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AUKUS Alliance

चर्चा में क्यों

हाल ही में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले संगठन AUKUS में जल्द ही जापान की एंट्री हो सकती है। चीन का मुकाबला करने के लिए तीनों देश जल्द ही बातचीत शुरू करेंगे, जिससे जापान के सदस्य बनने का रास्ता खुल सके। 

AUKUS क्या है?

AUKUS ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन (UK) और अमेरिका का मिलकर बनाया हुआ एक गठबंधन है। यह ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस (AUKUS) के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिये एक त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी है, जिस पर वर्ष 2021 में हस्ताक्षर किये गए थे। यह हिंद-प्रशांत इलाके में सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाया गया है।

इस गठबंधन के दो पहलू हैं:

  • परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां: ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली आधुनिक पनडुब्बियां बनाने और खरीदने में मदद मिलेगी।
  • अत्याधुनिक तकनीक का विकास: तीनों देश मिलकर नई तकनीकें (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विकसित करेंगे और आपस में सूचना साझा करेंगे।

QUAD से कितना अलग है AUKUS?

  • क्वॉड देशों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत शामिल हैं। ये चारों मिलकर बहुपक्षीय बातचीत करते हैं। इसमें हाई टेक्नोलॉजी या कोई बड़ी डील नहीं होती है।
  • वहीं QUAD से अलग हटकर ऑस्ट्रेलिया के साथ AUKUS समझौता एक नए मिलिट्री अलायंस की शुरुआत है। इस तरह का मिलिट्री अलायंस करने में भारत में एक तरह की हिचकिचाहट है, क्योंकि वो अमेरिका के साथ-साथ रूस और ईरान से भी संबंध रखना चाहता है।

AUKUS की पनडुब्बी योजना क्या है?

AUKUS का पहला लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली, लेकिन आम हथियारों से लैस पनडुब्बियां मुहैया कराना है। यह ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सुरक्षा क्षमता को काफी बढ़ा देगा। अभी ऑस्ट्रेलिया ज्यादातर डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का इस्तेमाल करता है। परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बियों के कई फायदे हैं:

  • ज्यादा दूरी तय करना
  • ज्यादा देर तक पानी में रहना
  • आसानी से दुश्मन को दिखाई ना देना

हिंद-प्रशांत इलाके में बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए ये खूबियाँ अब बहुत जरूरी हो गई हैं।

आने वाले सात सालों में ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा वाली अपनी खुद की पनडुब्बियां बनाने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान देगा। इन पनडुब्बियों को SSN (Sovereign Nuclear-Powered) कहा जाता है। ध्यान दें कि SSN सिर्फ परमाणु ऊर्जा से चलती हैं, लेकिन इनमें परमाणु बम नहीं होते। ये उन SSBN पनडुब्बियों से अलग हैं जो परमाणु बम ले जाने में सक्षम होती हैं।

SSN-AUKUS नाम की ये नई पनडुब्बियां ब्रिटिश डिजाइन और अमेरिकी तकनीक का मिश्रण होंगी। इन्हें 2030 के दशक के आखिर तक ऑस्ट्रेलिया में ही बनाने की उम्मीद है। तब तक के लिए, 2030 की शुरुआत में अमेरिका ऑस्ट्रेलिया को अपनी वर्जीनिया श्रेणी की 3-5 SSN बेचेगा। साथ ही 2027 से ही अमेरिका और ब्रिटेन भी अपने परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बियों को “सबमरीन रोटेशनल फोर्स-वेस्ट” कार्यक्रम के तहत इस इलाके में तैनात करेंगे।

अत्याधुनिक तकनीक का विकास क्या है?

  • AUKUS का दूसरा मुख्य भाग उभरती हुई तकनीकों पर सहयोग करना है।
  • इसका मकसद चीन सहित बढ़ते भू-राजनीतिक मुकाबले में बराबरी बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का विकास करना और उन्हें एक-दूसरे के साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाना है।
  • इसमें रोबोटिक और स्वचालित पानी के नीचे चलने वाले वाहन, क्वांटम तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत साइबर क्षमताएं, हाइपरसोनिक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
  • यह शोध और विकास की पूरी प्रक्रिया को कवर करेगा, जिसमें डिजाइन से लेकर तैनाती तक सब शामिल है।
  • कुछ नियमों और दफ्तरी प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उदाहरण के लिए, तीनों देशों के सैन्य और असैन्य कर्मियों ने हवाई और जमीनी वाहनों के परीक्षण में भाग लिया, जिसमें पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल का आदान-प्रदान हुआ और एक समूह में काम करने वाले एआई-संचालित उपकरणों ने लक्ष्यों का पता लगाया और उन्हें ट्रैक किया।

AUKUS समझौते का क्या महत्व है?

अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी तकनीक अब तक सिर्फ एक बार (1958 में) ब्रिटेन के साथ साझा की है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए:

  • इस साझेदारी के तहत तीनों देशों के वैज्ञानिक, उद्योग और रक्षा बल मिलकर इस इलाके को सुरक्षित बनाने का काम करेंगे।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हथियारों की होड़ बढ़ेगी।

ऑस्ट्रेलिया के लिए:

  • ऑस्ट्रेलिया के पास अब तक परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बियां नहीं थीं।
  • यह कदम ऑस्ट्रेलिया को समुद्री क्षेत्र में मजबूत बनाएगा, खासकर चीन की बढ़ती हुई आक्रामकता को देखते हुए।
  • कुछ लोगों का कहना है कि इससे चीन नाराज होगा जो ऑस्ट्रेलिया के लिए अच्छा नहीं है।
  • परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बियां रखने वाला ऑस्ट्रेलिया अब सिर्फ छह देशों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है – भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन।
  • गौर करने वाली बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया ऐसा पहला देश होगा जिसके पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां तो होंगी, लेकिन वो खुद परमाणु ऊर्जा का उत्पादन नहीं करता।

