Ananthapadmanabha temple
संदर्भ:
हाल ही में अनंतपद्मनाभ मंदिर में खुदाई के दौरान 15वीं शताब्दी का एक प्राचीन दीपक (antique lamp) खोजा गया है। यह ऐतिहासिक खोज न केवल मंदिर की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है, बल्कि उस कालखंड की कला, धातु निर्माण तकनीक और धार्मिक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत करती है।
(Ananthapadmanabha temple) अनंतपद्मनाभ मंदिर: परिचय
- स्थान: पेरदुरु, उडुपी ज़िला, कर्नाटक
- यह मंदिर अपनी दुर्लभ धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों और शैव-वैष्णव परंपराओं के समन्वय के लिए प्रसिद्ध है।
विशेष कलाकृति: प्राचीन दीप:
- यह दीपक एक दुर्लभ कलात्मक वस्तु है जिसमें शैव और वैष्णव दोनों सम्प्रदायों से जुड़ी मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।
- यह 1456 ई. में बसवन्नारस बांगा द्वारा दान किया गया था (साक्ष्य: मंदिर के अंदर प्राकार में शिलालेख)।
दीप की दो मुख्य मूर्तिकला दृश्य–
- पहला चेहरा – शैव विषय (Shaiva Theme):
- भगवान शिव प्रलय तांडव मुद्रा में – नटराज रूप में दर्शाए गए हैं।
- साथ में – पार्वती, गणपति, बृंगी, खड्ग रावण (हथियारों व खोपड़ी के प्रतीक), और कुमार (मोर पर सवार)।
- दूसरा चेहरा – वैष्णव विषय (Vaishnava Theme):
- दर्शित देवता – ब्रह्मा, इन्द्र, अनंतपद्मनाभ (चमचा और शंख लिए हुए), अग्नि और वरुण
- सभी देवता समभंग मुद्रा में हैं।
- कथा – शिव के प्रलयंकारी तांडव से भयभीत होकर सभी देवता भगवान अनंतपद्मनाभ से संरक्षण मांगते हैं, जो फिर शिव को शांत करते हैं।
अन्य महत्त्वपूर्ण मूर्तियाँ–
- गुरुड़ा – दीपक के आधार पर केंद्र में स्थित।
- शांत मुद्रा में शिव – दीप के पीछे प्रार्थनारत अवस्था में।
- खड्ग रावण – देवी मारी पर विराजमान, जिन्हें आज भी स्थानीय शक्ति देवी के रूप में पूजा जाता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व–
- यह दीपक दुर्लभ ऐतिहासिक, धार्मिक और कलात्मक धरोहर है।
- यह शैव-वैष्णव समन्वय और लोक देवी परंपरा का अद्वितीय उदाहरण है।
- मूर्तियों की जटिलता और कथात्मक प्रस्तुति इसे भारतीय मूर्तिकला के उत्कृष्ट उदाहरणों में स्थान देती है।