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भारतीय सेना में भैरव लाइट कमांडो बटालियन का गठन (Bhairav ​​Light Commando Battalion formed in the Indian Army) | Ankit Avasthi Sir

Bhairav ​​Light Commando Battalion formed in the Indian Army

Bhairav ​​Light Commando Battalion formed in the Indian Army

संदर्भ:

भारतीय सेना ने “भैरव लाइट कमांडो बटालियन” (Bhairav Light Commando Battalions) का गठन किया है, जो त्वरित कार्रवाई के लिए डिज़ाइन की गई उच्च प्रभावी विशेष कमांडो इकाइयां हैं। 

भैरव लाइट कमांडो बटालियन: 

  • “भैरव” बटालियन भारतीय सेना की एक नई, फुर्तीली और प्रौद्योगिकी-संचालित लड़ाकू इकाई है। बटालियन का नाम भगवान शिव के एक भयंकर रूप से लिया गया है और जिसका आदर्श वाक्य “अभयम भैरव” (निर्भय शक्ति) है। 
  • इन बटालियनों को नियमित पैदल सेना (regular infantry) और विशिष्ट पैरा स्पेशल फोर्सेज (Para SF) के बीच के अंतर को पाटने के लिए तैयार किया गया है। 
  • चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जुलाई 2025 में कारगिल विजय दिवस समारोह के दौरान इन बटालियनों के गठन की घोषणा की थी। 
  • ये इकाइयां नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ-साथ रेगिस्तानी और पूर्वी क्षेत्रों में संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करके भारत की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करती हैं।

मुख्य उद्देश्य:

भैरव बटालियनों का प्राथमिक उद्देश्य सामरिक स्तर पर त्वरित, आश्चर्यजनक और उच्च प्रभाव वाले ऑपरेशन करना है। 

  • त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid Response): सीमाओं पर, विशेष रूप से उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में, उभरते खतरों के प्रति तीव्र और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।
  • पैरा-एसएफ का बोझ कम करना (Reducing Burden on Para-SF): नियमित उच्च-जोखिम वाले सामरिक मिशनों के लिए एक समर्पित बल प्रदान करना।
  • सीमा प्रभुत्व (Border Dominance): घुसपैठ को बाधित करना, दुश्मन के ठिकानों पर अचानक हमले करना।

भूमिका:

  • ये इकाइयां मुख्य रूप से भूमि-आधारित और हेली-आधारित (heliborne) संचालन में विशेषज्ञ होंगी।
  • इनका उपयोग ‘रुद्र’ ब्रिगेड जैसी नई एकीकृत लड़ाकू संरचनाओं के साथ मिलकर किया जाएगा, जो इन्फैंट्री, तोपखाने, बख्तरबंद वाहनों से लैस हैं। 

संरचना:

  • आकार: प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होते हैं, जो नियमित 800-मजबूत इन्फैंट्री बटालियन से बहुत कम है।
  • चयन: सैनिकों को मौजूदा पैदल सेना रेजिमेंटों की ‘घातक’ (Ghatak) प्लाटूनों से चुना जा रहा है। जिन सैनिकों ने कमांडो, पर्वत युद्ध (mountain warfare), या जंगल युद्ध पाठ्यक्रमों में विशिष्ट ग्रेडिंग हासिल की है।
  • प्रशिक्षण: प्रशिक्षण में दो चरण शामिल हैं: प्रारंभिक प्रशिक्षण रेजिमेंटल केंद्रों पर, जिसके बाद पैरा स्पेशल फोर्सेज प्रशिक्षकों के साथ उन्नत प्रशिक्षण होता है। प्रशिक्षण में आधुनिक युद्ध डोमेन, जैसे साइबर युद्ध, ड्रोन संचालन और सूचना युद्ध शामिल हैं। 

आधुनिक उपकरण और प्रौद्योगिकी: 

  • ड्रोन युद्ध (Drone Warfare): भैरव इकाइयों की एक परिभाषित विशेषता प्रौद्योगिकी का एकीकरण है। प्रत्येक बटालियन में विशेष ‘अशनी’ (Ashni) प्लाटून हैं जो ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन (loitering munitions – मंडराने वाले गोला-बारूद) का संचालन करती हैं। 
  • शस्त्रागार (Arsenal): इसमें एके-203 राइफलें, क्लोज-कॉम्बैट कार्बाइन, जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें और सशस्त्र ड्रोन शामिल हैं।
  • मल्टी-डोमेन क्षमता (Multi-Domain Capability): बटालियन में तोपखाने, सिग्नल और वायु रक्षा के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिससे वे एकीकृत, बहु-क्षेत्रीय संचालन करने में सक्षम हैं।

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