AC Temperature
AC Temperature –
संदर्भ:
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय भारत में नए एयर कंडीशनरों (ACs) के लिए तापमान सीमा 20°C से 28°C के बीच तय करने की नीति पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
AC के तापमान को सीमित करने की आवश्यकता क्यों?
- ऊर्जा दक्षता: Bureau of Energy Efficiency (BEE) के अनुसार,
- हर 1°C तापमान बढ़ाने से ~6% बिजली की बचत होती है।
- उदाहरण: 24°C पर सेट करने से 18°C की तुलना में उल्लेखनीय ऊर्जा बचत होती है।
- राष्ट्रीय प्रभाव: यदि पूरे भारत में 24°C तापमान अपनाया जाए,
- तो प्रति वर्ष 20 अरब यूनिट बिजली की बचत हो सकती है।
- स्वास्थ्य जोखिम: 18°C से कम तापमान पर रहने से खतरे:
- उच्च रक्तचाप (Hypertension)
- अस्थमा और श्वसन संक्रमण
- बच्चों, बुजुर्गों और कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक
- वैश्विक अध्ययन से प्रमाण (Evidence from Global Studies):
- जापान, UK और न्यूजीलैंड में अध्ययन बताते हैं कि:
- थोड़ा गर्म इनडोर तापमान स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है,
- विशेष रूप से श्वसन और हृदय स्वास्थ्य में सुधार दिखा।
- WHO की सिफारिश: WHO के अनुसार, समशीतोष्ण जलवायु (temperate climate) में इनडोर तापमान कम से कम 18°C होना चाहिए।
- थर्मल कंफर्ट मानक: ASHRAE-55 और ISO 7730 जैसे मानकों के अनुसार:
- हल्के वस्त्र पहनने वालों के लिए आदर्श इनडोर तापमान 20°C से 24°C के बीच होना चाहिए।
- स्थानीय जलवायु और सांस्कृतिक कारकों के अनुसार समायोजन जरूरी है।
एयर कंडीशनर (AC) कैसे कार्य करता है?
- एयर कंडीशनर का कार्य एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊष्मा (heat) का स्थानांतरण करना है, जो एक वाष्प–संपीड़न चक्र के माध्यम से होता है।
- इनडोर एयर से ऊष्मा अवशोषण: कमरे की गर्म हवा इवैपोरेटर (Evaporator) से होकर गुजरती है, जहाँ रेफ्रिजरेंट उबलता है और हवा से नमी हटाकर उसे ठंडा करता है।
- संपीड़न चरण: अब यह रेफ्रिजरेंट अत्यधिक गर्म भाप (superheated vapour) में बदल जाता है, जिसे एक कंप्रेसर द्वारा संपीड़ित किया जाता है। इससे इसका तापमान और दबाव दोनों बढ़ते हैं — और यही चरण AC की सबसे ज्यादा बिजली खपत करता है।
- ऊष्मा निष्कासन (Heat Release):
इसके बाद यह गर्म गैस कंडेंसर (Condenser) से होकर बाहर निकलती है, जहाँ यह बाहर की हवा में ऊष्मा छोड़ती है और फिर से तरल में बदल जाती है। - विस्तार और पुनः चक्र:
यह तरल एक एक्सपैंशन वाल्व से होकर निकलता है, जिससे उसका दबाव और तापमान कम होता है।
इसके बाद यह दोबारा इवैपोरेटर में प्रवेश करता है — और चक्र दोहराया जाता है। - एयर कंडीशनर तभी सबसे कुशलता से कार्य करता है, जब रेफ्रिजरेंट अपनी इष्टतम तापमान सीमा में ऊष्मा अवशोषण और निष्कासन कर रहा होता है।
सरकार द्वारा प्रस्तावित एसी तापमान सीमा: ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम
- प्रस्ताव का इतिहास: यह प्रतिबंध पहले 2018 और 2021 में भी प्रस्तावित किया गया था। इसका उद्देश्य ऊर्जा की बचत और जनस्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
- प्रभाव का दायरा: यह नया नियम घरों, होटलों और कारों में उपयोग होने वाले एयर कंडीशनरों पर लागू होगा।
- प्रसंगिकता: भारत में 2030 तक एयर कंडीशनर का लोड 200 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है, जो बिजली आपूर्ति पर भारी दबाव डालेगा।
- ऊर्जा दक्षता के लाभ:
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के अनुसार:- एसी का तापमान 1°C बढ़ाने से लगभग 6% बिजली की बचत होती है।
- अगर एसी को डिफॉल्ट 24°C पर सेट किया जाए तो हर साल 20 अरब यूनिट बिजली की बचत संभव है।
निष्कर्ष: यह प्रस्ताव ऊर्जा संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलता है, और भारत में अनिवार्य नियमन का एक मजबूत आधार बनाता है।