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अमेरिका भारत को तीन प्राचीन मूर्तियां लौटाएगा (America will return three ancient statues to India) | Apni Pathshala

America will return three ancient statues to India

America will return three ancient statues to India

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान, स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत को तीन बहुमूल्य प्राचीन कांस्य मूर्तियां वापस करने की घोषणा की है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। 

मुख्य मूर्तियां और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • लौटाई जाने वाली तीनों मूर्तियां दक्षिण भारत के महान राजवंशों की कला और धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं: 
  • शिव नटराज (Shiva Nataraja): यह प्रतिमा 10वीं शताब्दी (लगभग 990 ईस्वी) के चोल काल (Chola Period) की है। चोल शासक अपनी उत्कृष्ट कांस्य ढलाई कला (‘Lost Wax’ Technique) के लिए प्रसिद्ध थे। नटराज की यह मूर्ति ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीक है।
  • सोमस्कंद (Somaskanda): यह 12वीं शताब्दी (चोल काल) की मूर्ति है। इसमें भगवान शिव को उनकी पत्नी उमा और पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) के साथ सौम्य मुद्रा में दिखाया गया है।
  • संत सुंदरर और उनकी पत्नी परवई (Saint Sundarar with Paravai): यह 16वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य (Vijayanagar Period) की रचना है। यह दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा (Bhakti Movement) और नयनार संतों के महत्व को दर्शाती है। 

वापसी की प्रक्रिया और ‘Provenance’ रिसर्च

  • इन मूर्तियों की वापसी का आधार ‘प्रोवेनेंस रिसर्च’ (Provenance Research) रहा है। संग्रहालय की टीम ने अभिलेखीय दस्तावेजों और फ्रांसीसी संस्थान पांडिचेरी के फोटो अभिलेखागार की मदद से यह सिद्ध किया कि ये मूर्तियां 1950 के दशक में तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई थीं। 
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन प्रमाणों की पुष्टि की और पाया कि इनका निर्यात भारत के पुरातन संपदा कानूनों का उल्लंघन था।
  • भारत सरकार और स्मिथसोनियन के बीच एक अनूठा समझौता हुआ है, जिसके तहत नटराज की मूर्ति को दीर्घकालिक ऋण (Long-term loan) पर अमेरिका में ही रखा जाएगा।  

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सांस्कृतिक संपदा और कानून (Legal Framework): भारत में ‘पुरावशेष और कला निधि अधिनियम, 1972’ प्राचीन वस्तुओं के अवैध निर्यात को प्रतिबंधित करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 1970 का यूनेस्को कन्वेंशन इस प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करता है। 
  • सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy): पिछले कुछ वर्षों में, भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संपदा की सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ा है। जुलाई 2024 में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपत्ति समझौता पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य कला तस्करी को रोकना और चोरी हुई वस्तुओं की वापसी को सरल बनाना है।
  • तस्करी नेटवर्क और ‘ऑपरेशन हिडन आइडल’: इनमें से कई चोरियां कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर के नेटवर्क से जुड़ी रही हैं। अमेरिका ने अब तक 642 से अधिक पुरावशेष भारत को लौटाए हैं, जिनमें से 297 हाल ही में प्रधान मंत्री की 2024 की यात्रा के दौरान सौंपे गए थे।

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