Assam Bodo Peace Accord

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में ‘बागुरुम्बा दहोउ’ सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बोडो शांति समझौते की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि इस ऐतिहासिक समझौते ने न केवल दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त किया, बल्कि हजारों युवाओं को हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है।
बोडो शांति समझौता (Bodo Peace Accord) क्या हैं?
- बोडो शांति समझौता (Bodo Peace Accord) मुख्य रूप से असम में दशकों से चले आ रहे बोडो उग्रवाद और पृथक राज्य की मांग को समाप्त करने के लिए भारत सरकार, असम सरकार और बोडो समूहों के बीच हुआ एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता है।
- यह एक प्रकार का शांति और विकास समझौता है, जिस पर 27 जनवरी 2020 को हस्ताक्षर किए गए। यह संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत एक प्रशासनिक व्यवस्था है। को केंद्र सरकार, असम सरकार और NDFB के सभी गुटों के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
बोडो विवाद का इतिहास:
बोडो असम का सबसे बड़ा अनुसूचित जनजाति समुदाय है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 5-6% है। पृथक ‘बोडोलैंड’ की मांग का इतिहास लंबा रहा है:
- प्रारंभिक मांग (1967-68): ‘प्लेन्स ट्राइबल काउंसिल ऑफ असम’ (PTCA) द्वारा पहली बार राजनीतिक स्वायत्तता की मांग की गई।
- आक्रामक चरण (1980 के दशक): ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ। इसी दौरान सशस्त्र समूहों जैसे NDFB का उदय हुआ।
- पिछले समझौते: 1993 (प्रथम समझौता) और 2003 (द्वितीय समझौता) के माध्यम से ‘बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद’ (BTC) का गठन किया गया, लेकिन पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो सकी थी।
2020 समझौते की प्रमुख विशेषताएं:
- प्रमुख पक्ष: भारत सरकार (गृह मंत्रालय), असम सरकार, NDFB (नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड) के सभी गुट और ABSU (ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन)।
- क्षेत्रीय पुनर्गठन: ‘बोडोलैंड क्षेत्रीय स्वायत्त जिला’ (BTAD) का नाम बदलकर ‘बोडोलैंड क्षेत्रीय क्षेत्र’ (BTR) कर दिया गया।
- प्रशासनिक विस्तार: BTC में सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 की गई।
- वित्तीय पैकेज: केंद्र और राज्य सरकार ने क्षेत्र के विकास के लिए 1500 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज प्रदान किया।
- सांस्कृतिक व भाषाई सुरक्षा: देवनागरी लिपि में बोडो भाषा को असम की सह-आधिकारिक भाषा (Associate Official Language) का दर्जा दिया गया।
- पुनर्वास: 1500 से अधिक सशस्त्र कैडरों का आत्मसमर्पण सुनिश्चित किया गया और प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता दी गई।
वर्तमान स्थिति:
- 82% क्लॉज का कार्यान्वयन: गृह मंत्रालय के अनुसार, समझौते की लगभग 82% शर्तों को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
- सशस्त्र संघर्ष का अंत: BTR क्षेत्र से AFSPA (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) को बड़े पैमाने पर हटा लिया गया है, जो सुधरती सुरक्षा व्यवस्था का प्रतीक है।
- मुख्यधारा में वापसी: हजारों पूर्व उग्रवादियों को कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार से जोड़ा गया है। लगभग 4,881 पूर्व कैडरों के पुनर्वास पर 287 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
- बुनियादी ढांचा: कोकराझार मेडिकल कॉलेज और उडलगुरी में बोडोलैंड विश्वविद्यालय के परिसरों का विस्तार इस क्षेत्र में शैक्षिक क्रांति ला रहा है।
