चरणों में विभाजित होकर आयोजित किया गया है:
- हार्बर चरण (Harbour Phase): बुसान बंदरगाह पर आयोजित इस चरण के दौरान दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पेशेवर बातचीत, क्रॉस-डेक दौरे (Cross-deck Visits), संयुक्त खेल गतिविधियां और क्रॉस-ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा, आईएनएस सह्याद्रि के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन विकास झा ने वरिष्ठ कोरियाई नौसैनिक अधिकारियों से मुलाकात की।
- समुद्री चरण (Sea Phase): बंदरगाह गतिविधियों के बाद समुद्र में वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में उन्नत सामरिक अभ्यास (Tactical Exercises) आयोजित किए जा रहे हैं।
INS Sahyadri के बारे मे:
- परिचय: भारतीय नौसेना की ओर से तैनात आईएनएस सह्याद्रि एक अत्यंत आधुनिक और घातक युद्धपोत है।
- श्रेणी (Class): यह शिवालिक श्रेणी का फ्रिगेट (Shivalik Class Frigate) है। यह भारत का पहला स्वदेशी निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) वर्ग है।
- निर्माण: इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है और इसे वर्ष 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
- तकनीकी खासियतें: यह युद्धपोत रडार सिग्नेचर को कम करने वाली स्टील्थ तकनीक (Stealth Technology), उन्नत लंबी दूरी की मिसाइलों, एंटी-सबमरीन रॉकेटों और अत्याधुनिक सेंसर प्रणालियों से लैस है।
- यह नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत और दक्षिण कोरिया रक्षा संबंधों का रणनीतिक महत्व:
- एक्ट ईस्ट पॉलिसी का सुदृढ़ीकरण: यह लंबी दूरी की नौसैनिक तैनाती भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (SAGAR Doctrine) के दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुरूप है।
- हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा (Indo Pacific Maritime Security): वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण चीन सागर और मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- भारत और दक्षिण कोरिया की रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित समुद्री आदेश (Rules-based Maritime Order) को बनाए रखने में मदद करती है।
- नौसैनिक अंतर-संचालनीयता (Naval Interoperability): ROKS मुनमु द ग्रेट और आईएनएस सह्याद्रि के बीच यह अभ्यास दोनों नौसेनाओं को संकट के समय या मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों के दौरान एक साथ मिलकर काम करने की तकनीकी क्षमता प्रदान करता है।
- समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा (Securing SLOCs): दोनों देशों का यह साझा रक्षा सहयोग समुद्री डकैती, अवैध शिकार और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों (Sea Lines of Communication) पर उत्पन्न होने वाले पारंपरिक व गैर-पारंपरिक खतरों को रोकने में मदद करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: INS सह्याद्रि किस प्रकार का भारतीय भारतीय नौसैनिक पोत है?
उत्तर: आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri Indian Navy) भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित एक निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) युद्धपोत है।
प्रश्न 2: INS सह्याद्रि को भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय अभ्यास के लिए क्यों भेजा गया है?
उत्तर: इसे दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग (Maritime Partnership) बढ़ाने, परिचालन अनुभवों को साझा करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी समन्वय मजबूत करने के लिए भेजा गया है।
प्रश्न 3: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच नौसैनिक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सामरिक अंतर-संचालनीयता (Naval Interoperability) विकसित करना, सैन्यCamaraderie बढ़ाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व सुरक्षा में योगदान देना है।
प्रश्न 4: INS सह्याद्रि किस श्रेणी (Class) का युद्धपोत है?
उत्तर: यह भारतीय नौसेना की अग्रिम पंक्ति की शिवालिक श्रेणी (Shivalik Class Frigate) का मल्टी-रोल युद्धपोत है, जिसे मझगांव डॉक द्वारा बनाया गया है।
प्रश्न 5: भारत-दक्षिण कोरिया नौसैनिक सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: भारत-दक्षिण कोरिया सहयोग (India Republic of Korea Naval Cooperation) समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।