Artemis II mission
संदर्भ:
हाल ही में NASA ने अपने आर्टिमिस II मिशन को अप्रैल 2026 तक लॉन्च करने की योजना बनाई है, जो 1972 के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के पास ले जाएगा।
आर्टिमिस II मिशन क्या हैं?
आर्टिमिस II एक 10-दिवसीय क्रू फ्लाईबाई (Crewed Flyby) मिशन है। जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर लौटेंगे। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान और स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट की मानव-रेटेड क्षमताओं का परीक्षण करना है।
- यह भविष्य के आर्टिमिस III मिशन के लिए एक ‘ब्रीज मिशन’ के रूप में कार्य करेगा, जिसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्यों को उतारना है।
लॉन्च विवरण:
- लॉन्च दिनांक: 1 अप्रैल, 2026।
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- लॉन्च स्थान: कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा (लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B)।
- देरी का कारण: पूर्व में हाइड्रोजन रिसाव और हीलियम रिसाव जैसी तकनीकी समस्याओं के कारण लॉन्च की तारीखों में बदलाव किया गया था।
- क्रू (Crew): इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल है:
- रीड वाइसमैन (कमांडर): मिशन का नेतृत्व करेंगे।
- विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनेंगे।
- क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ): चंद्रमा के पास जाने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री।
- जेरेमी हैनसन (मिशन विशेषज्ञ): चंद्रमा के मिशन पर जाने वाले पहले कनाडाई (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी)।
तकनीकी घटक:
- स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS): यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जो ओरियन यान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजने के लिए आवश्यक थ्रस्ट प्रदान करता है।
- ओरियन स्पेसक्राफ्ट: इसमें क्रू मॉड्यूल (जहाँ अंतरिक्ष यात्री रहेंगे) और सर्विस मॉड्यूल शामिल हैं। यह गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) की विकिरण और अत्यधिक तापमान से सुरक्षा प्रदान करता है।
- इंटेरिम क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (ICPS): यह रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है जो ओरियन को चंद्रमा की ओर धकेलता है।
मिशन के चरण:
- प्रारंभिक कक्षा: लॉन्च के बाद, ओरियन पृथ्वी की एक उच्च कक्षा में 24 घंटे बिताएगा ताकि लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच की जा सके।
- प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशंस: अंतरिक्ष यात्री मैन्युअल रूप से ओरियन को ICPS (ऊपरी चरण) के पास ले जाने का अभ्यास करेंगे, जो भविष्य के डॉकिंग मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- चंद्र फ्लाईबाई: चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करते हुए, ओरियन चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा। यात्री वहां से पृथ्वी और चंद्रमा के ‘दूर के हिस्से’ (Far Side) के दुर्लभ दृश्य देखेंगे।
- वापसी: लगभग 10 दिनों के बाद, ओरियन प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन (Splashdown) करेगा।
महत्व:
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: यह मिशन भारत के लिए भी प्रासंगिक है क्योंकि भारत ने आर्टिमिस समझौते (Artemis Accords) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो चंद्रमा के शांतिपूर्ण और पारदर्शी अन्वेषण को बढ़ावा देता है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: गहरी अंतरिक्ष नेविगेशन, संचार और विकिरण सुरक्षा में प्रगति भारत के अपने भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों (जैसे चंद्रयान-4) के लिए संदर्भ बिंदु प्रदान करती है।
- मानवीय अन्वेषण: यह चंद्रमा पर एक स्थायी मानव उपस्थिति बनाने और अंततः मंगल (Mars) तक पहुंचने के नासा के “Moon to Mars” विजन का हिस्सा है।
