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एयर इंडिया बोइंग 787 विमान हादसा (Air India Boeing 787 Aircraft Incident) | Apni Pathshala

Air India Boeing 787 Aircraft Incident

सामान्य अध्ययन पेपर III: आधारिक संरचना 

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में अहमदाबाद से लंदन गेटविक जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान भरते ही मेघानी नगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कुल 242 यात्री सवार थे। इस विमान हादसे को अब तक का सबसे खतरनाक हादसा माना जा रहा है।

(Air India Boeing 787 Aircraft Incident) एयर इंडिया 787 ड्रीमलाइनर हादसे की जानकारी 
  • दुर्घटना:
      • 12 जून 2025 को दोपहर 1:39 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या AI171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते हुए लंदन के गेटविक हवाई अड्डे की ओर रवाना हुई।
      • टेकऑफ़ करने के कुछ समय बाद ही विमान के पायलट ने MayDay का सिग्नल दिया, लेकिन ATC द्वारा पुनः विमान से संपर्क नहीं हो पाया।
      • उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद 15km दूर मेघानी नगर स्थित मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • यात्री:
      • इस फ्लाइट में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 217 वयस्क, 11 बच्चे, और 2 शिशु शामिल थे। इसके अतिरिक्त, 12 क्रू मेंबर भी बोर्ड पर थे। 
      • इनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे।
        • सीट 11A पर बैठे एक ब्रिटिश-भारतीय मूल के व्यक्ति को दुर्घटना से चमत्कारिक रूप से बचा हुआ पाया गया। 
    • कारण:
      • टेकऑफ के बाद विमान का लैंडिंग गियर सामान्यतः ऊपर हो जाना चाहिए था, लेकिन वो नीचे ही रहा।
      • विंग फ्लैप्स – जो आमतौर पर उड़ान के लिए जरूरी होते हैं – उन्हें बहुत जल्दी वापस लिया गया, जिससे विमान की लिफ्ट (उठान शक्ति) कमजोर हो गई और वह स्टॉल कर गया।
  • जांच:
    • भारतीय नागर विमानन मंत्रालय ने दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। 
    • विमान की ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग और ATC संवाद की गहराई से जांच की जा रही है। 

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्या हैं?

  • परिचय:
      • बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को आधुनिक एविएशन टेक्नोलॉजी का चमत्कार माना जाता है। 
      • यह एक मिड-साइज, ट्विन-इंजन, वाइड-बॉडी विमान है, जिसे लंबी दूरी की उड़ानों के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है। 
      • इसका उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुविधा प्रदान करने के साथ साथ ईंधन की खपत को भी कम करना है।
  • शुरुआत:
      • इस आधुनिक विमान की परिकल्पना वर्ष 2003 में “7E7 परियोजना” के रूप में की गई थी, जो बाद में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
      • बोइंग ने पारंपरिक डिज़ाइन पर लौटने का फैसला करते हुए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया। 
      • लगभग 5 लाख ऑनलाइन मतों के जरिए इसे “ड्रीमलाइनर” नाम दिया गया, जो इसके आधुनिक और सपने जैसे उड़ान अनुभव को दर्शाता है।
      • ड्रीमलाइनर की पहली उड़ान 15 दिसंबर 2009 को हुई, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और उत्पादन में देरी के कारण इसका कमर्शियल सेवा में प्रवेश अक्टूबर 2011 में हुआ। ANA (All Nippon Airways) को यह पहला विमान मिला।
      • भारत में एयर इंडिया इस विमान की पहली उपयोगकर्ता बनी। 
        • वर्ष 2012 में भारत को अमेरिका के साउथ कैरोलिना स्थित बोइंग संयंत्र से पहला 787-8 मॉडल सौंपा गया था, जो आज भी लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सक्रिय है।
        • बोइंग 787 विमान वर्तमान में दिल्ली से न्यूयॉर्क और मुंबई से लंदन जैसे अंतरमहाद्वीपीय रूट्स पर लगातार उड़ानों का संचालन करता है।
  • विशेषताएं:
      • इसका 50% स्ट्रक्चर कंपोज़िट मटेरियल (जैसे कार्बन फाइबर) से बना है, जिससे यह हल्का, मजबूत और ज्यादा फ्यूल-इफिशिएंट बनता है।
      • इसमें सबसे बड़ी विंडोज (27×47 सेमी) दी गई हैं, जो प्राकृतिक रोशनी और दृश्य अनुभव को बेहतर बनाती हैं।
      • इस विमान के अंदर का दबाव स्तर लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई के समतुल्य रखा जाता है।
      • LED लाइटिंग सिस्टम यात्रियों के बॉडी क्लॉक को एडजस्ट करने में मदद करता है।
      • ओवरहेड स्टोरेज अधिक और सुविधाजनक है।
      • बोइंग 787 में दो विकल्प दिए गए हैं – जनरल इलेक्ट्रिक GEnx या रोल्स-रॉयस ट्रेंट 1000 इंजन।
        • ये इंजन न केवल 60% कम शोर उत्पन्न करते हैं, बल्कि अधिक ऊंचाई और रफ्तार पर भी कुशलता से काम करते हैं। 
      • इसकी क्रूज़ स्पीड मैक 0.85 है, जो इसे लंबी दूरी की उड़ानों के लिए आदर्श बनाती है।
      • यात्रियों के लिए कम शोर, बेहतर एयर क्वालिटी, और आरामदायक सीटें इस विमान को खास बनाती हैं।
      • अधिकतर एयरलाइंस में इन्फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम, USB चार्जिंग पोर्ट, और बिजनेस क्लास में फ्लैट-बेड सीटें पाई जाती हैं।
  • प्रमुख मॉडल:
  • ड्रीमलाइनर के तीन प्रमुख मॉडल हैं –
  • 787-8: 248 यात्रियों के साथ लगभग 13,500 किमी की उड़ान क्षमता।
  • 787-9: 296 यात्रियों के साथ 14,000 किमी की दूरी तय करने में सक्षम।
  • 787-10: 336 यात्रियों के साथ 11,700 किमी की रेंज।
  • यह विमान हब-टू-हब सिस्टम के बजाय पॉइंट-टू-पॉइंट मॉडल को प्राथमिकता देता है।