भारत के लिए:

  • यह नया समझौता चीन को टक्कर देने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा।
  • गौरतल बना है कि ऑस्ट्रेलिया और भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में करीबी रणनीतिक साझेदार हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया “क्वाड” समूह का सदस्य भी है, मजबूत ऑस्ट्रेलिया का मतलब और मजबूत क्वाड।

फ्रांस के लिए:

  • फ्रांस इस समझौते से खुश नहीं है और इसे “पीठ में छुरा घोंपना” बताता है।
  • बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने 2016 में फ्रांस से 12 अटैक-क्लास पनडुब्बियां खरीदने का करार किया था।
  • लेकिन मौजूदा समझौते के चलते ऑस्ट्रेलिया ने ये करार खत्म कर दिया।

AUKUS समूह से संबंधित चिंताएँ:

क्षेत्रीय सुरक्षा:

  • AUKUS को चीन द्वारा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरे के रूप में देखा जाता है।
  • समझौते में संवेदनशील रक्षा प्रौद्योगिकी और खुफिया जानकारी साझा करना शामिल है, जो क्षेत्र में सामरिक संतुलन को बदल सकता है।

कूटनीतिक निहितार्थ:

  • AUKUS को भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए एक कूटनीतिक झटका माना जाता है।
  • इन देशों को चिंता है कि AUKUS उन्हें हाशिए पर धकेल देगा और क्षेत्र में उनके प्रभाव को कम करेगा।

अप्रसार पर प्रभाव:

  • AUKUS में ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी तकनीक का हस्तांतरण शामिल है, जो वैश्विक अप्रसार प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है और अन्य देशों को अपनी परमाणु क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

आर्थिक परिणाम:

  • AUKUS ने भारत जैसे देशों के लिए आर्थिक चिंताएं पैदा की हैं, जिनके पास महत्वपूर्ण रक्षा उद्योग हैं।
  • समझौते से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है और यह ऑस्ट्रेलिया को रक्षा उपकरण बेचने की इन देशों की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

चीन का पर रुख –

  • चीन ने ऑकस (AUKUS) को आलोचना का निशाना बनाते हुए इसे “आधिपत्य और विभाजनकारी” करार दिया है। चीन का कहना है कि यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करेगा और क्षेत्र में संघर्ष पैदा करेगा। चीन ने “नियम निर्धारण के बैनर तले विभाजन पैदा करने” के इस कृत्य का भी विरोध किया है।
  • चीन का यह विरोध तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम देखते हैं कि चीन खुद कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर रहा है और उन्हें दुर्गीकृत हवाई ठिकानों में बदल रहा है। अमेरिका और सहयोगी देशों द्वारा “नौवहन की स्वतंत्रता” अभियानों का कार्यान्वयन भी चीन को रोकने में विफल रहा है।

निष्कर्ष

ऑकस (AUKUS) सुरक्षा साझेदारी का ऑस्ट्रेलिया की रक्षा क्षमताओं और समुद्री एशिया में रणनीतिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण चुनौतियों और जोखिमों को भी पेश करता है। अपने सबसे करीबी सहयोगियों के साथ भी, अमेरिका को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो भारत और अन्य देशों के लिए अमेरिका से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी प्राप्त करने की चुनौतियों को उजागर करता है। ऑकस (AUKUS) के विकास का क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी पर व्यापक प्रभाव हो सकता है।

FAQ’s

Q. ऑकस (AUKUS) क्या है?
उत्तर: ऑकस (AUKUS) ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच एक सुरक्षा समझौता है। इसका लक्ष्य इन देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।

Q. ऑकस (AUKUS) का मुख्य फोकस क्या है?
उत्तर: ऑकस (AUKUS) के दो मुख्य भाग हैं:
1. परंपरागत हथियारों से लैस परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करना।
2. उभरती हुई तकनीकों पर सहयोग करना, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा और हाइपरसोनिक हथियार।

Q. ऑकस (AUKUS) भारत को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: ऑकस (AUKUS) का सीधा तौर पर भारत पर प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन यह क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को बदल सकता है। यह भारत के लिए रक्षा तकनीक हासिल करना भी मुश्किल बना सकता है। हालांकि, ऑकस (AUKUS) चीन को संतुलित करने में मदद कर सकता है, जो भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

Q. ऑकस (AUKUS) के क्या लाभ हैं?
उत्तर: ऑकस (AUKUS) से ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन को रक्षा क्षमताओं में बढ़ोत्तरी, नई तकनीक का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति बनाने में मदद मिल सकती है।

Q. ऑकस (AUKUS) के क्या नुकसान हैं?
उत्तर: ऑकस (AUKUS) से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। प्रौद्योगिकी साझा करने में चुनौतियों और परमाणु प्रसार के जोखिम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

PYQ’s

Q. निम्नलिखित में से कौन से देश ऑकस समूहीकरण का हिस्सा हैं?
(A) ऑस्ट्रेलिया, भारत और यूनाइटेड किंगडम
(B) भारत, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका
(C) ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका
(D) भारत, रूस और यूनाइटेड किंगडम
उत्तर: (C) ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका

Q. AUKUS सौदे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1.यह ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस का रक्षा गठबंधन है।
2. इसकी स्थापना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक तनाव का सामना करने के लिए की गई है।
3. इसके तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल होंगी।
उपरोक्त में से कौन सा कथन सही है?
(A) केवल 1 और 3
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (D) 1, 2 और 3

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