विमानन इतिहास की सबसे भयावह दुर्घटनाएँ

  • टेनेरिफ रनवे दुर्घटना – 27 मार्च 1977 को स्पेन के कैनरी द्वीपों के लॉस रोडियोज़ एयरपोर्ट पर घने कोहरे और संवाद की विफलता के कारण दो बोइंग 747 विमान — पैन एम 1736 और केएलएम 4805 — एक ही रनवे पर टकरा गए, जिससे 583 लोगों की मौत हो गई।
  • चरखी दादरी मिड-एयर टक्कर – 12 नवंबर 1996, भारत के चरखी दादरी में Kazakhstan Airlines और Saudi Arabian Airlines के विमानों की हवा में भीषण टक्कर हुई। दोनों विमान दिल्ली के आसमान में एक ही रास्ते में थे और गलत निर्देशों के चलते यह टक्कर हुई। 349 लोगों की मौत के साथ यह अब तक की सबसे भयानक मिड-एयर टक्कर मानी जाती है।
  • तुर्की एयरलाइंस डिज़ाइन त्रुटि – 3 मार्च 1974, पेरिस के पास Turkish Airlines Flight 981 दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस विमान में कार्गो डोर डिज़ाइन में गंभीर खामी थी, जिससे हवा में दबाव के कारण दरवाज़ा खुल गया और विमान अनियंत्रित हो गया। 346 यात्रियों की मृत्यु हुई।
  • एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट – 23 जून 1985, एयर इंडिया की फ्लाइट 182 आयरलैंड के आसमान में उड़ रही थी जब उसमें बम विस्फोट हुआ। यह विमान कनाडा से भारत जा रहा था और विस्फोट के पीछे खालिस्तान समर्थकों की साजिश बताई गई। 329 यात्रियों की मौत हुई।
  • सउदी फ्लाइट 163 – 19 अगस्त 1980, रियाद से जेद्दा जा रही Saudia Flight 163 में उड़ान के कुछ ही देर बाद आग लग गई। पायलट विमान को वापस रियाद उतारने में सफल रहा, लेकिन इमरजेंसी निकासी में हुई देरी से यात्रियों को बाहर नहीं निकाला जा सका। 301 लोगों की मौत दम घुटने से हुई।
  • जापान एयरलाइंस की त्रासदी – 12 अगस्त 1985 को टोक्यो से ओसाका जा रही जापान एयरलाइंस की फ्लाइट 123 उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही दबाव कम होने के कारण नियंत्रण प्रणाली विफल हो गई और विमान पहाड़ी क्षेत्र में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया; इस घटना में 520 लोगों की जान गई।

विमान हादसों को कम करने के प्रभावी उपाय

  • पायलट प्रशिक्षण: पायलट की भूमिका विमान के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि पायलट पूरी तरह प्रशिक्षित न हो या मानसिक रूप से थका हुआ हो, तो निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम, सिमुलेटर आधारित अभ्यास, और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण को नियमित किया जाना चाहिए। 
  • तकनीकी जांच: हर विमान को पूर्वनिर्धारित समय अंतराल पर गहन निरीक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले रखरखाव की प्रक्रिया से गुज़ारना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, विमान के हर हिस्से की स्वचालित जाँच प्रणाली और इंजीनियरिंग निरीक्षण को अपडेट करते रहना आवश्यक है।
  • एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी: वायु यातायात नियंत्रण (ATC) की सटीकता और त्वरित निर्णय क्षमता ही दो विमानों के बीच टक्कर जैसी घटनाओं को रोक सकती है। ATC प्रणाली में उन्नत रडार तकनीक, स्वचालित टकराव चेतावनी सिस्टम, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग को शामिल किया जाना चाहिए।

मौसम की भविष्यवाणी: खराब मौसम कई विमान हादसों की जड़ होता है। ऐसी स्थिति में पायलट का भरोसा केवल अपने उपकरणों और ATC पर होता है। इसलिए उड़ान से पहले और उड़ान के दौरान मौसम का रीयल-टाइम डाटा उपलब्ध कराना ज़रूरी है। सैटेलाइट तकनीक और क्लाउड कंप्यूटिंग की मदद से मौसम पूर्वानुमान को और भी सटीक और विस्तृत बनाया जा सकता है।

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